गेम्स मेडल

खेल परिणाम खेल इवेंट
रियो डी जेनेरियो 2016
खेल परिणाम खेल इवेंट
रियो डी जेनेरियो 2016
#21 Wrestling Welterweight, Freestyle (≤65 kilograms)
लंदन 2012
खेल परिणाम खेल इवेंट
लंदन 2012
#=3
Wrestling Lightweight, Freestyle (≤60 kilograms)
बीजिंग 2008
खेल परिणाम खेल इवेंट
बीजिंग 2008
#8 Wrestling Lightweight, Freestyle (≤60 kilograms)
एथेंस 2004
खेल परिणाम खेल इवेंट
एथेंस 2004
#18 Wrestling Featherweight, Freestyle (≤55 kilograms)

योगेश्वर दत्त

भारत
लम्बाई
165 सीएम / 5'5''
वज़न
60 किग्रो / 132 पाउंड्स
जन्म तिथि
2 नवम्बर 1982 Bhainswal Kalan, India
लिंग
पुरुष

मेडल संख्या

1 ओलंपिक मेडल

ओलंपिक गेम्स

4 ओलंपिक गेम्स

योगेश्वर दत्त जीवनी

साल 2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक विजेता योगेश्वर दत्त को देश में घर घर पहचाना जाता है। लेकिन फ्रीस्टाइल पहलवान के लिए, अपने करियर का मुकाम बहुत बड़ा व्यक्तिगत महत्व रखता है।

यह एक सपने के सच होने जैसा था, जो हरियाणा में रहने वाले उनके पिता ने देखा था और अंत में उनका ये सपना लंदन ओलंपिक में पूरा हुआ।

हरियाणा के सोनीपत में भैंसवाल कलां में जन्मे योगेश्वर दत्त शिक्षकों के परिवार से ताल्लुक रखते हैं लेकिन वह अपने पैतृक गाँव के एक नामी पहलवान, बलराज पहलवान से इस खेल में उतरने के लिए प्रेरित हुए।

दत्त के परिजन शुरुआत में आश्वस्त नहीं थे कि उन्हें रेसलिंग में ही करियर बनाना चाहिए या नहीं। लेकिन ये परेशानी कुछ ही समय तक रही, इसके बाद तो योगेश्वर दत्त के पिता ही उनके सबसे बड़े सपोर्टर बनें।

योगेश्वर दत्त जब 14 साल के थे तो वह ट्रेन से रोजाना नई दिल्ली स्थित मशहूर छत्रसाल स्टेडियम का सफर तय करते थे और यहीं से उन्हें आगे जाने की राह मिली।

करीब 7 साल बाद साल 2004 एथेंस ओलंपिक में 21 साल के योगेश्वर दत्त के सामने जापानी ग्रैफ़लर चिकारा तानबे  (उस साल के कांस्य पदक विजेता) और 2000 के सिडनी में स्वर्ण पदक विजेता अजरबैजान के अब्दुल्लायेव की चुनौती थी। इन दोनों ही मैचों में योगेश्वर दत्त को अनुभव की कमी महसूस हुई।

दो साल बाद उन्हें एक बहुत बड़ा झटका लगा, जब साल 2006 दोहा में होने वाले एशियन गेम्स से ठीक 9 दिन पहले उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद भी उन्होंने घुटने की चोट के बावजूद कांस्य पदक जीतकर अपने पिता को श्रद्धांजलि दी।

साल 2008 बीजिंग ओलंपिक में पदक के उम्मीदवार योगेश्वर दत्त खेलों में हिस्सा लेने से पहले एशियन चैंपियनशिप की 60 किलोग्राम फ्रीस्टाइल में गोल्ड मेडल जीत चुके थे। 

वहीं मुख्य इवेंट में भारतीय पहलवान को पहले राउंड में बाई मिला, कजाकिस्तान के पहलवान बाउरीज़ान ओरजालियायेव को हराकर वह क्वार्टर-फाइनल तक पहुंच गए। योगेश्वर दत्त के पदक का सपने, जापान के केनिची युमोटो के हारने के साथ ही टूट गया।

ओलंपिक खेलों के दौरान इस खिलाड़ी को काफ़ी चोटों का सामना करना पड़ा, जिसके बाद तो ये तक कहा गया कि योगेश्वर दत्त का करियर ही खत्म हो गया लेकिन भारतीय रेसलर ने ना केवल वापसी की बल्कि 2010 में दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल भी जीता।

हालांकि, योगेश्वर दत्त का सपना तो ओलंपिक पदक जीतने का था और इस खिलाड़ी ने साल 2012 लंदन ओलंपिक में पदक जीतने की तैयारी के लिए एशियन गेम्स में हिस्सा लिया और गोल्ड मेडल भी अपने नाम किया।

वहीं ओलंपिक खेल की बात करें तो योगेश्वर दत्त का पहला बाउट साल 2007 वर्ल्ड चैंपियनशिप के कांस्य पदक विजेता अनातोली गाइडिया से था। भारतीय पहलवान ने बुलगेरियन के अपने विरोधी को आसानी से मात दे दी और दूसरे राउंड में जगह बना ली। दूसरे राउंड में उनका सामना 4 बार के वर्ल्ड चैंपियन बेसिक कुदुखोव से था। 

योगेश्वर दत्त को रूस के अपने इस विरोधी से हार का सामना करना पड़ा, इस दौरान उनकी आंख भी चोट लगी लेकिन  बेसिक कुदुखोव के फाइनल में पहुंचने पर उन्हें रेपरेज के जरिए एक और मौका मिला, जिसे उन्होंने दोनों हाथों से लपकते हुए कांस्य पदक जीत लिया।

इसके साथ, उन्होंने लंदन ओलंपिक पोडियम पर कदम रखा। योगेश्वर दत्त केडी जाधव और सुशील कुमार के बाद केवल तीसरे भारतीय पुरुष पहलवान बने, जिन्होंने ओलंपिक पदक जीता।

योगेश्वर दत्त का कहना है कि रेसलिंग मेरी जिंदगी का अहम हिस्सा है, मैं जो कुछ हासिल किया है वह रेसलिंग की वजह से किया है। मेरा ओलंपिक में कांस्य पदक जीतना हमेशा मेरे दिल के करीब रहेगा।

ओलंपिक में मेडल जीतने के बाद योगेश्वर दत्त ने साल 2014 ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स के 65 किलोग्राम फ्री स्टाइल में गोल्ड मेडल पर कब्जा किया लेकिन साल 2016 में हुए रियो ओलंपिक में उनका सफर वैसा नहीं रहा, जैसै कि उम्मीद की जा रही थी। इस खिलाड़ी का सफर क्वालिफिकेशन राउंड में मंगोलियाई गेंजोरिग्नी मांडखानारन से हारकर खत्म हो गया।

अब इस खिलाड़ी ने बजरंग पुनिया पर ध्यान देने के लिए रेसलिंग से संन्यास ले लिया है। बजरंग भारत के एक उभरते हुए पहलवान हैं, जिनसे टोक्यो ओलंपिक में पूरे देश को पदक की उम्मीद है।

एथलीट