सुनील छेत्री

लम्बाई
171 सीएम / 5'7''
वज़न
70 किग्रो / 154 पाउंड्स
जन्म तिथि
3 अगस्त 1984 Secundarabad, India
लिंग
पुरुष

मेडल संख्या

0 ओलंपिक मेडल

ओलंपिक गेम्स

0 ओलंपिक गेम्स

सुनील छेत्री जीवनी

भारतीय फ़ुटबॉल टीम के लिए अब तक सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी हैं सुनील छेत्री। वो भारतीय टीम के कप्तान के साथ भारत के सबसे बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक हैं।

भारतीय राष्ट्रीय टीम के लिए छेत्री के नाम 72 गोल हैं, वो क्रिस्टियानो रोनाल्डो के पीछे और दिग्गज लियोनेल मेसी से आगे सक्रिय पुरुष फुटबॉलरों के बीच दूसरे सबसे शानदार अंतरराष्ट्रीय गोल करने वाले खिलाड़ी भी हैं।

3 अगस्त, 1984 को तत्कालीन आंध्र प्रदेश के सिकंदराबाद में जन्मे सुनील छेत्री को फुटबॉल स्वाभाविक रूप से मिला। उनके आर्मी मैन पिता केबी छेत्री ने अपने शुरुआती दिनों में खेला करते थे जबकि माँ सुशीला ने नेपाल की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के लिए खेला था।

एक आर्मी मैन के बेटे होने के नाते सुनील छेत्री को देश भर में घूमने का मौका मिला और अक्सर उनके स्कूल बदलते रहे। लेकिन एक चीज थी, जो नहीं बदली, वो थी फुटबॉल के प्रति उनका जुनून।

छेत्री ने स्कूल में फुटबॉल में शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन उन्होंने कभी भी पेशेवर फुटबॉलर बनने पर विचार नहीं किया। वो फुटबॉल इसलिए खेलते था, ताकि वो किसी अच्छे कॉलेज में एडमिशन ले सकें और अपनी आगे की पढ़ाई कर सकें।

हालांकि, सुनील छेत्री के लिए किस्मत ने कुछ और ही योजना बनाई थी।

16 वर्षीय सुनील छेत्री ने नई दिल्ली के एक कॉलेज में 12वीं कक्षा के लिए दाखिला लिया था, तब उन्हें 2001 में कुआलालंपुर में एशियन स्कूल चैंपियनशिप में खेलने के लिए भारतीय टीम में बुलाया गया।

भारत की सबसे पुराने और सबसे प्रसिद्ध फुटबॉल क्लबों में से एक मोहन बागान ने टूर्नामेंट में सुनील छेत्री की प्रतिभा को देखा और उन्हें आगामी घरेलू सत्र के लिए अपनी टीम में शामिल किया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

भारतीय फुटबॉल में सुनील छेत्री ने मोहन बागान, जेसीटी, ईस्ट बंगाल और डेम्पो के लिए अगले आठ सालों तक खेला और अपनी फुटबॉल क्षमता को दुनिया के सामने रखा।

इससे विदेशी क्लबों में कुछ दिलचस्पी पैदा हुई और छेत्री ने 2007 में इंग्लैंड में कोवेंट्री सिटी के लिए एक ट्रायल दिया, लेकिन एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सके।

छेत्री की इंग्लैंड में खेलने की इच्छा लगभग पूरी हो गई क्योंकि लंदन स्थित क्लब क्वींस पार्क रेंजर्स ने उन्हें एक अनुबंध की पेशकश की लेकिन ब्रिटेन के वर्क परमिट वाले मुद्दों ने उस अवसर पर पानी फेर दिया।

हालांकि 2010 में सुनील छेत्री ने यूएसए के मेजर लीग सॉकर में कैनसस सिटी विजार्ड्स के लिए साइन किया और एक विदेशी लीग में खेलने वाले वो मोहम्मद सलीम और भाईचुंग भूटिया के बाद सिर्फ तीसरे भारतीय फुटबॉलर बने। हालांकि, वो एक सीज़न के बाद भारत लौट आए और 2011 में चिराग यूनाइटेड के लिए साइन किया।

सुनील छेत्री को पहली बार 2005 में सीनियर भारतीय फुटबॉल टीम में शामिल किया गया और उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ अपना पहला गोल किया।

2007 का नेहरू कप भारत के साथ सुनील छेत्री का पहला अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट था और इस आयोजन के माध्यम से उनके चार गोलों ने टीम को 1997 के बाद पहली बार ट्रॉफी उठाने में मदद की।

