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रियो डी जेनेरियो 2016
खेल परिणाम खेल इवेंट
रियो डी जेनेरियो 2016
#=17 Tennis Doubles
लंदन 2012
खेल परिणाम खेल इवेंट
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बीजिंग 2008
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एथेंस 2004
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एथेंस 2004
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सिडनी 2000
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अटलांटा 1996
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#3
Tennis Singles
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बार्सिलोना 1992
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#=5 Tennis Doubles

लिएंडर पेस

भारत
टेनिस
It's a mystical and magical experience when you play for 1.4 billion people. When you go out to play the Davis Cup or the Olympics, it’s a different feeling altogether.
लम्बाई
178 सीएम / 5'10''
वज़न
77 किग्रो / 169 पाउंड्स
जन्म तिथि
17 जून 1973 Kolkata, India
लिंग
पुरुष

मेडल संख्या

1 ओलंपिक मेडल

ओलंपिक गेम्स

7 ओलंपिक गेम्स

लिएंडर पेस जीवनी

बात जब भारतीय टेनिस की हो तो लिएंडर पेस (Leander Paes) का नाम अदब से लिया जाता है। युगल और मिश्रित युगल वर्ग में खेलते हुए पेस ने अपने जौहर का बखूबी प्रमाण पेश किया है।

महेश भूपति के साथ लिएंडर पेस ने बहुत सी उपलब्धियों को हासिल किया है। इन दोनों की जोड़ी कोर्ट पर सबसे खतरनाक जोड़ियों में से एक मानी जाती थी। भूपति के अलावा पेस ने दिविज शरण, रोहन बोपन्ना और पूर्वा राजा के साथ मिलकर भारतीय टेनिस की गाथा में कई सुनहरे पन्ने जोड़ें है

लिएंडर पेस का जन्म 17 जून 1973 को कोलकाता में हुआ था। उनके पिता वीस पेस के नाम 1972 म्यूनिख ओलंपिक में ब्रॉन्ज़ मेडल है और उनकी माँ जेनिफ़र पेस ने 1980 एशियन बास्केटबॉल टीम की अगुवाई कर अपना लोहा मनवाया था।

इस भारतीय खिलाड़ी ने डेव ओ’मिएरा के सरंक्षण में जूनियर सर्किट के साथ 1990 जूनियर विंबलडन भी अपने नाम किया।

अब बारी थी अटलांटा ओलंपिक गेम्स की और लिएंडर पेस मानों इसका बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हों। 1996 अटलांटा में पेस ने ब्राज़ील के फर्नांडो मेलिगेनी को मात दे ब्रॉन्ज़ मेडल पर अपने नाम की मुहर लगाई और केडी जाधव के बाद पहले भारतीय टेनिस खिलाड़ी बनें जिन्होंने व्यक्तिगत मेडल जीता हइनकी सफलताओं को मद्देनज़र रखते हुए सरकार ने उन्हें राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड से सम्मानित किया। इसके बाद पेस ने महेश भूपति के साथ भारतीय टेनिस के इतिहास में कुछ यादगार पल जोड़ दिए। देखते ही देखते इस जोड़ी ने ऑस्ट्रेलियाई ओपन, फ्रेंच ओपन और यूएस ओपन 1988 के सेमीफाइनल तक का सफ़र तय किया और साल 1999 में इस जोड़ी ने चारों ग्रैंड स्लैम के फाइनल में प्रवेश किया और विंबलडन और फ्रेंच ओपन के खिताब को अपने जीत के पिटारे में डाल लिया। यह जोड़ी ग्रैंड स्लैम जीतने वाली पहली भारतीय डबल्स जोड़ी बनीं और साथ ही लिएंडर पेस युगल रैंकिंग में नंबर 1 बन गए।

पेस की रफ़्तार को मानों पंख लग गए थे और एकल वर्ग में उन्होंने न्यूपोर्ट में अपना पहला खिताब जीता। उसके बाद उन्होंने न्यूहेवन में पीट संप्रास जैसे दिग्गज को 6-3, 6-4 से मात दी। इस खिलाड़ी की गाड़ी यहां नहीं रुकी और उन्होंने 1997 से 2011 के बीच टाटा ओपन महाराष्ट्र खिताब 5 बार हासिल किया।एक बार फिर इस जोड़ी ने 2001 में फ्रेंच ओपन पर जीत की मुहर लगाकर अपने ख़िताबी करियर में चार चाँद लगा दिए। पेस की खुशियां यही नहीं रुकी और सरकार ने उन्हें पद्मा श्री अवार्ड से नवाजा। पेस-भूपति की जोड़ी ने आगे चल कर एशियन गेम्स 2002 में गोल्ड मेडल जीत अपने करियर में एक और सुनहरे नज़्म को लिख दिया। साथ ही साथ किसी भी डेविस कप मुक़ाबले में लिएंडर पेस सबसे कठिन प्रतिद्वंदियों में से एक हैं। उनके नाम डेविस कप युगल मुक़ाबलों में सबसे ज़्यादा (45) जीत का रिकॉर्ड है।

अपने कौशल से सभी को हैरान कर देने वाले पेस ने कोर्ट पर कुछ और यादगार पलों को जिया। खेल वही था लेकिन पेस के सितारों को अभी और चमकना बाकी था। 2000 दशक शुरू होने पर इस खिलाड़ी ने मिश्रित डबल्स में मार्टिना नवरातिलोवा के साथ मिलकर ऑस्ट्रेलियाई ओपन और विंबलडन के कोर्ट पर कब्ज़ा जमाया। इसके बाद सानिया मिर्ज़ा के साथ पेस ने 2006 एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतते हुए अपने सफ़र को और मज़बूती प्रदान की। दशक के ख़त्म होने तक पेस और भूपति का साथ खेलना कम हो चुका था। ऐसे में पेस की रफ़्तार रुकी नहीं और उन्होंने आदतन साल 2009 में लुकास ड्लाउची के साथ फ्रेंच ओपन और यूएस ओपन पर अपना हक़ जमाया और साथ ही कारा ब्लैक के साथ 2010 ऑस्ट्रेलियाई ओपन मिक्स्ड डबल्स के खिताब पर अपने नाम की मुहर लगाई।

जीत और पेस के बीच अब मानों महज़ एक दो प्रतियोगिताओं का इंतज़ार होता था। रादेक स्तेपानेक के साथ जोड़ी बनाकर इस भारतीय दिग्गज ने 2012 और 2013 में यूएस ओपन जैसा बड़ा टाइटल जीता। लिएंडर पेस को लगातार मिलती सफलता ने उन्हें पद्मा भूषण के सम्मान से नवाज़ाअब तक लगभग हर प्रतियोगिता की ट्रॉफी पर पेस का नाम राज करने लगा। साल 2016 में पेस ने दिग्गज मार्टिना हिंगिस के साथ मिलकर फ्रेंच ओपन का खिताब एक और बार अपने नाम किया। इस बार मिली जीत के साथ उन्होंने ओवन डेविडसन के रिकॉर्ड को तोड़ दिया।

साल दर साल लिएंडर पेस ने जीत को आदत बना लिया था। हॉल ऑफ़ चैंपियनशिप के सेमीफाइनल तक का सफ़र पेस ने खूब मेहनत कर तय किया था। साल 2020 की शुरुआत में दिग्गज खिलाड़ी ने टोक्यो गेम्स के सीज़न को अपना आखिरी सीज़न बताया। यकीनी तौर पर इस लंबे और अद्भुत करियर की वजह से भारतीय ही नहीं बल्कि विश्व के सभी प्रशंसकों के दिल में जगह बना ली है।

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