गेम्स मेडल

खेल परिणाम खेल इवेंट
रियो डी जेनेरियो 2016
खेल परिणाम खेल इवेंट
रियो डी जेनेरियो 2016
#AC Weightlifting Flyweight (≤48 kilograms)

साइखोम मीराबाई चानू

भारत
वेटलिफ्टिंग
लम्बाई
145 सीएम / 4'9''
वज़न
48 किग्रो / 105 पाउंड्स
जन्म तिथि
8 अगस्त 1994 Nongpok Kakching, India
लिंग
महिला

मेडल संख्या

0 ओलंपिक मेडल

ओलंपिक गेम्स

1 ओलंपिक गेम्स

साइखोम मीराबाई चानू जीवनी

बचपन में जलाने वाली लकड़ी का गट्ठर उठाने से लेकर अंतरराष्ट्रीय पोडियम तक पहुंचने का वेटलिफ्टर साईखोम मीराबाई चानू का सफर बेहद शानदार रहा है। यह उनके संघर्ष और लगन की दास्तां बयां करता है।

स्कॉटलैंड में हुए 2014 राष्ट्रमंडल खेलों में 48 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक जीतकर मिराबाई चानू ने 20 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

फिर रियो 2016 ओलंपिक के लिए नेशनल ट्रायल में मीराबाई चानू ने सात बार की विश्व चैंपियनशिप पदक विजेता कुंजारानी देवी के 12 साल पुराने नेशनल रिकॉर्ड को तोड़ दिया। इसी के साथ उन्होंने ओलंपिक खेलों के लिए भारतीय दल में अपनी जगह पक्की की।

चयन ट्रायल में उनके कुल 192 किलोग्राम भार उठाने के रिकॉर्ड के साथ ही मीराबाई चानू से रियो ओलंपिक में पदक की उम्मीद लगाए जाने लगी।

लेकिन ब्राजील में मीराबाई चानू बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाईं, 'क्लीन एंड जर्क' में उनके तीनों प्रयास असफल रहे और 'स्नैच' में केवल उनका एक ही प्रयास सही रहा।

अपने नाम के स्तर का प्रदर्शन न कर पाने के बाद वह घर लौटीं, मीराबाई चानू ने इस तरह की निराशा वाली वापसी के बारे में कभी नहीं सोचा था। लेकिन इस भारतीय वेटलिफ्टर ने हमेशा अपनी शारीरिक शक्ति के साथ-साथ अपनी मानसिक स्थिति पर भी काबू पाने में सफलता हासिल की है।

इम्फाल के एक गांव नोंगपोक काकचिंग में एक सामान्य परिवार में जन्मी छह भाई-बहनों में सबसे छोटी चानू को अपनी लिफ्टिंग की ताकत का पहली बार अंदाज़ा 12 साल की उम्र में हुआ। एक बार उनसे चार साल बड़ा भाई जलाने वाली लकड़ी का गट्ठर उठाने की कोशिश कर रहा था, जो कि भारी होने की वजह से उनसे नहीं उठा। तब उन्होंने कोशिश की और इसे आसानी से उठा लिया। इसी के बाद उन्हें अपनी शक्ति का अंदाज़ा हुआ।

हमेशा से खेलों में दिलचस्पी रखने वाली मीराबाई चानू वेटलिफ्टिंग को चुनने से पहले करियर की शुरुआत में इंफाल के एक स्थानीय स्पोर्ट्स हॉल में तीरंदाज़ी करना सीखना चाहती थीं।

लेकिन जलाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली लकड़ी के गट्ठर को उठाने की क्षमता ने उनके करियर को एक नया मोड़ दे दिया। यह खेल मानो उनके खून में था। उन्होंने भारत की सबसे सफल महिला वेटलिफ्टर कुंजारानी देवी की उपलब्धियों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ना शुरू कर दिया।

यूएसए के अनाहेम में 2017 विश्व भारोत्तोलन चैंपियनशिप में मीराबाई चानू ने दो दशकों बाद गोल्ड मेडल पर कब्ज़ा किया और वह ऐसा करने वाली पहली भारतीय वेटलिफ्टर बन गईं। सिडनी 2000 की कांस्य पदक विजेता कर्णम मल्लेश्वरी की खिताबी जीत के बाद 1994 और 1995 के बाद 48 किग्रा वर्ग में उनका यह पहला प्रयास था।

इसके बाद उन्होंने 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में भी गोल्ड मेडल पर कब्ज़ा किया। साथ ही इस इवेंट में उन्होंने ‘स्नैच’, क्लीन एंड जर्क’ के अलावा ‘टोटल’ में भी रिकॉर्ड दर्ज किया। लेकिन पीठ के निचले हिस्से में लगी चोट ने उनके इस शानदार सीज़न पर विराम लगा दिया।

इसकी वजह से चानू 2018 के एशियाई खेलों और विश्व चैंपियनशिप में नहीं शामिल हो पाईं। और फिर चोट से उबरने में उन्हें करीब एक साल लग गया।

इसके बाद 2019 में चानू थाईलैंड में होने वाली विश्व चैंपियनशिप में प्रतिस्पर्धा करने के लिए वापसी की, जहां वह चौथे स्थान पर रहीं। लेकिन पटाया के इस इवेंट में उनका प्रदर्शन फिर भी यादगार बन गया, क्योंकि वह अपने करियर में पहली बार 200 किग्रा भार उठाने में सफल रहीं।

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