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मनप्रीत सिंह

भारत
हॉकी
लम्बाई
172 सीएम / 5'8''
वज़न
69 किग्रो / 151 पाउंड्स
जन्म तिथि
26 जून 1992 Mithapur, India
लिंग
पुरुष

मेडल संख्या

0 ओलंपिक मेडल

ओलंपिक गेम्स

2 ओलंपिक गेम्स

मनप्रीत सिंह जीवनी

युवा और नेतृत्व का एक सही मिश्रण, ये है भारतीय हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह की पहचान।  अपने जुनून और दृढ़ संकल्प के साथ ये खिलाड़ी युवा खिलाड़ियों के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बन गया है।

भारतीय हॉकी टीम के कप्तान मैदान के बाहर भले ही ज्यादा आक्रामक ना हो लेकिन जैसे ही वह मैदान पर पहुंचते हैं तो वह कठिन से कठिन स्थिति में अपने खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ा लेते हैं।

जालंधर के पास मीठापुर गांव में जन्मे  मनप्रीत सिंह जल्दी ही इस खेल से जुड़ गए थे, वैसे भी इस शहर ने देश को कई बड़े खिलाड़ी दिए हैं।

मनप्रीत के दोनों ही भाई स्कूल हॉकी टीम के स्टार खिलाड़ी थे। पूर्व कप्तान और पद्मश्री अवार्डी परगट सिंह मितापुर में डिप्टी पुलिस सुपरिटेंडेंट के रूप में सेवारत थे, हॉकी खेलना एक युवा मनप्रीत सिंह के लिए एक स्वाभाविक कदम था।

मनप्रीत सिंह की मां उन्हें शुरुआत में हॉकी में नहीं जाने की सलाह देती थी क्योंकि उन्हें लगता था कि हॉकी एक खतरनाक खेल है। लेकिन मनप्रीत भी जिद्दी थे और शुरुआत से ही वह सभी को अपने खेल से प्रभावित करने लग गए। दो साल बाद उनकी मेहनत ने परिवार का विश्वास जीत लिया। इसके बाद उनके परिवार ने उनका दाखिला जालंधर के करीब सुरजीत हॉकी ऐकेडमी में करवा दिया।

इसके बाद उनका सफर आगे बढ़ता ही रहा। मनप्रीत ने साल 2011 में जूनियर और सीनियर भारतीय टीम में अपना डेब्यू किया, इसके साथ ही वह 2012 लंदन ओलंपिक में भी भारतीय टीम के सदस्य थे।

भारतीय टीम का ओलंपिक सफर ज्यादा अच्छा नहीं राह लेकिन मनप्रीत को एक अच्छा अनुभव प्राप्त हुआ, इसी वजह से वह दोबारा जूनियर लेवल पर खेले और उन्होंने साल 2013 जूनियर हॉकी वर्ल्ड-कप में भारतीय टीम की कप्तानी भी की।

इसी साल उन्होंने सुल्तान जोहोर कप में भी जूनियर टीम की कमान संभाली, इसके बाद साल 2014 में उन्हें दोबारा सीनियर टीम का बुलावा मिला। ये वो साल था कि जब भारतीय हॉकी टीम ने एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर पदक जीता था।

इसके बाद से मनप्रीत टीम के नियमित सदस्य बन गए, भारतीय हॉकी के दिग्गज सरदार सिंह और जर्मनी के पूर्व कप्तान मोरिट्ज़ फुरस्टी से सीखते हुए उन्होंने अपने आप को इंटरनेशनल लेवल पर अच्छी तरह ढाल लिया।

साल 2016 रियो ओलंपिक में उन्होंने दूसरी बार देश का प्रतिनिधित्व किया, इस बार टीम ने आयरलैंड और अर्जेंटीना को हराया था लेकिन क्वार्टर फाइनल में उन्हें बेल्जियम से हार का सामना करना पड़ा।

इसी साल के अंत में जब मनप्रीत सुल्तान अज़लान शाह कप में खेल रहे थे तो उन्हें अपने पिता के निधन की खबर मिली। इसके बाद यह युवा खिलाड़ी घर पहुंचा। शुरुआती दिनों में जो मां उन्हें हॉकी खेलने के मना कर रही थी, उन्हीं ने इस बार उन्हें प्रोत्साहित किया क्योंकि उनके पिता हमेशा से यही चाहते थे।

इस घटना से उन्हें अपने एक आइडियल फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो के साथ रिलेशन बनाने में मदद मिली, जिन्होंने अपने पिता को भी जीवन में जल्दी खो दिया था। पुर्तगाली स्टार की तरह कप्तान मनप्रीत भी मैदान पर काफी मजबूत नजर आते हैं।

ओलंपिक चैनल से बातचीत करते हुए मनप्रीत ने बताया कि “मैं उस तरह का व्यक्ति हूं जो युवाओं को प्रेरित करना पसंद करता है। जब वे खराब फॉर्म से गुजर रहे हैं या किसी कारण से वह अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते थे तो मैं उनका सहयोग कर पाऊं। हॉकी एक टीम गेम है और टीम में समान रूप से सभी का योगदान अहम होता है।”

मनप्रीत के लिए करियर का सबसे बड़ा पल साल 2017 में आया, जब उन्हें भारतीय हॉकी टीम का कप्तान नियुक्त किया गया। एशिया कप में पीआर श्रीजेश की अनुपस्थिति में उन्हें टीम की कमान मिली।

ये वो इवेंट था, जिसे भारतीय टीम ने 10 साल से नहीं जीता था। मनप्रीत सिंह की कप्तानी का आगाज शानदार तरीके से हुआ और भारतीय टीम ने खिताब जीतने में कामयाबी हासिल की।

उसके बाद उन्हें टीम के स्थायी कप्तानी सौंप दी गई। उनकी कप्तानी में टीम ने एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में गोल्ड, चैंपियंस ट्रॉफी में सिल्वर और 2018 एशियन गेम्स में टीम ने कांस्य पदक जीता

मनप्रीत सिंह को भारतीय सरकार ने अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है।

इस कप्तान ने टोक्यो 2020 में ओलंपिक खेलों के लिए भारतीय हॉकी टीम के स्थान को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई थी। उनके इस प्रयासों के लिए  उन्हें साल 2019 में मेंस FIH प्लेयर ऑफ द ईयर अवॉर्ड दिया गया। ये सम्मान जीतने वाले वह पहले भारतीय खिलाड़ी बनें।

साल 2021 टोक्यो उनका एक खिलाड़ी के तौर पर तीसरा और कप्तान के तौर पर ओलंपिक होगा और वह लंबे समय तक ओलंपिक मेडल जीतने के सूखे को खत्म करना चाहेंगे।

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