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रेसलर एरिका वीब की युवाओं को सलाह , 'अपनी जगह बनाने के लिए कड़ी मेहनत करें'

वीब जानती हैं कि अपने उपर संदेह और सवालों के साथ जीना कैसा होता है। परंपरागत रूप से पुरुष-प्रधान खेल में एक महिला होने की कई और भी चुनौतियाँ हैं। लेकिन उनकी युवाओं को सबसे बड़ी सीख और सलाह है कि वे जो चाहे कर सकते हैं।

लेखक ओलंपिक चैनल ·

वीब जानती हैं कि अपने उपर संदेह और सवालों के साथ जीना कैसा होता है। परंपरागत रूप से पुरुष-प्रधान खेल में एक महिला होने की कई चुनौतियाँ हैं। महिलाओं को अक्सर प्रतिस्पर्धी स्तर पर अपने सम्मान और अहमता के लिए लड़ना पड़ता है। भारत में, जहां प्रचलित लिंग भूमिकाओं को प्रणालीबद्ध तरीके से लागू किया जाता है, इनसे विचलन विद्रोह माना जाता है। लेकिन 11,000km दूर कैनॅड़ा में, एरिका वीब (Erica Wiebe) के गोल्ड तक का सफर हमें सिखाता है कि आत्मविश्वास मिलता है अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलकर और ऐसे लोगों से जुड़कर जो आपके लक्ष्य का समर्थन करते हैं।

“मेरे मित्र कहते हैं - ‘आप इतनी आश्वस्त कैसे हैं ’। काश वे जानते!”

मर्दों की दुनिया में जीवन

वीब ने ‘को-एड’ रेसलिंग के बारे में हाई स्कूल के ग्रेड 9 के पहले सुना भी नहीं था, लेकिन एक बार उसे खेलने के बाद वह उसमें लीन हो गईं। खेल के प्रति उनके प्रेम ने उन्हे कैलगरी जाने के लिए प्रेरित किया, जहाँ पर महिलाओं की रेसलिंग की विशाल विरासत है। छोटी उम्र में एक नए शहर में अकेले रहना उनके लिए कठिन था, पर वीब विश्वास रखती हैं उसे ढूंढने में जो “आपकी आत्मा को प्रज्वलित करे” और उसकी ओर निडर होकर बढने में, क्योंकि डर का सामना करने से ही उस पर जीत होती है।

लेकिन उनके पहले आने वाली कई महिलाओं की तरह, वीब का श्रेष्ठता तक का सफर आसान नहीं था। समाज आज भी युवा लड़कियों को दक़ियानूसी समझता है, जिसका उनके आत्मविश्वास पर बुरा असर वयस्क जीवन तक चलता है। आज भी लड़कियों की स्पोर्टस में भागीदारी को बढावा न मिलना एक बड़ी समस्या है, खासकर भारत में, जैसा वीब के लिए भी था। उन्हें याद है सुनना कि वे ‘रेसलर जैसी नहीं दिखती’, और ये शब्द ऐसे थे जो उनके आत्मविश्वास को तोड़ देते थे, जैसे, ‘ क्या महिलाएं भी रेसलिंग करती हैं?’। वे महिलाओं को सलाह देती हैं कि वे अपने लक्ष्य पर अटल रहें, पर मानती हैं कि वे खुद हमेशा 100% नहीं महसूस करतीं। मुश्किल दिनों में जब वीब थकी हुई या घायल होती हैं, और उनके शरीर से खून बह रहा होता है, तब हार मान लेना बहुत आसान लगता होगा। लेकिन उन्होने सीखा है कि उठकर आगे बढ़ना और अपना उच्चतम देना ही सफलता की पहली सीढी है। फिर महत्वपूर्ण बात यह जानना है कि आपसे यह अकेले करने की उम्मीद नहीं की जाती है।

एरिका विब

"महिलाओं के खेल का इतिहास दृढ़ता का सबक है।”

