कैसे 0.1 सेकंड में मिल्खा सिंह के हाथों से फिसल गया ओलंपिक पदक !

फ़्लाइंग सिंख ऑफ़ इंडिया के नाम से मशहूर मिल्खा सिंह 1960 रोम ओलंपिक गेम्स में मेडल जीतने के बेहद क़रीब आकर चूक गए।

बहुत सालों से उसैन बोल्ट (Usain Bolt), एलिसन फेलिक्स (Allyson Felix), डॉफ्ने स्किप्पर्स (Dafne Schippers) और हेल गेब्रसेलासी (Haile Gebrselassie) जैसे दिग्गजों ने एथलेटिक्स की दुनिया में अपना नाम बनाया हुआ है और अगर बात करें भारत की तो वह इस क्षेत्र में काफी पीछे था। हालांकि कुछ एथलीट ऐसे निकलें हैं जिन पर भारतीय एथलेटिक्स का दारोमदार रहा है और उन्होंने खूब नाम भी कमाया है।

वह था रनिंग का किंग, नाम है मिल्खा सिंह

भारतीय की ओर से एक नाम तैयार हो चुका था और वह था मिल्खा सिंह (Milkha Singh), जिनके उपर 1960 रोम ओलंपिक गेम्स का दारोमदार था। ‘फ़्लाइंग सिख’ के नाम से मशहूर मिल्खा दूसरी बार ओलंपिक में हिस्सा लेने जा रहे थे और उन्होंने दो साल एहले यानी 1958 एशियन गेम्स में 400 मीटर गोल्ड मेडल जीता हुआ था। यही वजह थी की मिल्खा से ओलंपिक की उम्मीदें बढ़ गईं थीं।

मिल्खा सिंह 1958 और 1962 एशियन गेम्स को फतह कर कॉन्टिनेंटल स्तर पर अपने नाम का डंका बजाया हुआ था लेकिन 1960 ओलंपिक गेम्स की वह दौड़ मिल्खा कभी भूल नहीं सकते जिसमें वह चौथे स्थान पर रहे थे।

फ़ोटो फ़िनिश

400 मीटर में भाग ले रहे मिल्खा ने क्वार्टर-फाइनल तक का सफ़र मानों बहुत सफाई से पार किया और यहां तक कि सेमी-फाइनल में उनका प्रदर्शन और बेहतर हो गया। उन्होंने यूएस के ओटिस डेविस (Otis Davis) के पीछे रहकर फाइनल में कदम रखे।

प्रिलिमिनरी राउंड में शानदार प्रदर्शन दिखाने के बाद मिल्खा सिंह फाइनल में जाने के लिए फेवरेट तो बन ही गए लेकिन उनसे मेडल जीतने की भी उम्मीदें बढ़ गईं थीं। जिस तरह से वह दौड़ रहे थे, देख कर लग रहा था कि भारत का ट्रैक एंड फील्ड में मेडल जीतने का सपना अब पूरा हो ही जाएगा।

एक तरफ मिल्खा भारत के लिए इतिहास लिखने को बेकरार थे तो दूसरी तरफ उनके प्रशंक उनके लिए दुआ मांग रहे थे। पूरा भारत एक हो चुका था और सबकी ज़ुबान पर एक ही नाम था ‘मिल्खा सिंह’।

इस दौड़ में निर्णय में त्रुटि देखि गई जिस वजह से साउथ अफ्रीका के मैल्कॉम स्पेंस (Malcolm Spence) ने भारतीय मिल्खा को पछाड़ दिया।

मैल्कॉम स्पेंस ने दौर 45.5 सेकंड में ख़त्म की ब्रोंज़े मेडल पर अपना हक जताया। मिल्खा भी खूब दौड़े और उनके और मेडल के बीच महज़ 0.1 सेकंड का अंतर रह गया। इस मुक़ाबले के बाद कुछ सवाल भी खड़े हुए लेकिन सच तो यह था कि भारत के हाथ से ट्रैक एंड फील्ड में मेडल फिर नहीं आया।

ओटिस डेविस डेविस ने रेस को 44.9 सेकंड में ख़त्म कर गोल्ड मेडल पर अपने नाम की मुहर लगा दी थी, कार्ल कॉफ़मैन (Carl Kaufmann) और विजेता ओटिस डेविस के बीच भी अंतर नाम मात्र के बराबर रहा।

आज भी मिल्खा सिंह के बेटे जीव मिल्खा सिंह के दिल में उस रेस के आंकड़े ताज़ा हैं और वह भी बाकी भारतीय की तरह सोचते है कि काश उस डन मेडल हमारे हाथ आ जाता।

ओलंपिक चैनल से बात करते हुए गोल्फर जीव मिल्खा सिंह ने कहा “उन्होंने मुझे कहा था कि वह मेरी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी गलती थी और मैं उके लिए खुद को कभी माफ़ नहीं करूंगा। उन्हें हमेशा यही दुःख रहा और उन्होंने खुद को दोषी माना और कहा कि टॉप लेवल का एथलीट होने के नाते मैं गोल्ड मेडल जीत सकता था लेकिन मैंने रेस को ख़राब मैनेज किया।

मुझे पता था कि मेरी गलती क्या थी। लेन 5 में ज़बरदस्त दौड़ने के बाद मैं 250 मीटर पर धीरे हो गया और उसके बाद मैं अंतर को कवर नहीं कर पाया।

मिल्खा सिंह (बाएं), रोम 1960 की 400 मीटर रेस की एक फ़ोटो फ़िनिश 
मिल्खा सिंह (बाएं), रोम 1960 की 400 मीटर रेस की एक फ़ोटो फ़िनिश मिल्खा सिंह (बाएं), रोम 1960 की 400 मीटर रेस की एक फ़ोटो फ़िनिश 

लिविंग लीजेंड

मिल्खा सिंह ने भले ही मेडल न जीता हो लेकिन उस दिन उन्होंने दिल जीतने के साथ-साथ नेशनल रिकॉर्ड भी बना सिया जो आज तक उन्ही के नाम है।

1960 रोम ओलंपिक गेम्स में भारतीय हॉकी टीम भी गोल्ड मेडल जीतने से वंचित रह गई थी और साथ ही मिल्खा के हाथ आते-आते मेडल भी छूट गया था।

ओलंपिक गेम्स के अलावा मिल्खा सिंह ने कई प्रतियोगिताएं अपने नाम की हैं और उन्होंने भारतीय रैक एंड फील्ड का भविष्य भी उज्जवल कर दिया था। असिना गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के साथ मिल्खा सिंह कॉमनवेल्थ गेम्स में ट्रैक एंड फील्ड में गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले भारतीय भी बनें।

इसके बाद इतिहास रचा गया जब प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरु ने मिल्खा की जीत के अगले दिन देश में राष्ट्रिय छुट्टी का एलान किया। मिल्खा ने बाद में भी भरतीय खेल जगत को बढ़ावा दिया और इस बार वह पंजाब के डायरेक्टर ऑफ़ स्पोर्ट्स बन गए।

आज उस इवेंट को लगभग 60 साल हो चुके हैं लेकिन मिल्खा सिंह क नाम आज भी भारत में अदब और इज्ज़त से लिया जाता है।

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