फ़ीचर | सेलिंग

नाविका नेथरा कुमानन ने किया कमाल 

सेलिंग वर्ल्ड कप में भारतीय 22 वर्षीय सेलर नेथरा ने ब्रॉन्ज़ मेडल जीत भारत को सम्मानित किया। 

लेखक जतिन ऋषि राज ·

नेथरा कुमानन एक ऐसा नाम जिसने भारत को सेलिंग वर्ल्ड कप में पहला मेडल जितवाया है। यूएसए, मियामी में चल रही वर्ल्ड सीरीज़ 2020 के दौरान नेथरा ने ब्रॉन्ज़ मेडल जीत भारत को सेलिंग जैसे खेल में गौरान्वित किया है।

चेन्नई की इस खिलाड़ी ने शानदार खेल दिखाते हुए कई बार बढ़त बनाई लेकिन वे इसे कायम रखने में असमर्थ रहीं। इस वजह से उनके हाथ ब्रॉन्ज़ मेडल आया और भारतीय आवाम इस जीत से बेहद खुश है। आपको बता दें कि यूएसए की रिका रीनेके ने गोल्ड मेडल जीतते हुए पोडियम के सबसे ऊपर रहीं, जबकि ग्रीक की सेलर वासिलिया कराचलियौ ने सिल्वर अपने नाम किया

दिलचस्प बात तो यह रही कि नेथरा कुमानन को जीत का आभास नहीं हुआ और उन्होंने टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बात करते हुए कहा “मुझे नहीं लगा था कि मेरे प्रदर्शन ने मुझे मेडल मिल जाएगा, यकीन तब हुआ जब मुझे दूसरी सेलर ने मेरी जीत की सूचना दी। यह जीत मेरे लिए सबसे बड़ी और यादगार जीत है।”

22 वर्षीय नेथरा, जो चेन्नई में इंजीनियरिंग कर रहीं है, उन्होंने अपनी ही रूम मेट मतिल्डा ताल्लुरी को 6 अंकों से हराकर ब्रॉन्ज़ मेडल पर कब्ज़ा किया। गौरतलब है कि नेथरा की ट्रेनिंग स्पेन के कैनरी द्वीप समूह में हुई है जहां उनकी प्रतिद्वंदी एरिका रीनेके और रोमानिया की इब्रु बोलाट ने भी खूब पसीना बहाया है।

लगातार ट्रेनिग ही जीत की चाबी है

नेथरा कुमानन ने साल 2014, 2018 के एशियन गेम्स में भी भारत की अगुवाई की है। दूसरे इवेंट में चौथे स्थान पर रहने की वजह से नेथरा का 2020 ओलंपिक गेम्स में क्वालिफाई करने का सपना थोड़ा डगमगाया ज़रूर है।

नाविक नेथरा ने आगे बात करते हुए बताया “एशियन गेम्स के दौरान मुझ पर टोक्यो 2020 में क्वालिफाई करने का दबाव बहुत ज़्यादा था। इनमें से बहुत चीज़ें स्व-प्रेरित रहीं और वे मेरी हार का कारण बनीं। इस साल मैं लगातार लय में बने रहने पर ध्यान दे रही हूं और हमेशा मेरा फोकस ओलंपिक गेम्स जैसी बड़ी प्रतियोगिता पर है। ज़्यादातर लोग यह नहीं जानते कि सेलिंग नामक खेल भी भारत में खेला जाता है। यहां की जनता में क्रिकेट, फुटबॉल और हॉकी के लिए ज़्यादा रुझान है।”

उन्होंने आगे बात करते हुए सेलिंग का महत्व बताया “अब खिलाड़ी सेलिंग के उच्च स्तर पर प्र्रतिस्पर्धा करते हैं और इसका स्तर जितना बढ़ेगा खिलाड़ी और जनता उतना ज़्यादा इस खेल से जुड़ने की इच्छा रखेंगे। अब दर्शकों की भी संख्या पहले से बढ़ गई है। उन्होंने आगे कहा “मैंने पहली बार सेलिंग समर कैंप में की थी और तब से आज तक मैं इस खेल से जुड़ी हुई हूं। मुझे इससे प्यार है, और जितने भी खेल मैंने बचपन में खेले हैं, मुझे उनसे ज़्यादा यह खेल पसंद है। सेलिंग में किसी भी अन्य खेल से ज़्यादा मानसिक ताकत लगती है।”

हालांकि भारत में रहने के बाद सेलिंग में नाम करना आसान नहीं है। नेथरा कुमानन का मानना है कि उन्होंने जितना समय इस खेल में निवेश किया है वह अच्छा है। “मैं 22 साल की हूं और मुझसे कोई छोटा आकर पूछेगा तो मैं उसे यही कहूंगी कि यह खेल बहुत ज़्यादा समय मांगता है, घंटो की प्रक्टिस लगती है लेकिन वह सब कभी भी ज़ाया नहीं जाएगा। आपको दुनिया घुमने का मौका मिलेगा, नए लोगों से मिलने का मौका मिलेगा और आप उनसे बहुत कुछ सीख सकते हैं।

नज़र टोक्यो 2020 पर

नेथरा कुमानन के पास टोक्यो 2020 में क्वालिफाई करने का एक सुनहरा अवसर आने वाला है। मार्च 15 से होने वाली एशियन सेलिंग चैंपियनशिप में अगर यह भारतीय सेलिंग स्टार टॉप 2 में रहकर प्रतियोगिता का अंत करतीं हैं तो ओलंपिक गेम्स में क्वालिफाई करना बेहद आसान हो जाएगा।

भारतीय खेल प्रेमियों के साथ-साथ नेथरा भी टोक्यो 2020 में स्थान पुख्ता करने के लिए उत्साहित हैं। अबू धाबी में होने वाले प्रतियोगिता के लिए उन्होंने कहा “मैं वहां अपने देश के लिए एक स्थान पुख्ता करने की कोशिश करूंगी, अगर सब सही जाता है तो अगस्त के महीने में मुझे टोक्यो जाने का मौका भी मिल सकता है।“

''भारत में कभी किसी खिलाड़ी ने सेलिंग के ज़रिए ओलंपिक गेम्स में भाग नहीं लिया है। मेरा लक्ष्य अगले ओलंपिक गेम्स में अच्छा प्रदर्शन करना है। इस साल की बात करें तो क्वालिफाई करने के सुनहरे मौके भी हैं। अगर मुझे बहुत कुछ हासिल करना है तो मुझे और 4 साल इस खेल को देने होंगे।”।"