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रोहन बोपन्ना

भारत
टेनिस
Getting a medal for India is a very big thing for not just us as players but for the entire nation.
लम्बाई
190 सीएम / 6'3''
वज़न
87 किग्रो / 191 पाउंड्स
जन्म तिथि
4 मार्च 1980 Bangalore, India
लिंग
पुरुष

मेडल संख्या

0 ओलंपिक मेडल

ओलंपिक गेम्स

2 ओलंपिक गेम्स

रोहन बोपन्ना जीवनी

भारतीय टेनिस सर्किट के शानदार सितारों में से एक रोहन बोपन्ना को दिग्गज लिएंडर पेस और महेश भूपति की विरासत को आगे ले जाने का श्रेय जाता है।

2002 से भारत की डेविस कप टीम के एक सदस्य रहे रोहन बोपन्ना ने ग्रैंड स्लैम खिताब जीता और अपने करियर में चार एटीपी मास्टर्स 1000 खिताब भी हासिल किए हैं। 40 साल के हो चुके इस दाएं हाथ के टेनिस खिलाड़ी ने 2012 और 2016 के ओलंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया है।

रोहन बोपन्ना ने अपने जीवन के शुरु में ही मुख्य रूप से टेनिस खेलना शुरू कर दिया था क्योंकि उनके पिता चाहते थे कि वह एक व्यक्तिगत खेल पर ध्यान केंद्रित करें और 19 साल की उम्र में उन्होंने टेनिस में अपना करियर बनाने का फैसला कर लिया।

हालांकि, रोहन बोपन्ना का एकल करियर वास्तव में कभी अच्छा नहीं रहा, लेकिन युगल वर्ग में उनके सितारे चमकते रहे। 2007 होपमैन कप में सानिया मिर्ज़ा के साथ एक मिश्रित युगल मुक़ाबले में बेंगलुरू के इस उभरते हुए खिलाड़ी ने पहली बार अपना जलवा दिखाया। जहां युगल टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चेक गणराज्य, क्रोएशिया और चीन को अपने समूह में पीछे छोड़ा और स्पेन के बाद दूसरे स्थान पर रहते हुए उप विजेता बने।

रोहन बोपन्ना के लिए युगल स्पर्धाओं में अपना ध्यान केंद्रित करने के लिए ये सफलता पर्याप्त थी और उन्होंने जल्द ही लॉस एंजिल्स में कंट्रीवाइड क्लासिक में अपने साथी एरिक बुटोरैक के साथ पुरुष युगल का खिताब जीता। हालांकि, यह सिर्फ उनके प्रभावशाली युगल करियर की शुरुआत थी।

रोहन बोपन्ना ने पहली बार 2007 में पाकिस्तान के ऐसाम-उल-हक कुरैशी के साथ जोड़ी बनाई थी, लेकिन 2010 से उन्होंने शानदार प्रदर्शन करना शुरू किया, इस दौरान उन्होंने दक्षिण अफ्रीका टेनिस ओपन में पुरुषों का युगल खिताब जीता। ये साझेदारी दोनों के लिए करियर-डिफाइनिंग रही।

इस जोड़ी को भारत-पाक एक्सप्रेस के नाम से जाना जाने लगा, रोहन बोपन्ना और ऐसाम-उल-हक कुरैशी ने विंबलडन के क्वार्टर फाइनल और यूएस ओपन के पुरुष युगल फाइनल में पहुंचने के अलावा, एक-दूसरे के साथ चार चैलेंजर खिताब जीते। उन्होंने 2010 में दुनिया की शीर्ष दस युगल टीमों में भी जगह बनाई।

2011 के शानदार सफर में रोहन बोपन्ना को सर्बिया के खिलाफ डेविस कप टाई में सोमदेव देववर्मन के साथ भाग लेते हुए देखा गया और ऐसाम-उल-हक कुरैशी के साथ फ्रेंच ओपन के क्वार्टर फाइनल में भी खेलते हुए देख गया। इसके बाद भारतीय टेनिस खिलाड़ी ने 2012 ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए हम वतन महेश भूपति के साथ जोड़ी बनाने का फैसला किया।

हालांकि रोहन बोपन्ना और महेश भूपति लंदन खेलों के दूसरे दौर से आगे नहीं बढ़ सके, लेकिन उन्होंने इसके बाद सिनसिनाटी में एटीपी वर्ल्ड टूर मास्टर्स 1000 में पुरुषों के डबल्स के फाइनल में प्रवेश किया। कुछ महीनों बाद 2012 के पेरिस मास्टर्स कप पर भी कब्ज़ा किया।

