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रियो डी जेनेरियो 2016
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#=14 Badminton Singles
लंदन 2012
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#3
Badminton Singles
बीजिंग 2008
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बीजिंग 2008
#=5 Badminton Singles

साइना नेहवाल

भारत
बैडमिंटन
लम्बाई
167 सीएम / 5'6''
वज़न
60 किग्रो / 132 पाउंड्स
जन्म तिथि
17 मार्च 1990 Hisar, India
लिंग
महिला

मेडल संख्या

1 ओलंपिक मेडल

ओलंपिक गेम्स

3 ओलंपिक गेम्स

साइना नेहवाल जीवनी

साइना नेहवाल ओलंपिक पदक जीतने वाली भारत की पहली बैडमिंटन खिलाड़ी हैं, जिन्होंने 2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था।

हरियाणा की शटलर ने अपने करियर की शुरुआत बहुत पहले ही कर दी थी, जब उन्होंने 2008 में BWF वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप जीती थी। उसी साल उन्होंने पहली बार ओलंपिक के लिए क्वालिफाई भी किया था, लेकिन लंदन 2012 में उन्होंने अपने शानदार प्रदर्शन से दुनिया भर में प्रसिद्धि हासिल की।

साइना नेहवाल ने आठ साल की उम्र में ही बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था, जब उनका परिवार हरियाणा से हैदराबाद आ गया। वो खेल को ज्यादा महत्व देती थीं क्योंकि वहां कि स्थानीय भाषा से वो वाक़िफ़ नहीं थीं और वो अपनी माँ के सपने को आगे बढ़ाना चाहती थी। आपको बता दें कि साइना की मां एक स्टेट लेवल की बैडमिंटन खिलाड़ी थीं। भारतीय शटलर ने इसे भी 2008 में बीजिंग ओलंपिक में भारत का सर्वोच्च स्तर पर प्रतिनिधित्व कर सफलतापूर्वक किया।

ओलंपिक क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनने वाली साइना नेहवाल क्वार्टर फाइनल में इंडोनेशिया की मारिया क्रिस्टिन युलियांटी से हारने से पहले, उन्होंने दुनिया की 5वें नंबर की खिलाड़ी और चौथी वरीयता प्राप्त हांगकांग की वांग चेन को हराया।

20 वर्षीय साइना नेहवाल सबके भरोसे पर खरी उतरीं, उन्हें 2009 में अर्जुन पुरस्कार और 2010 में राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

ओलंपिक के क्वार्टर-फ़ाइनल में पहुंचने के बाद साइना नेहवाल को वो आत्मविश्वास मिला, जिसकी उन्हें ज़रूरत थी, क्योंकि वो अगले दो वर्षों में उन्होंने बैडमिंटन जगत में धमाल मचा दिया, जहां उन्होंने BWF हांगकांग ओपन, सिंगापुर ओपन और इंडोनेशिया ओपन का खिताब जीता।

2011 के बेहतरीन साल के बाद, 22 वर्षीय साइना नेहवाल ने 2012 में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया।

चौथी वरीयता प्राप्त साइना नेहवाल ने 2012 के ओलंपिक में नीदरलैंड के जी याओ और डेनमार्क की टाइन बाउन को हराया और सेमीफाइनल तक पहुंची थीं, जहां उन्हें चीन की शीर्ष वरीयता प्राप्त वांग यिहान से हार का सामना करना पड़ा।

बाद में साइना नेहवाल दूसरी वरीयता प्राप्त वांग झिन के खिलाफ चोट के कारण अपने प्ले ऑफ मैच के दूसरे गेम से बाहर हो गईं,  जहां उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।

तेजी से उभरते हुए इस भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी ने अगले तीन वर्षों में ऑस्ट्रेलियन ओपन, दो बार इंडिया ओपन और चाइना ओपन जीता, हालांकि प्रतिष्ठित ऑल इंग्लैंड ओपन उनके लिए अभी भी एक सपना है जिसे जीतना अभी बाकी है।

2015 में साइना नेहवाल ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप जीतने के करीब पहुंत गई थीं, जब वो विमल कुमार के कोचिंग में वो टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंची थी।

हालांकि साइना नेहवाल को संघर्ष पूर्ण मैच में कैरोलिना मारिन से हार का सामना करना पड़ा था, 2015 वही साल था जब वो दुनिया की महिलाओं के एकल में नंबर वन खिलाड़ी बनीं, इस उपलब्धि को पहले किसी भारतीय ने हासिल नहीं किया था।

बाद में भारतीय बैडमिंटन स्टार अपने पुराने कोच पुलेला गोपीचंद के पास फिर से लौट आईं, नतीजतन, साइना नेहवाल ने 2010 में अपना पहला CWG खिताब जीतने के आठ साल बाद, 2018 में अपना दूसरा राष्ट्रमंडल खेलों का स्वर्ण पदक जीता।

30 वर्षीय साइना नेहवाल पिछले कई सालों से चोट से गुजर रही हैं, जिसके बाद हाल ही में पीवी सिंधु भारत की शीर्ष क्रम की बैडमिंटन खिलाड़ी के रूप में उभरी हैं। साइना नेहवाल टोक्यो ओलंपिक क्वालिफिकेशन के लिए संघर्ष कर रही थीं, जब कोरोना वायरस महामारी के कारण सभी खेल आयोजनों पर रोक लगा दी गई थी।

हालांकि, अब क्वालिफिकेशन की अवधि की कट-ऑफ तारीख बढ़ा दी गई है ऐसे में साइना नेहवाल अगले साल होने वाले ओलंपिक में अंतिम बार खेलते हुए नज़र आ सकती हैं।

भारतीय पुरुष एकल खिलाड़ी और साइना नेहवाल के पति पारुपल्ली कश्यप, किदांबी श्रीकांत के साथ ओलंपिक में जगह बनाने के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगे। अब तक, बी साई प्रणीत एकमात्र भारतीय पुरुष शटलर हैं, जिन्होंने मार्च में बीडब्ल्यूएफ विश्व रैंकिंग के बाद टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया था।

अपने 12 साल के बैडमिंटन करियर में साइना नेहवाल ने 24 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय खिताब जीते हैं, जिनमें से ग्यारह सुपरसीरीज़ खिताब हैं। वो ओलंपिक, विश्व चैंपियनशिप और विश्व जूनियर चैंपियनशिप - बीडब्ल्यूएफ के प्रत्येक इवेंट में कम से कम एक पदक जीतने वाली एकमात्र भारतीय हैं।

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