दूसरों से समर्थन लेना

वीब कहती हैं कि रेसलिंग अकेले खेला जाने वाला स्पोर्ट लगता है, लेकिन इसमें अकेले सफलता पाना नामुमकिन है। खिलाड़ी हर दिन अपनी टीम के साथ अभ्यास करते हैं और कोच उनका हर कदम पर साथ देते हैं। वे एक-दूसरे को अपनी उच्चतम क्षमता तक पहुंचने के लिए प्रेरित करते हैं। लेकिन वे कहती हैं कि उनके खेल करियर में सबसे बड़ा समर्थन दोस्तों और परिवार का है जो वीब की रोज़ाना जिंदगी का हिस्सा हैं, जिन्हें उनकी जीत या हार से फर्क नहीं पड़ता। वीब लोगों से कहती हैं वे ऐसे लोगों के साथ रहें जो उनके जुनून को सपोर्ट करें, “वे जो भी हो”, और उन्हें और उँची उडान भरने के लिए प्रोत्साहित करें।

“आप मैट पर अकेले जाते हैं लेकिन पर्दे के पीछे मानो जैसे पूरा गाँव आपको सहारा देता है।” 

वीब को उनकी मेहनत रंग लाती तब दिखी जब उन्होंने 2016 रियो ओलंपिक में 75-kg फ्रीस्टाइल वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। उनके अनुभव में बड़ी उपलब्धियाँ उनकी निष्ठा और अभ्यास में निवेश किए गए वर्षों से आती हैं। यह धैर्य और कड़ी मेहनत का कार्य है। लेकिन वीब को प्रेरणा युवा महिलाओं को अपने खेल की शारीरिक और सांप्रदायिक शक्ति से आश्वस्त और बलशाली महसूस कराने से मिलती है।

“मैं चाहती हूं कि वे मुझे देखें और इस खेल में अपने स्थान और इसके प्रति अपने प्यार पर कभी सवाल न करें।”

ओलंपिक स्वर्ण पदक के साथ एरिका वीब

शक्तिशाली महिलाओं का निर्माण

वीब रोल माॅडल्स का महत्तव बहुत मानती हैं और अपना समय रेसलिंग के शारीरिक और मानसिक पहलुओं में युवाओं को कोच करने में लगाती हैं। वे कहती हैं कि इस प्रक्रिया का सबसे अच्छा हिस्सा वह है जब लड़कियाँ “10-ft ऊंचा” और आश्वस्त महसूस करती हैं, और पूरे साहस से ख़ुद को व्यक्त करती हैं। सबसे अच्छा उपहार जो आप उन्हें दे सकते हैं, वह है उन्हें उनके विशिष्ट व्यक्तित्व का मूल्य दिखाना।

आत्मविश्वास बढाने के अलावा, रेसलिंग अभ्यास टीम के साथियों के बीच मजबूत इमोशनल संबंध बनाता है, जो वीब मानती हैं महिलाओं के लिए विशेष रूप से ज़रूरी है, जो संस्थागत सहयोग कि अनुपस्थिति में प्रतिदिन वैधता, दृश्यता, और अवसर के लिए लड़ती हैं। वे मानती हैं कि इस सपोर्ट नेटवर्क का निर्माण समाज में प्रगति लाने और अगली पीढ़ी की युवा लड़कियों की स्पोर्टस में सुरक्षा सुनिश्चित करने का असली अवसर है।

“अगर आप कुछ साधने में पहल करते हैं, तो सुनिश्चित करें कि आप अंतिम नहीं हों।"

ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतने के बाद जश्न मनाती एरिका वीब

वीब युवाओं को अपनी प्रतिभा पहचान कर दृढ़ निश्चय से काम करने की सलाह देती हैं। आने वाली पीढी के लिए चुनौतियाँ और जटिल हैं क्योंकि हम ऐसे दौर में रहते हैं जहां हम तुरंत संतुष्टि की उम्मीद करते हैं। उनकी सलाह है, अपने सफर का आनंद लें। डर और संदेह सहज, और आपकी मानवता का प्रतीक है, इनसे प्रेरणा लें। नई चीजें करें, दृढ़ता से काम करें, और जरूरत पड़ने पर सपोर्ट लें ।

“हम रेसलर्स युवा लड़कियों को दिखाना चाहते हैं कि वे जो चाहें कर सकती हैं। यह जीवन की सबसे बड़ी सीख है।”