गेम्स मेडल

खेल परिणाम खेल इवेंट
एथेंस 2004
खेल परिणाम खेल इवेंट
एथेंस 2004
#AC Weightlifting Middleweight (≤63 kilograms)
सिडनी 2000
खेल परिणाम खेल इवेंट
सिडनी 2000
#3
Weightlifting Light-Heavyweight (≤69 kilograms)

कर्णम मल्लेश्वरी

भारत
वेटलिफ्टिंग
लम्बाई
163 सीएम / 5'4''
वज़न
60 किग्रो / 132 पाउंड्स
जन्म तिथि
1 जून 1975 Voosavanipeta, India
लिंग
महिला

मेडल संख्या

1 ओलंपिक मेडल

ओलंपिक गेम्स

2 ओलंपिक गेम्स

कर्णम मल्लेश्वरी जीवनी

भारतीय भारोत्तोलक कर्णम मल्लेश्वरी ओलंपिक में पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला एथलीट हैं। ये प्रतिष्ठित सम्मान उन्होंने साल 2000 में हासिल किया था।

सिडनी 2000 ओलंपिक में कर्णम ने ये कारनामा कर ये मुकाम हासिल किया। कुल 240 किलोग्राम में उन्होंने स्नैच श्रेणी में 110 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 130 किलोग्राम भार उठाते हुए, कर्णम मल्लेश्वरी ओलंपिक कांस्य पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।

ऐतिहासिक उपलब्धियों की वजह से उन्हें एक नाम दिया और जनता ने उनका नाम ’द आयरन लेडी’ रख दिया। वो अब तक ओलंपिक पदक जीतने वाली एकमात्र भारतीय महिला वेटलिफ्टर बनी हुई हैं।

वो कहती हैं, "ये पदक सिर्फ मुझे नहीं पूरे देश को गौरवान्वित करता है।" “प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने मुझे उस दिन बाद में बुलाया। उन्होंने मुझे बधाई दी और मुझे ‘भारत की बेटी’ कहा।

आंध्र प्रदेश के वोसवानिपेटा हैमलेट में जन्मी कर्णम मल्लेश्वरी ने 12 साल की उम्र में खेल की दिशा में अपनी ट्रेनिंग शुरू कर दी थी।

कुछ समय बाद ही वो सफलता की सीढ़ियां चढ़ने लगीं। कर्णम मल्लेश्वरी ने 1993 में विश्व चैंपियनशिप में तीसरा स्थान हासिल किया और उसके बाद 1994 और 1995 में लगातार 54 किग्रा विश्व खिताब के साथ, 1996 में एक और तीसरे स्थान के प्रयास के साथ अपने सफल दौर को जारी रखा।

1994 और 1998 में कर्णम मल्लेश्वरी एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक से चूक गईं, इस दोनों मौकों पर उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

सिडनी ओलंपिक के शुरू होने से पहले ही उन्होंने अपना लय पकड़ लिया। जहां उन्होंने कांस्य पदक जीतकर अपने देश को गौरवान्वित किया। लेकिन कर्णम मल्लेश्वरी ने मिली-जुली भावनाएँ प्रकट कीं। उन्होंने महसूस किया कि वो भारतीय शिविर के भीतर एक मिसकैलकुलेशन के कारण स्वर्ण से चूक गई थीं, जिसमें उन्हें सुझाव दिया गया था कि उन्हें पोडियम पर शीर्ष स्थान के लिए जरूरत से ज्यादा वजन उठाना है।

मल्लेश्वरी 2002 के राष्ट्रमंडल खेलों में वापसी करने की योजना बना रही थी। हालाँकि, उसके पिता के दुर्भाग्यपूर्ण निधन ने उनके योजनाओं पर पानी फेर दिया।

2004 में ग्रीस में हुए ओलंपिक में उन्होंने वापसी की, लेकिन बिना किसी पदक के साथ उन्होंने अपने करियर पर विराम लगा दिया।

इस दौरान उन्हें भारत सरकार द्वारा कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिसमें अर्जुन पुरस्कार (1994), राजीव गांधी खेल रत्न (1999) और पद्म श्री (1999) शामिल हैं।

कर्णम मल्लेश्वरी ने 1997 में साथी भारतीय भारोत्तोलक राजेश त्यागी से शादी की और इस जोड़े ने 2001 में एक बेटे को जन्म दिया अभी वो हरियाणा में रहती हैं, फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के लिए मैनेजर की भूमिका निभा रही हैं।

इसके अलावा कर्णम मल्लेश्वरी ने भारत में अपने प्रिय खेल को फलते-फूलते देखने के प्रयास में पहली बार अपनी तरह की भारोत्तोलन और पावरलिफ्टिंग अकादमी कर्णम मल्लेश्वरी फ़ाउंडेशन की स्थापना की।

एथलीट