अंकिता रैना

भारत
टेनिस
You learn from your experiences in matches and I feel ‘failure’ or losing matches is as equally important as winning.
लम्बाई
163 सीएम / 5'4''
जन्म तिथि
11 जनवरी 1993 Ahmedabad, India
लिंग
महिला

मेडल संख्या

0 ओलंपिक मेडल

ओलंपिक गेम्स

0 ओलंपिक गेम्स

अंकिता रैना जीवनी

भारतीय टेनिस में अंकिता रैना बिना ज़्यादा सुर्ख़ियां बटोरते हुए ख़ूब मेहनत करती हैं। एक ऐसे देश में जहां महिला टेनिस को कोई ख़ास बढ़ावा नहीं मिलता वहां अहमदाबाद में जन्मीं इस खिलाड़ी ने अपना एक अलग मुक़ाम बना लिया है।

2009 में प्रो टेनिस में करियर का आग़ाज़ करने वाली अंकिता रैना ने बहुत ही तेज़ी से अंतर्राष्ट्रीय टेनिस संघ सर्किट में आगे बढ़ रही हैं और अब तक उनके नाम 12 सिंगल्स ख़िताब हैं और 10 बार रनर-अप भी रह चुकी हैं।

अंकिता का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन 2020 में देखने को मिला जब उन्होंने भारत को पहली बार फ़ेड कप के प्ले-ऑफ़्स में पहुंचाने में अहम योगदान दिया। हालांकि इसके बाद ये टूर्नामेंट कोरोना वायरस महामारी की भेंट चढ़ गया। अंकिता रैना इस प्रदर्शन के दम पर भारत की सर्वोच्च रैंक वाली सिंगल्स और डबल्स महिला खिलाड़ी हैं।

अंकिता ने अपने सीज़न की शुरुआत कैनबेरा में हुए आईटीएफ़ इवेंट के सेमीफ़ाइनल में पहुंचकर की थी और फिर थाईलैंड में आयोजित आईटीएफ इवेंट में उन्होंने 25000 अमेरिकी डॉलर का ख़िताब भी अपने नाम किया।

अपने देश में खेलते हुए अंकिता ने अपने करियर का पहला आईटीएफ़ इवेंट जोधपुर में जीता था, जहां उन्होंने ख़िताबी भिड़ंत में तुर्की की बर्फ़ु केंगिज़ को शिकस्त दी थी।

अंकिता रैना ने अपने इसी फ़ॉर्म को फ़ेड कप एशिया/ओशियाना ज़ोन गके ग्रुप स्टेज में भी जारी रखा, जहां उनके साथ दिग्गज सानिया मिर्ज़ां भी थीं। इन दोनों ने मिलकर पहली बार भारत को फ़ेड कप के प्ले-ऑफ़्स में पहुंचाया था।

हालांकि इसके बाद कोरोना महामारी की वजह से अंकिता के सफ़र पर विराम भी लगा लेकिन जैसे ही प्रतियोगिताएं दोबारा शुरू हुईं तो इस भारतीय खिलाड़ी ने दुबई में आयोजित 100,000 प्लस अमेरिकी डॉलर वाले आईटीएफ़ इवेंट पर भी कब्ज़ा जमाया। महिला डबल्स में अंकिता रैना ने ये जीत जॉर्जिया की एकाटेरिन गोरगॉज़ के साथ मिलकर हासिल की थी, जो आईटीएफ़ सर्किट में उनका 18वां युगल ख़िताब था।

इस जीत ने अंकिता रैना को डब्ल्यूटीए डबल्स रैंकिंग में 117वें स्थान पर पहुंचा दिया, वह 2017 से ही भारत की शीर्ष सिंगल्स खिलाड़ी हैं।

2019 में अंकिता रैना कई अंतर्राष्ट्रीय दिग्गजों के सामने भी कोर्ट में उतरीं थीं जिनमें पूर्व यूएस ओपन चैंपियन सामंथा तोसुर भी शामिल थीं, जो उनकी पहली टॉप-100 शिकार भी थीं।

अपने बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर अंकिता रैना भारत की ओर से डब्ल्यूटीए रैंकिंग में टॉप-200 खिलाड़ी में शामिल होने वाली सिर्फ़ पांचवीं भारतीय महिला हैं। अंकिता ने 2018 एशियन गेम्स में कांस्य पदक भी जीता और ऐसा करने वाली वह सानिया मिर्ज़ा के बाद सिर्फ़ दूसरी भारतीय खिलाड़ी हैं।

अहमदाबाद के मध्यवर्गीय कशमीरी परिवार में जन्मीं अंकिता रैना ने अपने बड़े भाई को देखकर टेनिस में करियर बनाया। अंकिता के भाई अंकुर पास के ही एक कोर्ट में टेनिस खेलते थे और फिर बाद में अंकिता ने भी उसी कोर्ट से अपने टेनिस करियर का आग़ाज़ किया।

हालांकि उनके भाई अंकुर राज्य स्तर पर ही टेनिस खेला करते थे लेकिन अंकिता रैना ने अंडर-8 से ही कमाल का प्रदर्शन करते हुए आगे बढ़ती गईं।

भारतीय टेनिस संघ की पहल फ़्यूचर किड्स ने अंकिता रैना के करियर को आगे बढ़ाने में अहम योगदान दिया।

शुरुआत में तो अंकिता इस प्रतिस्पर्धा में भाग लेने के क़ाबिल नहीं थीं क्योंकि ये अंडर-10 प्रतियोगिता थी और रैना तब अंडर-8 में खेल रहीं थीं। लेकिन उनके भाई ने आयोजकों को किसी तरह मनाया और फिर उन्हें खेलने का मौक़ा मिला, जहां अंकिता ने महाराष्ट्र की नंबर-1 खिलाड़ी सुरभी वर्मा को हराकर चैंपियनशिप जीत ली।

ये तो बस एक शुरुआत थी, इसके बाद कई एज ग्रुप में अंकिता ने जीत का सिलसिला बरक़रार रखा और फिर वह पुणे चली गईं जहां प्रख्यात कोच हमेंत बेंद्रे की सानिध्य में उन्होंने इस खेल की बारीकियों को समझा।

अंकिता के करियर में इसके बाद साल 2007 में अंडर-14 एशियन टेनिस सीरीज़ अहम रही, जहां उन्होंने कमाल का प्रदर्शन करते हुए सभी को चौंकाया और मेलबर्न पार्क में आयोजित फ़ाइनल में पहुंच गईं थीं। हालांकि फ़ाइनल में उन्हें ऑस्ट्रेलिया की खिलाड़ी के हाथों हार मिली और फिर उन्होंने सफ़र दूसरे स्थान पर समाप्त किया।

भारतीय महिला टेनिस स्टार का करियर फ़िलहाल भले ही आईटीएफ़ सर्किट तक सीमित हो लेकिन अंकिता जिस स्तर का टेनिस लगातार खेल रहीं हैं, उसे देखने के बाद लगता है कि जल्द ही ये खिलाड़ी डब्ल्यूटीए स्तर पर भी अपनी अलग छाप छोड़ेंगी।

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