गगन नारंग

भारत
शूटिंग
लम्बाई
173 सीएम / 5'8''
वज़न
98 किग्रो / 215 पाउंड्स
जन्म तिथि
6 मई 1983 Madras, India
लिंग
पुरुष

मेडल संख्या

0 ओलंपिक मेडल

ओलंपिक गेम्स

0 ओलंपिक गेम्स

गगन नारंग जीवनी

दो साल के नन्हे गगन नारंग चेन्नई के मरीना बीच पर गुब्बारों पर टॉय गन से निशाना लगाया करते थे। 27 साल बाद वो लंदन में रॉयल आर्टिलरी बैरक में भारत के लिए ओलंपिक गेम शूटिंग जारी रखते हुए दिखाई दिए।

10 मीटर एयर राइफल इवेंट में गगन ने भारत के लिए ब्रॉन्ज़ मेडल हासिल किया। 4 बार ओलंपिक गेम्स में हिस्सा लेने वाले और साथ ही कई वर्ल्ड कप खिताबों को अपने नाम करने वाले इस खिलाड़ी ने भारत को बहुत से मौक़ों पर गौरवान्वित किया है।

कभी अपने खेल की वजह से तो कभी अपने द्वारा स्थापित की हुई शूटिंग अकादमी ‘गन्स एंड ग्लोरी’ में युवाओं को गुण सिखाकर गगन ने हमेशा ही भारत की मिटटी को सहयोग दिया है। गौरतलब है कि इलावेनिल वालारिवन जैसी दिग्गज शूटर भी गगन की अकादमी में ही अपना कौशल सीखती हैं।

उनके पिता ने ही उन्हें पहली एयर पिस्टल तोहफे में दी थी और तभी से इस दिग्गज ने डोमेस्टिक सर्किट में ही अपने नाम में चार चांद लगाए हैं। गगन के प्रदर्शन की बदौलत उन्हें 2004 एथेंस गेम्स के दौरान भारतीय टीम में शामिल किया गया। हालांकि 10 मीटर एयर राइफल वर्ग में खेलते हुए गगन का ओलंपिक सपना उनके हिसाब से नहीं गया और उन्हें समझ आ गया था कि इस स्तर पर टिकना है तो और भी ज़्यादा मेहनत करनी होगी।

इनके कौशल ने इंटरनेशनल सर्किट में 2006 में कमाल दिखाया जब उन्होंने आईएसएसएफ वर्ल्ड कप पहली बार अपने नाम किया। उसी साल इन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में 4 गोल्ड मेडल जीत अपने होने का प्रमाण पेश किया। इतना ही नहीं 2006 एशियन गेम्स में भी गगन ने एक व्यक्तिगत ब्रॉन्ज़ और दो टीम ब्रॉन्ज़ मेडल जीते। बीजिंग 2008 के दौरान भारतीय शूटर गगन नारंग से मेडल जीतने की उम्मीद की जा रही थी लेकिन वे साल उनका नहीं था और अभिनव बिंद्रा ने अपने खेल से भारत को ओलंपिक गेम्स में पहला व्यक्तिगत गोल्ड मेडल जितवाया।

अब बारी थी 2012 लंदन गेम्स में जहां सबकी निगाहें बिंद्रा पर थीं लेकिन गगन अपना निशाना अपने दिमाग में फिट करके लाए थे। बेहतरीन खेल दिखाते हुए गगन ने 8-मेंस फाइनल में अपना स्थान पक्का कर लिया और 10 मीटर एयर राइफल के तीसरे क्वालिफिकेशन राउंड को पार कर लिया।

प्रतियोगिता का स्तर बढ़ता जा रहा था और गगन नारंग अपनी रणनीतियों पर भरोसा करते हुए आगे बढ़ रहे थे। कुछ ही समय में उन्होंने चीन के वैंग ताओ को पीछे कर अपने लिए ब्रॉन्ज़ मेडल तो आश्वस्त कर ही लिया था। इसके बाद गगन को इटली के निकोलो कैम्प्रियानी ने कड़ी टक्कर दी और 701.5 अंक हासिल कर लिए। वही गगन के खाते में 701.1 अंक आए। वहीं एलिन जॉर्ज मोल्दोवीनु ने शानदार प्रदर्शन दिखाते हुए 702.1 के अंक से गोल्ड मेडल पर अपने नाम की मुहर लगा दी।

ओलंपिक चैनल से बात करते हुए गगन ने बताया “उस समय बहुत ज़्यादा दबाव था और उम्मीदें भी थी। मैं ऐसा नहीं कहूँगा कि दबाव की वजह से मैंने बेहतर प्रदर्शन किया|” इसके बाद भी इस शूटर का कारवां रुका नहीं और 2014 ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज़ मेडल जीता।

रियो 2016 के बाद इस दिग्गज ने शूटिंग से संन्यास ले लिया और खेल को अलग-अलग तरीकों से अपना प्यार बांटते रहे।

गन्स एंड ग्लोरी नामक अकादमी भारतीय शूटिंग भविष्य के लिए बहुत काम कर रही है। गगन नारंग द्वारा स्थापित इस अकादमी में युवा बच्चों को शूटिंग से जुड़ी सभी सुविधाएं व् सामग्री प्रदान की जाती है।

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