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रेस वॉकिंग: सूत्र, नियम और ओलंपिक का इतिहास

विक्टोरियन एरा में शुरू हुआ खेल 1904 ओलंपिक गेम्स से आज तक इस समारोह का अहम हिस्सा बना हुआ है। रेस वॉकिंग के नियम जानें।

लेखक जतिन ऋषि राज ·

जहां ट्रैक एंड फील्ड में भरपूर ऊर्जा की ज़रूरत होती है वहीं रेस वॉकिंग एक ऐसा इवेंट है जहां डिसिप्लिन के साथ चलने और और सटीक होने पर बहुत कुछ निर्भर करता है।

रेस वॉकिंग एक पुराने ज़माने का खेल है या यूं कहें कि यह विक्टोरिया के ज़मीने से चलता आ रहा है। उस समय रईस लोग अपने नौकरों के बीच इसकी प्रतियोगिताएं करवाया करते थे।

इसे पदयात्रा के रूप में लिया जाता था और और 19वीं सदी में इस खेल ने यूनाइटेड स्टेट्स में प्रवेश किया था। उस समय यूएस में प्रतिभागी लगभग 1000 किमी की रेस किया करते थे जो 6 दिनों तक चला करती थी। रेस वॉकिंग पहले सड़कों पर नहीं बल्कि बंद एरीना में की जाती थी। इस खेल में सट्टेबाजी का भी किरदार अहम होता था और बल्कि लोग उस खिलाड़ी पर भी पैसा लगाते थे जो उन्हें लगता था कि सबसे पहले धराशाई हो जाएगा।

मैथ्यू एल्जियो (Matthew Algeo), ‘पेडेसट्रियानिस्म: वाचिंग पीपल वॉक वॉज़ अमेरिकाज़ फेवरेट सपोर्ट’ के लेखक ने NPR को बताया “यह एक अद्भुद प्रदर्शनी है। वहां ब्रास बैंड गाने बजाते हैं, विक्रेता अंडे और अखरोट बेचते हैं। यह एक देखने लायक जगह है।”

यह खेल अब केवल समय व्यतीत करने वाला नहीं रहा और इंग्लैंड ने इसके नियम साझा कर इसे प्रोफेशनल बना दिया।

 रेस वॉकिंग के नियम

खेल के नाम से ही पता चलता है कि प्रतिभागी तेज़ी से वॉक कर फिनिश लाइन को पार करते हैं। हालांकि इस खेल में हर एथलीट को तकनीक के हिसाब से ही दौड़ना पड़ता है। 

रेस वॉकिंग आम दौड़ से अलग है। जहां आम दौड़ या स्प्रिंट में प्रतिभागी तेज़ी से दौड़ता है और उसके दोनों पाँव ज़्यादातर हवा में रहते हैं। वहीं रेस वॉकिंग में हर समय अपर प्रतिभागी का कम से कम एक पाँव ज़मीन पर होना ज़रूरी है। एथलीट की तकनीक एक दम पुष्ट होनी चाहिए ताकि इवेंट में बैठे जज उसे नग्न आँखों से देख सकें। अगर जज इसे ठीक से नहीं देख पाए तो प्रतिभागी के खाते में पेनल्टी आ जाती है।

कनाडा के रेस वॉकिंर और ओलंपियन इनाकी गोमेज़ (Inaki Gomez) ने स्टार से बात करते हुए कहा “आपकी आँख हर उस चीज़ को देख सकती है जो 0.6 सेकंड से धीरे है, तो ऐसे में सबसे तेज़ लिफ्ट करने वाले एथलीट को फायदा मिल जाता है और उसकी त्रुटी कभी-कभी जज से पकड़ी नहीं जाती। ऐसे में कम से कम जोखिम लिए एक एथलीट ज़्यादा से ज़्यादा फायदा उठा सकता है।”

इस रेस का अगला नियम यह है कि एथलीट की जो टांग आगे है उसका घुटना मुड़ना नहीं चाहिए और पूरी टांग सीढ़ी करते हुए ही उसे अपने शरीर का वज़न खींचना होता है। हर रेस वॉकर पर पुख्ता नज़र रखी जाती है और अगर जज एथलीट के घुटने को मुड़ा हुआ देखते हैं तो उन पर पेनल्टी लगा देते हैं।

