गेम्स मेडल

खेल परिणाम खेल इवेंट
रियो डी जेनेरियो 2016
खेल परिणाम खेल इवेंट
रियो डी जेनेरियो 2016
#=17 Boxing Bantamweight (≤56 kilograms)
लंदन 2012
खेल परिणाम खेल इवेंट
लंदन 2012
#=17 Boxing Bantamweight (≤56 kilograms)

शिव थापा

भारत
बॉक्सिंग
लम्बाई
169 सीएम / 5'7''
वज़न
56 किग्रो / 123 पाउंड्स
जन्म तिथि
8 दिसम्बर 1993 Guwahati, India
लिंग
पुरुष

मेडल संख्या

0 ओलंपिक मेडल

ओलंपिक गेम्स

2 ओलंपिक गेम्स

शिव थापा जीवनी

शिव थापा एक कराटे प्रशिक्षक के पुत्र हैं लिहाज़ा कॉमबैट स्पोर्ट्स उनके ख़ून में ही है। लेकिन सही मायनों में असम के इस बालक को माइक टायसन ने बॉक्सिंग रिंग में आने के लिए प्रेरित किया, और फिर जो हुआ वह भारतीय मुक्केबाज़ी इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया।

शिव थापा केवल 18 वर्ष के थे जब उन्होंने 2012 ओलंपिक के लिए क्वालिफ़ाई किया, इस तरह ओलंपिक में क्वालिफ़ाई करने वाले वह अब तक के सबसे कम उम्र के भारतीय मुक्केबाज़ बन गए। 22 वर्ष के होते होते तो थापा दो बार के ओलंपियन और अर्जुन अवार्डी बन चुके थे।

छह भाई-बहनों में सबसे छोटे शिव थापा और उनके बड़े भाई गोबिंद अपने पिता पदम की चौकस निगाहों में बड़े हुए, जिन्होंने उनमें से एक को ओलंपियन बनाने का सपना देख रखा था।

थापा के बड़े भाई गोबिंद ने राज्य-स्तरीय मुक्केबाज़ी में कई पदक जीत रखे हैं और अपने छोटे भाई को इसी खेल में आगे बढ़ने का हौसला दिया। शिव थापा ने जल्द ही इसे अपना करियर बनाया और उत्कृष्ट प्रदर्शन करना शुरू कर दिया।

अपनी पढ़ाई के साथ-साथ अपने प्रशिक्षण के दौरान शिव थापा का शौक़िया करियर अच्छी तरह से चल रहा था और जल्दी ही उन्होंने अपनी सफलता की पहली सीढ़ी चढ़ ली थी। 2010 के समर यूथ ओलंपिक में रजत पदक के साथ उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली थी।

उनका प्रभाव सीनियर स्टेज पर महसूस किया जाने लगा, क्योंकि उन्होंने अस्ताना में एशियन ओलंपिक क्वालिफ़ायर्स में 56 किग्रा वर्ग में स्वर्ण जीता और लंदन 2012 ओलंपिक के लिए अपना टिकट भी पक्का कर लिया था।

बीजिंग 2008 में विश्व चैंपियन सर्गेई वोडाप्यानोव के साथ अखिल कुमार की जीत के समय टेलीविज़न सेट के सामने आनंद लेने वाले युवा खिलाड़ी के लिए ये एक कभी न भूलने वाला लम्हा था।

मेन इवेंट में शिव थापा को मेक्सिको के ऑस्कर वाल्डेज़ के खिलाफ सामना करना था। तत्कालीन 18 वर्षीय मुक्केबाज़ ने रक्षात्मक शुरुआत की लेकिन दूसरे राउंड में बाएं-दाएं मुक्कों की सीरीज़ के साथ वापस लड़े। हालांकि, वाल्डेज़ ने तीसरे राउंड में वापसी करते हुए शिव थापा को 14-9 के अंतर से हरा दिया था।

उन्होंने बाद में कहा, "ओलंपिक हमेशा एक बहुत बड़ा अवसर होता है, प्रतियोगिता के अलावा इसके साथ कई भावनाएं जुड़ी होती हैं। जो क्वालिफ़ाई करते हैं वह हमेशा कहते हैं कि मैं नर्वस नहीं हूं, लेकिन ये सच नहीं होता।"

हालांकि अगले साल ही शिव थापा ने कमाल की वापसी की और जॉर्डन के अम्मान में आयोजित एशियाई एमेच्योर मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय बन गए।

2015 में थापा दोहा में बैंटमवेट वर्ग में कांस्य जीतने के बाद विजेंद्र सिंह (2009) और विकास कृष्ण (2011) के साथ AIBA विश्व मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले केवल तीसरे भारतीय बन गए।

वह उसी साल खेली गई एशियन चैंपियनशिप में भी कांस्य पदक जीतते हुए रियो 2016 का टिकट हासिल कर गए थे।

रियो में शिव थापा का एक बार फिर बैंटमवेट प्रतियोगिता के पहले दौर में एक कड़े प्रतिद्वंदी के ख़िलाफ़ सामना हुआ।

क्यूबा के रोबेसे रामिरेज़ पहले से ही एक ओलंपिक चैंपियन थे, जिन्होंने लंदन 2012 में फ्लाईवेट श्रेणी में स्वर्ण पर कब्जा किया था।

अपनी बायीं आंख के ऊपर चोट लगने से परेशान, थापा को फिर से ओलंपिक से बाहर होना पड़ा, जिससे उनके प्रतिद्वंदी को 3-0 से जीत हासिल हुआ, और थापा को हराने वाले इसी मुक्केबाज़ ने उस संस्करण का स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

2017 में ताशकंद में आयोजित एशियाई एमेच्योर मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप में शिव थापा स्वर्ण पदक के दावेदारों में से एक थे, लेकिन एक बार फिर चोट के कारण उन्हें स्थानीय मुक्केबाज़ एलेन अब्दुरिमोव के खिलाफ रजत पदक से समझौता करना पड़ा।

उन्होंने 2019 में एशियाई चैंपियनशिप में अपना यही प्रदर्शन जारी रखा, और उन्होंने थाईलैंड में कांस्य पदक जीता, इसके साथ ही वह चार बार एशियाई पदक विजेता बने और उसके बाद उसी साल अक्टूबर में आयोजित रेडी स्टेडी गो ओलंपिक टेस्ट इवेंट में स्वर्ण पदक भी अपने नाम किया।

थापा इसके बाद 63 किग्रा भारवर्ग में चले गए, जो एक ऐसा भारवर्ग है जहां एक और युवा प्रतिभा मनीष कौशिक कुछ समय से अपनी क़ाबिलियत का डंका बजा रहे हैं, लिहाज़ा शिव थापा अब एक नई चुनौती के लिए तैयार हैं।

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