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भारतीय एरोज: भारत की अगली पीढ़ी के सितारे I-लीग में विकास के एक और सत्र के लिए हैं तैयार  

भारतीय एरोज प्रोजेक्ट ने देश को दी गुरप्रीत सिंह संधू, जेजे लालपेखलुआ, प्रीतम कोटाल जैसी शीर्ष प्रतिभाएं

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

भारतीय एरोज अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) का एक डवलपमेंट प्रोजेक्ट है जो देश के सबसे प्रतिभाशाली युवा फुटबॉलरों को मूल्यवान खेल समय देने के लिए बनाया गया है। सभी खिलाड़ी I-लीग के आगामी सत्र के लिए तैयार हैं।

मुख्य कोच शनमुगम वेंकटेश के नेतृत्व में AIFF ने युवा सर्किट के सर्वोत्तम खिलाड़ियों में से एरोज कमान का गठन किया है। ज्यादातर 17 और 18 साल के युवाओं की टीम जनवरी में कोलकाता में आयोजित होने वाली I-लीग में विदेशी खिलाड़ियों के साथ पेशेवर क्लबों का मुकाबला करेगी।

ये संभावित सितारे U16 और U19 स्तर पर भारत के जूनियर टीमों का भी चयन करते हैं।

खिलाड़ियों की नई पौध कोलकाता में I-लीग के आगामी संस्करण की तैयारी कर रही है, लेकिन उनके भविष्य का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय मंच पर अच्छा प्रदर्शन करना है।

मंगलवार को मीडिया बातचीत में कोच शनमुगम वेंकटेश ने बताया कि "हमारा लक्ष्य 2022 में U19 AFC क्वालीफाइंग दौर के लिए टीम तैयार करना है। I-लीग, IFA शील्ड और जो भी टूर्नामेंट अब खेलेंगे यह उसकी तैयारी है। I-लीग उनके लिए एक बहुत बड़ा मौका है। U17 के युवाओं के लिए यह बहुत फायदेमंद साबित होगा। इस सीज़न के I-लीग के बाद उन्हें काफी अनुभव मिलेगा और इसके बाद मैं इनमें से कई खिलाडियों को भारत की सीनियर टीम और शीर्ष क्लबों में खेलते देखना चाहता हूं।"

टीम ने हाल ही में आयोजित IFA शील्ड में वरिष्ठ क्लबों के खिलाफ प्रतिस्पर्धा की है। हालांकि, वो उल्लेखनीय उपलब्धि जरूर हासिल नहीं कर सके। वेंकटेश का मानना है कि टीम के प्रदर्शन शुरू होने से पहले उनके पास अधिक समय होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि “मैं IFA शील्ड में खेलने का मौका देने के लिए AIFF का शुक्रिया अदा करता हूं। इन युवा खिलाडियों ने लम्बे समय बाद वरिष्ठ और विदेशी खिलाड़ियों के खिलाफ मैच खेला। I-लीग की शुरुआत से पहले यह शानदार अनुभव था। बेशक, परिणाम हमारे पक्ष में नहीं था लेकिन उनके लिए अच्छा अनुभव था। यह आगामी I-लीग के लिए मददगार साबत होगा।”

इसमें कोई संदेह नहीं है कि पिछले एक दशक में एरोज प्रोजेक्ट भारतीय फुटबॉल के लिए बहुत महत्वपूर्ण रहा है।

I-लीग में इंडियन एरोज 

कब हुए थी शुरुआत?

2010 में भारत के कोच बॉब हॉटन ने देखा कि I-लीग क्लब में शामिल होने पर भारत U-19 के कई खिलाड़ी महज एक बेंचवार्मस बैंच पर बैठने वाला खिलाड़ी थे। यह खिलाड़ी के रूप में विकास में बाधा बन रहा था। AIFF के अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने उनके विकास में सहायता के लिए बहुत कुछ साथ रखने का सुझाव दिया। इस विचार ने कोच को उत्साहित किया क्योंकि उनका मानना था कि शीर्ष कोचिंग और अच्छी सुविधाओं के संयोजन से युवा खिलाडियों का विकास जारी रह सकता है

डेसमंड बुलपिन, प्रीमियर लीग में एक जाना पहचाना नाम था। उन्होंने इंग्लैंड के पूर्व कप्तान पीटर क्राउच को पसंद किया था। टीम ने फेडरेशन कप में AIFF XI के रूप में JCT FC के खिलाफ 21 सितंबर 2010 को अपने पहले पेशेवर मैच में भाग लिया। उन्होंने टीम के इतिहास में पहला गोल करते हुए मलासाफेला के साथ 1-0 से जीत हासिल की। हालांकि टीम ग्रुप में तीसरे स्थान पर रही लेकिन अगले राउंड में सफल नहीं हो सकी।

उसी सीज़न में उन्होंने I-लीग में भाग लिया और स्टिक के नीचे गुरप्रीत सिंह संधू थे जिन्होंने अब खुद को भारत के नंबर एक गोलकीपर के रूप में स्थापित कर लिया है। जबकि लाइनों की अगुवाई 2016 में AIFF प्लेयर ऑफ द ईयर मिजो स्नाइपर जीजे लालपेखलुआ ने की।