छेत्री ने 2008 के AFC चैलेंज कप में चार गोल दागे, जिसमें फाइनल में हैट्रिक भी शामिल थी, जहां भारत ने टूर्नामेंट जीता था। इसके बाद उन्हें भारतीय फुटबॉल के पोस्टर बॉय के रूप में देखा जाने लगा।

2009 नेहरू कप विजेता टीम के सुनील छेत्री एक महत्वपूर्ण हिस्सा थे और लेकिन उनका सबसे शानदार पल 2011 SAFF चैंपियनशिप में देखने को मिला था।

सुनील सात गोल दागकर टूर्नामेंट के शीर्ष स्कोरर बन गए। ये एक सीजन में किसी भी खिलाड़ी द्वारा किया गया सबसे अधिक गोल था। छेत्री ने सेमीफाइनल और फाइनल में तीन गोल किए थे - भारत ने नई दिल्ली में हुए इस टूर्नामेंट का खिताब जीत लिया। सुनिल छेत्री को टूर्नामेंट का प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट के खिताब से नवाज़ा गया।

सुनील छेत्री 2011 एएफसी एशियन कप में भी खेले और 2012 एएफसी चैलेंज कप क्वालिफ़ायर्स में पहली बार राष्ट्रीय टीम के कप्तान बनाए गए और भारत को 2012 में एक और नेहरू कप ट्रॉफी दिलाई।

स्पोर्टिंग क्लुब डे पुर्तगाल (Sporting CP) की ओर से 2012 में बुलावा आया और सुनील छेत्री ने एक विदेशी लीग में दूसरी बार प्रयास किया। वो भारत आने से पहले अपनी टीम के लिए पाँच मैच खेले और आई-लीग में बेंगलुरु एफसी के लिए साइन किया, जिससे उन्हें अपनी साख स्थापित करने में मदद मिली।

छेत्री ने अपने दो सत्रों में बेंगलुरू एफसी के लिए शानदार प्रदर्शन किया था। 2015 में भारत में एक नई लीग बनाई गई जिसका नाम था इंडियन सुपर लीग। मुंबई सिटी एफसी ने उन्हें 2015 में इंडियन सुपर लीग के सबसे महंगे भारतीय खिलाड़ी के रूप में खरीदा।

सुनील छेत्री ने स्कोर करना जारी रखा, 2016 में पहली बार मुंबई सिटी एफसी को प्लेऑफ में पहुंचने में मदद करने वाले और आईएसएल में हैट्रिक बनाने वाले पहले भारतीय बने।

कम खेल के समय का मतलब था कि उन्हें आई-लीग में बेंगलुरु वापस ले लिया गया था। जब बेंगलुरु क्लब ने 2017-18 में बेंगलुरू एफसी के रूप में आईएसएल में प्रवेश किया, तो छेत्री को बेंगलुरु एफसी के साथ वापस जाना पड़ा। अपने शुरुआती सत्र में ही छेत्री टीम को फाइनल तक पहुंचने में मदद की। जहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

सुनील छेत्री ने अगले सीज़न में धमाका कर दिया, जहां वो बेंगलुरू एफसी की कप्तानी करते हुए लगातार दूसरी बार अपनी टीम को आईएसएल फाइनल में पहुंचाया, इस बार वो पहले से एक कदम आगे बढ़े और एफसी गोवा को हराकर खिताब जीत लिया।

2018 के इंटरकांटिनेंटल कप में सुनील छेत्री ने केन्या के खिलाफ भारतीय फुटबॉल टीम के लिए अपना 100वां मैच खेला- जहाँ उन्होंने लगातार गोल किए और टीम को ट्रॉफी जीतने में मदद की। उन्होंने इस इवेंट में लियोनेल मेसी के 64 अंतरराष्ट्रीय गोलों के रिकॉर्ड की भी बराबरी की और बाद में अर्जेंटीना के दिग्गज खिलाड़ी के रिकॉर्ड को भी तोड़ा।

छह बार ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) प्लेयर ऑफ द ईयर रहे सुनील छेत्री अभी भी बेंगलुरु एफसी और भारतीय फुटबॉल टीम के लिए सबसे बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक हैं।

विराट कोहली और पीवी सिंधु जैसे एथलीटों के साथ, सुनील छेत्री भारत के सबसे अच्छे खेल आइकन और भारतीय फुटबॉलरों की अगली पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं।

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