अब तक भारतीय जोड़ी शानदार प्रदर्शन कर रही थी, लेकिन महेश भूपति के साथ नहीं बल्कि किसी और जोड़ीदार के साथ। रोहन बोपन्ना ने अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ युगल रैंकिंग नंबर 3 हासिल कर ली थी। ये उपलब्धि उन्होंने फ्रांस के साथी इडोअर्ड रोजर-वेसलिन के साथ 2013 के विंबलडन के सेमीफाइनल में पहुंचने के बाद हासिल की थी।

रोहन बोपन्ना को करियर में अगली बड़ी उपलब्धि 2016 के ओलंपिक में मिली, जब रियो में पुरुष युगल अभियान के खत्म हो जाने के बाद रोहन बोपन्ना मिश्रित युगल स्पर्धा में सानिया मिर्जा के साथ ओलंपिक पदक जीतने के करीब पहुंच गए थे।

ओलंपिक ड्रा के दौरान प्रभावशाली होने के बावजूद, मिश्रित युगल जोड़ी सीधे सेटों में लुसी हेडेक और चेकक स्टेपनिक की चेक गणराज्य जोड़ी से कांस्य पदक के प्लेऑफ मैच में हार गए। हालांकि, एक और उपलब्धि रोहन बोपन्ना के लिए ओलंपिक निराशा को दूर करने का इंतजार कर रही थी।

भारतीय टेनिस खिलाड़ी ने फ्रेंच ओपन के लिए कनाडा के गैब्रिएला डाब्रोवस्की के साथ जोड़ी बनाई, इससे पहले उन्होंने हमवतन जीवन नेदुंचेज़ियान के साथ चेन्नई ओपन के पुरुष युगल के खिताब के साथ 2017 की शुरुआत की। रोहन बोपन्ना को ये अब तक का सर्वश्रेष्ठ निर्णय साबित हुआ, जहां इस इंडो-कैनेडियन जोड़ी ने ग्रैंड स्लैम जीता।

2017 का फ्रेंच ओपन रोहन बोपन्ना का पहला ग्रैंड स्लैम खिताब था, जिसने उन्हें चौथा भारतीय खिलाड़ी बनाया। वो 2018 में आस्ट्रेलियाई ओपन मिश्रित युगल स्पर्धा में हंगरी की जोड़ीदार टेमिया बाबोस के साथ एक और ग्रैंड स्लैम जीतने के बेहद करीब आ गए थे लेकिन वो फाइनल में हार गए।

हालांकि, रोहन बोपन्ना ने 2018 एशियाई खेलों में हमवतन दिविज शरण के साथ पुरुष युगल टेनिस स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीतने के बाद निराशा को पीछे छोड़ दिया।

हालांकि कंधे की चोट ने उन्हें पाकिस्तान के खिलाफ 2019 में भारत के डेविस कप के मुकाबले से बाहर कर दिया, लेकिन भारतीय टेनिस खिलाड़ी ने अगले साल मिले-जुले प्रदर्शन के साथ शुरुआत की। जहां रोहन बोपन्ना ने वेस्ले कूलहोफ़ के साथ कतर ओपन का खिताब जीता, वहीं हमवतन अर्जुन काधे के साथ उनकी साझेदारी टाटा ओपन महाराष्ट्र के शुरुआती दौर में समाप्त हो गई।

रोहन बोपन्ना भी 2020 की शुरुआत में कनाडा के डेनिस शापोवालोव के साथ एटीपी रॉटरडैम इवेंट के सेमीफाइनल में पहुंच गए थे, लेकिन उनकी यह शानदार शुरुआत कोरोना वायरस महामारी के कारण टोक्यो ओलंपिक के दुर्भाग्यपूर्ण स्थगन की वजह से आगे तक जारी नहीं रही।

एटीपी के साथ विश्व रैंकिंग में रोहन बोपन्ना भारत की सर्वश्रेष्ठ पदक की उम्मीद हैं क्योंकि उन्हें टोक्यो ओलंपिक में क्रमशः मिश्रित और पुरुष युगल वर्ग में सानिया मिर्जा और दिविज शरण से काफी उम्मीद है।

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