जेजे ने पहले सीज़न में अपने खेल की बारीकी साबित की। उन्होंने कोलकाता के दिग्गज मोहन बागान के खिलाफ हैट्रिक सहित 13 गोल किए। स्ट्राइकर उस सीजन में सबसे ज्यादा गोल करने वाले भारतीय खिलाड़ी बने।

टीम ने चरित्र और जुनून दिखाया और वो वरिष्ठ खिलाड़ियों के खिलाफ खेलने से भी नहीं डरते थे। यह एक बानगी जो अब भी एरोज टीमों को परिभाषित करती है। 14 टीमों में से वे नौवें स्थान पर रहे। उनका पहला सत्र ही सराहनीय होने के बावजूद उनसे अधिक सक्षम विदेशी खिलाड़ियों के पक्ष में गया।

मुख्य कोच शनमुगम वेंकटेश

पैलानी एरोज

अगले सीज़न में AIFF ने उन्हें पैलानी एरोज के रूप में फिर से संगठित किया और इसका बेस कोलकाता में स्थानांतरित कर दिया। इस सीज़न में प्रीतम कोटाल, प्रोने हाल्डर जैसे कई नए चेहरों को टीम में शामिल किया गया, जो आगे चलकर स्टार बन गए। ये दोनों खिलाड़ी भारत की राष्ट्रीय टीम में नियमित रूप से शामिल हैं और अपने क्लब ATK मोहन बागान में भी बने हुए हैं।

लेकिन इस संस्करण में स्टार प्रचारक CS सबेथ भी शामिल थे जिन्होंने नौ गोल दागकर सर्वोच्च गोल करने वाले भारतीय खिलाड़ी का रिकॉर्ड बनाया था। उन्होंने हैट्रिक भी बनाई। उनके निरंतर बेहतर प्रदर्शन के कारण अगले सत्र में मोहन बागान ने उन्हें अपने साथ मिला लिया।

2013 में वित्तीय परेशानियों के कारण प्रोजेक्ट को खत्म कर दिया गया लेकिन 2017 में AIFF द्वारा फीफा U17 विश्व कप की सफलतापूर्वक मेजबानी करने के बाद इसे फिर से चालू किया गया। भारत के U17 टीम को पुर्तगाली प्रबंधक लुइस नॉर्टन डे माटोस के मार्गदर्शन में I-लीग में खेलकर विकसित करने और सुधार करने का मौका दिया गया।

इस बैच के कई होनहार नौजवानों में से अधिकांश अब इंडियन सुपर लीग (ISL) क्लबों के साथ अनुबंध करने के लिए आगे बढ़ गए हैं। जबकि अमरजीत सिंह और नरेंद्र गहलोत ने भारत की वरिष्ठ राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व किया है।

इस टीम के एक खिलाड़ी लालेंगमाविया ISL मैच में सबसे कम उम्र के कप्तान बने। उन्हें 30 नवंबर, 2020 को FC गोवा के खिलाफ मैच में कोच जेरार्ड नुस ने आर्मबैंड दिया था।

इस पक्ष की सबसे बड़ी जीत 2019 में मिली जब उन्होंने मोहन बागान को साल्ट लेक स्टेडियम में 3-1 से हराया। इसी सीज़न में रोहित दानू I-लीग में आइज़ॉल FC के खिलाफ 14वें मिनट की स्ट्राइक के साथ सबसे कम उम्र के गोल करने वाले खिलाड़ी बने।

दनु ने 16 साल पांच महीने और 27 दिन की उम्र में जितेंद्र सिंह का पिछला रिकॉर्ड तोड़ा, जो उन्होंने 16 साल, छह महीने और 13 दिन की उम्र में 26 दिसंबर, 2017 को शिलांग लाजोंग के खिलाफ गोल करके बनाया था। दिलचस्प बात यह है किजितेंद्रर दानू दोनों ने यह रिकॉर्ड एरोज में फ्लोयड पिंटो के निर्देशन में बनाया था।

देशव्यापी खोज

AIFF के पास खोज का एक मजबूत नेटवर्क है जो टीम के लिए देश की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को तलाश करने का काम करता है। वे भारत के कई फ़ुटबॉल हाटबेड्स में ट्रायल कैंप आयोजित करते हैं और संभावित खिलाड़ियों को तलाशते हैं जिन्हें फ़ाइनल ट्रायल के लिए भुवनेश्वर भेजा जाता है और कोच से हरी झंडी मिलती है।

भारत की U19 और U20 टीम का गठन भारतीय एरोज के खिलाड़ियों में से की जाती है। स्पेन में COTIF कप में अर्जेंटीना के खिलाफ वास्तव में भारत U20 टीम के लिए सबसे शानदार जीत में से एक थी। इसमें एरोज टीम के युवाओं को शामिल किया गया था। साहिल पंवार को छोड़कर शुरुआती XI के सभी खिलाड़ी जिन्होंने अर्जेंटीना की U20 टीम को 2-1 से हराया वे सभी एरोज का हिस्सा थे।

भारत की अगली पीढ़ी की प्रगति को नुकसान नहीं पहुंचे यह देखते हुए भारतीय FA ने प्रोजेक्ट को जारी रखा है। आगामी I-लीग में उनके प्रदर्शन को भारतीय फुटबॉल प्रशंसकों और क्लबों द्वारा उत्सुकता से देखा जाएगा जो भारतीय फुटबॉल के अगले संभावित सुपरस्टार की तलाश कर रहे हैं।