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खेल परिणाम खेल इवेंट
रियो डी जेनेरियो 2016
खेल परिणाम खेल इवेंट
रियो डी जेनेरियो 2016
#51 r1/2 Gymnastics Individual All-Around
#75 r1/2 Gymnastics Floor Exercise
#4 Gymnastics Horse Vault
#77 r1/2 Gymnastics Uneven Bars
#65 r1/2 Gymnastics Balance Beam

गुड्डू

दीपा कर्माकर

भारत
जिमनास्टिक्स आर्टिस्टिक
मैं अगली पीढ़ी को प्रेरित करना चाहती हूं ताकि 10 से 15 वर्षों में, भारत सिर्फ़ एथलीट को नहीं बल्कि एक पूर्ण जिमनास्टिक टीम को एक ओलंपिक में भेज सके।
लम्बाई
151 सीएम / 4'11''
वज़न
47 किग्रो / 103 पाउंड्स
जन्म तिथि
9 अगस्त 1993 Agartala, India
लिंग
महिला

मेडल संख्या

0 ओलंपिक मेडल

ओलंपिक गेम्स

1 ओलंपिक गेम्स

दीपा कर्माकर जीवनी

नंगे पैरों में खड़े होने वाली दीपा कर्माकर की लंबाई केवल 4 फीट 11 इंच हो सकती है लेकिन त्रिपुरा की ये लड़की भारतीय जिमनास्टिक में एक बहुत बड़ा कद है।

रियो 2016 में दीपा कर्माकर ओलंपिक खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली महिला जिमनास्ट बनीं थीं, और उन्होंने अपने बेहतरीन प्रदर्शनों से कई लोगों को प्रेरित किया।

एक सपाट पैर के साथ जन्मीं विकृति किसी भी जिमनास्ट के लिए एक बड़ी बाधा माना जाता है, लेकिन भारत की इस लिटिल वंडर ने बाधाओं और आलोचनाओं को पीछे छोड़ते हुए एक अलग मुक़ाम बना डाला।

कर्माकर  6 साल की उम्र से ही जिमनास्टिक में प्रशिक्षण शुरू कर दिया था। इसके बाद 14 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने जूनियर नेशनल जीतते हुए अपनी नज़र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गड़ा ली थी।

2010 में दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में जिमनास्टिक दल का हिस्सा रही एक किशोरी कर्माकर ने आशीष कुमार के प्रदर्शनों को करीब से देखा था, जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के पहले जिमनास्टिक पदक पर कब्जा जमाया था।

यहां से कर्माकर ने अपनी पहचान बनाना शुरू कर दी थी और धीरे धीरे वॉल्ट एक्सपर्ट के साथ साथ जिमनास्टिक के सबसे ख़तरनाक मूव में से एक माने जाने वाले प्रोदुनोवा पर भी दीपा ने महारत हासिल कर ली थी।

प्रोदुनोवा को ‘वॉल्ट ऑफ़ डेथ’ के नाम से भी जाना जाता है, जिमनास्टिक में इसे सबसे कठिन चालों में से एक माना जाता है, इसमें एक हैंड्स्प्रिंग और फिर दो समरसॉल्टस होते हैं।

जोखिम है तो फिर इनाम भी है क्योंकि इस वॉल्ट को सफ़ाई से हासिल करने के लिए ऊंचाई से नीचे कूदना होता है।

दीपा कर्माकर केवल पांच महिलाओं में से एक हैं जिन्होंने इसे सफलतापूर्वक निष्पादित किया है, इसी वॉल्ट के ज़रिए दीपा ने ग्लासगो में 2014 के राष्ट्रमंडल खेलों में पोडियम फ़िनिश करते हुए कांस्य पदक जीता था।

2016 के ओलंपिक जिमनास्टिक टेस्ट इवेंट में दीपा कर्माकर ने एक बार फिर इसी वॉल्ट का कमाल दिखाते हुए ओलंपिक के लिए क्वालिफ़ाई कर लिया था और इस तरह वह ओलंपिक के लिए क्वालिफ़ाई करने वाली भारत की पहली महिला जिमनास्ट बन गईं थीं। जिसने ओलंपिक इतिहास में भारतीय भागीदारी के 52 साल के लंबे इंतजार को ख़त्म किया।

मेन इवेंट में दीपा कर्माकर ने दो प्रयासों के बाद 14.850 अंकों के साथ क्वालिफाइंग राउंड में आठवें स्थान पर रहने के बाद वॉल्ट फाइनल में जगह बनाई।

फाइनल में अमेरिकी सुपरस्टार साइमन बाइल्स जैसी दिग्गज के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए, कर्मकार ने इसी वॉल्ट को एक बार फिर करने का फ़ैसला किया।

अपनी दूसरी और अंतिम वॉल्ट में इस भारतीय ने प्रोदुनोवा को एक बार फिर से निष्पादित करने का फैसला किया, जहां उन्होंने इसे किया भी।

लेकिन उनके इस बहादुर प्रयास के लिए, कर्माकर को 15.066 के स्कोर से सम्मानित किया गया, वह केवल 0.15 अंकों के साथ पदक से चूक गईं और चौथे स्थान पर रहीं।

उनके ओलंपिक कारनामों के बाद उनकी घर वापसी पर उन्हें प्रतिष्ठित राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार और भारत के चौथे सबसे बड़े नागरिक पुरस्कार पद्म श्री से सम्मानित किया गया।

2017 के बाद से दीपा कर्माकर घुटने की चोटों से जूझ रही हैं, लेकिन अगर वह फिट हो जाती हैं तो फिर अगरतला की रहने वाली ये जिमनास्ट एक बड़ी ताकॉत हैं।

तुर्की के मेर्सिन में एफआईजी आर्टिस्टिक जिमनास्टिक वर्ल्ड चैलेंज कप 2018 की वॉल्ट स्पर्धा में कर्मकार ने स्वर्ण पदक हासिल किया था जबकि जर्मनी में आर्टिस्टिक जिमनास्टिक वर्ल्ड कप 2018 में उन्हें कांस्य पदक मिला था।

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