गेम्स मेडल

खेल परिणाम खेल इवेंट
बीजिंग 2008
खेल परिणाम खेल इवेंट
बीजिंग 2008
#15 Shooting Double Trap
एथेंस 2004
खेल परिणाम खेल इवेंट
एथेंस 2004
#2
Shooting Double Trap

चिल्ली

राज्यवर्धन सिंह राठौड़

भारत
शूटिंग
लम्बाई
188 सीएम / 6'2''
वज़न
85 किग्रो / 187 पाउंड्स
जन्म तिथि
29 जनवरी 1970 Jaisalmer, India
लिंग
पुरुष

मेडल संख्या

1 ओलंपिक मेडल

ओलंपिक गेम्स

2 ओलंपिक गेम्स

राज्यवर्धन सिंह राठौड़ जीवनी

सेना के जवान, सांसद और खेल मंत्री- राज्यवर्धन सिंह राठौड़ आज़ादी के बाद ओलंपिक में व्यक्तिगत रजत पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने, जब उन्होंने एथेंस 2004 में पुरुषों की डबल ट्रैप शूटिंग में पोडियम तक का सफर तय किया था।A

राजस्थान के जैसलमेर में एक शिक्षक और सैनिक पिता के यहां जन्में राठौड़ देश सेवा के मूल्यों के साथ बड़े हुए।

राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि, “मैं हर जगह हमेशा किसी न किसी वजह से रहा हूं। सेना में जाना, देश सेवा की भावना और मेरे जुनून का परिणाम था, और खेल में मेरे देश के गौरव की बात थी, जबकि राजनीति में, लोगों के अधिकारों के लिए लड़ रहा हूं।"

राज्यवर्धन सिंह राठौड़ कई खेलों में दिलचस्पी लेते हैं और क्रिकेट को विशेष रूप से खेलते थे, यहां तक ​​कि वो मध्य प्रदेश रणजी ट्रॉफी टीम में जगह भी बना चुके थे। हालांकि अपनी मां से बात करने और प्रतिष्ठित नेशलन डिफेंस ऐकेडमी (NDA) में चयन होने के बाद उन्हें क्रिकेट को छोड़ना पड़ा था।

राठौड़ जल्द ही इंडियन मिलिट्री ऐकेडमी में शामिल हो गए और भारत के करगिल युद्ध अभियान के दौरान जम्मू और कश्मीर में तैनात थे।

एनडीए और भारतीय सेना के साथ अपने समय के दौरान भी, राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने खेल में शानदार प्रदर्शन किया, जहां उन्होंने एनडीए के सर्वोच्च खेल पुरस्कार 'ब्लेज़र' को जीता, इसके बाद वो सिख रेजीमेंट गोल्ड मेडल से सम्मानित किए गए, जो इंडियन आर्मी ऐकेडमी में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी को मिलता है।

उन्होंने 1998 में खेल में करियर बनाने के लिए शूटिंग शुरू की जब सेना ने एक टीम बनाने का फैसला किया और 28 साल राज्यवर्धन सिंह को उस टीम में जगह मिली, उन्होंने अपने खेल से जल्द ही सबको प्रभावित किया।

‘मेजर’ राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने 2002 में मैनचेस्टर में राष्ट्रमंडल खेलों में अपने आगमन की घोषणा की गोल्ड जीतकर की, जहां उन्होंने 192 के नए खेल रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण जीता, ये वो रिकॉर्ड जो आज तक बरकरार है। उन्होंने डबल ट्रैप पेयर्स में एक और स्वर्ण अपने नाम किया।

इस भारतीय निशानेबाज़ का शानदार फॉर्म जारी रहा, जहां उन्होंने 2003 विश्व चैंपियनशिप में कांस्य जीतकर भारत के 40 साल के लंबे इंतजार को खत्म किया।

एथेंस 2004 ओलंपिक से पहले इस जवान ने पूर्व विश्व चैंपियन लुका मारिनी और ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता रसेल मार्क से ट्रेनिंग लेते हुए कुद को तैयार किया, यहां तक ​​कि अपने बंदूक निर्माता माउरो पेराज़ी के साथ मिलकर काम करने के लिए वो इटली चले गए।

एथेंस में उनको पहले क्वालिफिकेशन राउंड से गुजरना था, पाँचवें रैंकिंग वाले इस खिलाड़ी ने फाइनल में जगह बनाई थी। फाइनल में छह सदस्यीय प्रतियोगिता में यूएई के शेख अहमद अलमाकौम शानदार फॉर्म में थे और उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को पोडियम पर अपना सर्वश्रेष्ठ स्थान पाने के लिए चीनी जोड़ी वांग झेंग और हू बियानु आन और स्वीडिश शूटर हाकन डाहलबी से कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

एक रोमांचक मुकाबले के अंत में भारतीय निशानेबाज़ ने अंतिम कांस्य पदक विजेता वांग झेंग को एक अंक से पीछे छोड़ा था।

राठौड़ का रजत भी भारत का पहला ओलंपिक शूटिंग पदक था, जिसने देश में खेल को एक नए युग में प्रवेश कराने में मदद की।

इतनी सफलता हासिल करने के बाद भी राठौड़ एक सक्रिय निशानेबाज़ बने रहे, जिन्होंने 2006 के राष्ट्रमंडल खेलों में अपने व्यक्तिगत डबल ट्रैप स्वर्ण को डिफेंड किया और साथ ही साथ दो रजत पदक भी जीता।

उन्होंने उसी वर्ष काहिरा  में अपना पहला विश्व कप स्वर्ण भी जीता और फिर ग्रेनेडा में कांस्य पदक जीता। दो साल पहले हुए सिडनी विश्वकप में उन्होंने रजत पदक जीता था।

पद्म श्री विजेता ने 2003 से 2006 तक एशियाई क्ले टारगेट चैंपियनशिप में लगातार चार स्वर्ण पदक जीतने का रिकॉर्ड बनाया। 2011 में एशियाई क्ले टारगेट चैंपियनशिप में उन्होंने अपने आखिरी स्वर्ण पदक को हासिल करने के लिए 194 का स्कोर बनाया जो कि विश्व रिकॉर्ड बना।

बीजिंग में खेले गए 2008 ओलंपिक में राठौड़ ने भारतीय शूटिंग टीम में जगह बनाई। हालांकि वो अपना दूसरा ओलंपिक पदक नहीं जीत सके, लेकिन अभिनव बिंद्रा ने भारत को पहला व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता बन दिया।

बिंद्रा ने इसका श्रेय राठौड़ को दिया। अभिनव बिंद्रा ने कहा कि, “राठौड़ ने मुझे बदल दिया। उनके ओलंपिक रजत ने मेरे अंदर स्वर्ण पदक जीतने की उम्मीद जताई।”

2013 में कर्नल ’राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने सेना से स्वैच्छिक रिटायरमेंट ले ली और राजनीति पर ध्यान केंद्रित किया। जिसके बाद वो 2014 में सांसद बन गए।

यूथ अफेयर्स एंड स्पोर्ट्स मिनिस्टर के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने खेलो इंडिया यूथ गेम्स की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ अब भारत के नए, युवा प्रतिभाओं को खोजने में मदद कर रहे हैं।

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