अचंत शरत कमल ने खिलाया भारतीय टेबल टेनिस का कमल 

तमिलनाडू के इस खिलाड़ी ने दी भारत को टोक्यो 2020 में जीतने उम्मीद। 

खेल और भारत का रिश्ता पिछले कुछ समय से मज़बूत हुआ है। बात करें अगर टेबल टेनिस कि तो भारत ने बहुत से महत्वपूर्ण पल बुनें हैं जिन्हें देख हर युवा इन्हें दौहराना चाहेगा। कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 कि तो य वही साल है जहां भारत ने टेबल टेनिस में पहला गोल्ड मेडल हासिल किया था। इसके बाद गोल्ड कोस्ट 2018 में भारत ने 6 गोल्ड अपने नाम किए और दुनिया भर में अपना लोहा मनवाया। इन सभी उपलब्धियों को प्राप्त करने वाला एक साझा नाम है अचंत शरत कमल

शरत कमल ने भारतीय तबल टेनिस को बहुत ऊँचाइयों पर पहुंचाया है। अपने कौशल का सिक्का चलाते हुए शरत कमल ने दुनिया भर में भारत के टेबल टेनिस की आयु में बढ़ौतरी कराई है। 

कॉमनवेल्थ गेम्स 2006 में जहां शरत कमल ने उम्दा प्रदर्शन करते हुए सभी सुर्खियां बटोरीं वहीं 2004 एथेंस ओलंपिक गेम्स में शिरकत कर उन्होंने एक बार फिर अपने होने का प्रमाण दिया। भारत सरकार ने शरत कमल के योगदानों को देख कर इन्हें अर्जुन अवार्ड से भी सम्मानित किया।

कोशिशों ने किया कमाल 

शरत कमल के प्रयासों ने टेबल टेनिस को भारत में एक अच्छा दर्जा दिलाया है। वे चाहे बड़े स्तर पर मेडल जीतना हो या बीजिंग ओलंपिक गेम्स में शिरकत करने वाले इकलौते भारतीय सिंगल्स खिलाड़ी बनना हो, हर कदम उन्होंने खेल का बाखूबी साथ दिया है। उनका मानना है कि बीजिंग गेम्स ने भारत में तबल टेनिस की दशा बदली और वे एक इस मुल्क में एक अच्छी शुरुआत की तरह गिना जाएगा।  

स्क्रॉल.इन से बात करते हुए शरत कमल ने बताया कि “साल 2008 भारतीय टेबल टेनिस की बढ़ाई के लिए एक शुरुआत रही।” आज के दौर में खेल की हैसियत पूछे जाने पर कहा “दिल्ली के कॉमनवेल्थ गेम्स होस्ट करने की वजह से हमे आर्थिक फंडिंग मिली और हमने उसका खूब इस्तेमाल किया।”

साल 2016 में कुछ घटनाओं की वजह से इनकी फॉर्म में गिरावट ज़रूर देखी गई, लेकिन असल खिलाड़ी वही है जो गिर कर उठे और इन्होने ठीक वैसा ही किया। उन्होंने आगे बताया “लेकिन हमने 2016 के बाद वापसी की। 2016 में पहली बार हमारे पास ओलंपिक के चार अलग अलग क्वालिफायर थे।शरत कमल ने मेहनत कर अपने खेल को निखारा और इसी के साथ वे TSV ग्राफ्ल्फिंग के लिए खेलते दिखे और उस तजुर्बे का प्रयोग कर अपने खेलने के तरीके को बेहतर किया। ”

जो सीखा वह सिखाया 

शरत कमल के अनुभव ने युवा खिलाड़ियों को बहुत मदद प्रदान की। साथियान गणानाशेखरन और मनिका बत्रा ने इनके कदमों पर चल अपनी एक अलग जगह बना ली है और यह कहना गलत नहीं होगा कि भारतीय टेबल टेनिस का भविष्य सुरक्षित हाथों में है। 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में जब भारत ने दो गोल्ड मेडल जीत बता दिया कि खेल कोई भी हो, मेहनत और अनुभव बहुत अहम पहलू निभाता है।  

जहां मनिका बत्रा ने वूमेंस सिंगल्स में गोल्ड मेडल जीता वहीं, अचंत शरत कमल ने साथियान गणानाशेखरन, हरमीत देसाई, एंथोनी अमलराज और सनिल शेट्टी के साथ टीम बनाकर गोल्ड पर कब्ज़ा किया।

उसी साल एशियन गेम्स में मेंस टीम और मिक्स्ड टीम ने ब्रॉन्ज़  मेडल जीत अपने फॉर्म को जारी रखा। अब भारत के स्टार खिलाड़ी गणानाशेखरन ने तजुर्बा हासिल कर खुद को भारतीय टेबल टेनिस का संरक्षक बना लिया है। ITTF वर्ल्ड रैंकिंग के टॉप 25 में अपना न शुमार करना साथियान गणानाशेखरन के लिए एक बड़ी उपलब्धि रही। वहीं मानव ठक्कर ने अंडर 21 में टॉप रैंक हासिल कर खेल को नई उड़ान प्रदान की। 

2020 ओलंपिक गेम्स के साल में सभी खिलाड़ियों की नज़रें इसमें अच्छा प्रदर्शन कर मेडल जीतने पर होंगी। यदि टोक्यो 2020 का किला फतह करने में भारतीय खिलाड़ी सफल होते हैं तो वे बहुत बड़ी उपलब्धि गिनी जाएगी और हर खिलाड़ी का नाम त़ाउम्र सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा।

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