गेम्स मेडल

खेल परिणाम खेल इवेंट
रियो डी जेनेरियो 2016
खेल परिणाम खेल इवेंट
रियो डी जेनेरियो 2016
#10 Wrestling Flyweight, Freestyle (≤48 kilograms)

विनेश फोगाट

भारत
रेसलिंग
लम्बाई
165 सीएम / 5'5''
वज़न
56 किग्रो / 123 पाउंड्स
जन्म तिथि
25 अगस्त 1994 Balali, India
लिंग
महिला

मेडल संख्या

0 ओलंपिक मेडल

ओलंपिक गेम्स

1 ओलंपिक गेम्स

विनेश फोगाट जीवनी

हालिया वर्षों में भारत से उभरे बेहतरीन पहलवानों में से एक के तौर पर विनेश फोगाट ने मैट पर अपना शानदार प्रदर्शन दिखाते हुए कुश्ती की विरासत को आगे बढ़ाने का काम किया है।

विनेश अपनी चचेरी बहन गीता फोगाट और बबीता कुमारी के नक्शेक़दम पर चल रही हैं। वह भारत के सबसे प्रसिद्ध कुश्ती परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके चाचा महावीर सिंह फोगाट ने बहुत ही कम उम्र में उनका इस खेल से परिचय करवा दिया था।

हालांकि जब विनेश फोगाट ने कुश्ती शुरू की थी, उस दौरान गीता खुद को धीरे-धीरे राष्ट्रीय मंच पर स्थापित कर रहीं थीं। उन्हें भी आगे चलकर इसी तरह की बाधाओं और असफलताओं को दूर आगे बढ़ना था।

विनेश को भी गांव के लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा, जिन्हें लगता था कि कुश्ती सिर्फ पुरुषों का खेल है और महिलाओं को बस घरों तक सीमित रहना चाहिए। महज़ नौ साल की उम्र में विनेश को अपने पिता की अचानक हुई मौत का दुख झेलना पड़ा।

कड़ी मेहनत और दुखों के बीच विनेश फोगाट के चाचा महावीर उनके साथ हमेशा खड़े रहे। उन्होंने ही इस युवा पहलवान का पहलवानी के इस खेल में कदम-कदम पर मार्गदर्शन किया।

जूनियर वर्ग में अपना बेहतरीन करियर बनाने के बाद विनेश ने 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय खिताब जीता। उन्होंने 48 किग्रा भार वर्ग में गोल्ड मेडल पर कब्जा किया।

इसके बाद और क़ीमती पदक हासिल करने की चाह में उन्होंने अपने पहले ओलंपिक खेलों में कदम रखा।

विनेश ने इस्तांबुल में हुए ओलंपिक क्वालिफाइंग इवेंट में जीत हासिल कर रियो 2016 के लिए अपना ओलंपिक टिकट हासिल किया और वह रियो ओलंपिक में हिस्सा लेने के लिए आत्मविश्वास से भरपूर थीं।

वह उसी जोश के साथ आगे भी बढ़ रही थीं। उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए क्वार्टर फाइनल में भी जगह बना ली। लेकिन इस बात का किसी को अंदाज़ा नहीं था कि 21 साल की उम्र में विनेश का अपने देश के लिए पदक जीतने का सपना टूट जाएगा।

अंतिम आठ में चीन की सुन यनान का सामना करते हुए विनेश का मैच के बीच में ही दाहिना घुटना डिस्लोकेट हो गया। यह भारतीय पहलवान अपने बहते हुए आंसुओं और दर्द के साथ मैट पर गिर गई। उस वक्त उनका दर्द उनके चेहरे पर साफ तौर पर झलक रहा था। उनकी पदक जीतने की संभावनाएं चकनाचूर हो गईं थीं।

लेकिन यह पहली बार नहीं था, जब विनेश खुद को साबित करने के लिए दोबारा तैयार हुईं। उन्होंने अपने टूटे हुए सपने को फिर से जोड़ने के लिए उस सबक को अपनी प्रेरणा बना ली।

वह मानती हैं, “हर बार जब मैं मैच के लिए मैट पर जाती हूं तो वह चोट मुझे जीतने के लिए प्रेरित करती है।”

इस भारतीय पहलवान के 2019 सीज़न में 53 किलोग्राम भार वर्ग में जाने के फैसले से पहले, 2018 के राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक हासिल करना उनके इस दृढ़ संकल्प के ही प्रमाण हैं।

फोगाट के भार वर्ग को बदलने के निर्णय के बाद भी उनके खेल प्रदर्शन में कोई बदलाव नहीं आया। उन्होंने अपनी फॉर्म को बरकरार रखते हुए नूर-सुल्तान में पहला विश्व चैंपियनशिप पदक हासिल करने से पहले एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर सभी को हैरान कर दिया।

उनके इसी प्रदर्शन की वजह से उन्होंने टोक्यो ओलंपिक के लिए अपनी जगह पक्की कर ली है, जहां 25 वर्षीय  विनेश अपनी रियो डि जेनेरियो की कड़वी यादों को दूर करने की कोशिश करती हुई नज़र आएंगी।

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