 इवेंट के अनुसार जज 5 से 9 के बीच में नंबर देते हैं और वह नग्न आँखों से ही आश्वासन भी लेते हैं। ‘आँखों से संपर्क न हो पाना’ और ‘घुटने का मुड़ना’ यह दो वाजाहें हैं जिनसे जज प्रतिभागी पर पेनल्टी डाल सकते हैं।

इसके आलावा अगर किसी एथलीट को अलग अलग जजों द्वारा तीन वार्निंग कार्ड मिल जाते हैं और अगर उसमें चीफ जज भी होता है तो उस एथलीट को डिसक्वालिफाई कर दिया जाता है।

ऑस्ट्रेलिया के एडिलेड में हुई 20किमी रेस वाकिंग चैंपियनशिप 2019

स्टैण्डर्ड रेस वॉकिंग इवेंट 3000 मीटर, 5000 मीटर (इनडोर) होते हैं और 5000, 10,000, 20,000 और 50, 000 मीटर रेस को बंद ट्रैक पर आयोजित किया जाता है। इसके आलावा 10, 20, 50 किमी रेस को सड़क पर दौड़ा जाता है।

ओलंपिक में रेस वॉकिंग

रेस वॉकिंग ने ओलंपिक में डेब्यू 1904 में किया था। उस समय इस इवेंट को ‘ऑल-अराउंड चैंपियनशिप’ से मिला दिया गया था जिसे आज डिकैथलॉन के एक संस्करण के रूप में जाना जाता है।

इसके बाद व्यक्तिगत तौर पर इस खेल ने 1908 लंदन गेम्स के दौरान डेब्यू किया और उस समय यह केवल मेंस इवेंट हुआ करता था। उस समय इसकी दूरी 3500 मीटर और 10 मील हुआ करती थी।

1912 समर ओलंपिक में 10 किमी वॉक को डाला गया और 50 किमी लॉन्ग-डिस्टेंस रेस ने अपना डेब्यू 1932 लॉस एंजेलिस के दौरान किया।

वहीं शोर्ट वर्ग में 20 किमी को 1956 ओलंपिक गेम्स में स्थापित करवाया गया और यह कदम भी सफल रहा।

रियो 2016 में वूमेंस 20किमी वॉक में चीन की ज़ूज़ी लु 

1992 बार्सिलोना गेम्स में महिलाओं के इवेंट को भी जोड़ दिया गया। इस बार रेस को 10 किमी किया गया और आगे चलकर सिडनी 2000 में इसे बढ़ाकर 20 किमी कर दिया गया।

फिलहाल ओलंपिक गेम्स में इस खेल को 20 किमी शोर्ट डिस्टेंस और 50 किमी लॉन्ग डिस्टेंस में खेला जाता है इस लम्बी रेस में केवल पुरुष हिस्सा लेते हैं।

रेस वॉकिंग में पहला ओलंपिक गोल्ड मेडल

ब्रिटिश एथलीट जॉर्ज लार्नर (George Larner) ने रेस वॉकिंग मेंस इवेंट में पहला गोल्ड मेडल जीता था। यह कारनामा उन्होंने 1908 लंदन गेम्स के दौरान 10 मील वर्ग में जीता था। इतना ही नहीं, बल्कि लार्नर ने 3500 मीटर में भी गोल्ड मेडल पर पाने नाम की मुहर लगाई थी। 

चार साल के बाद स्टॉकहोल्म में कनाडा के जॉर्ज गूल्डिंग (George Goulding) ने 10 किमी वॉक में दुनिया का पहला ओलंपिक गोल्ड हासिल किया।

50 किमी रेस वॉक का डेब्यू 1932 लॉस एंजेलिस गेम्स में कराया गया था और उस संस्करण में ब्रिटेन के टॉमी ग्रीन (Tommy Green) ने गोल्ड मेडल हासिल कर इस इवेंट की सफलता में चार चांद लगा दिए थे। वहीं दूसरी ओर सोवियत यूनियन के लियोनिड स्पिरिन (Leonid Spirin) ने 1956 में 20 किमी वर्ग में पहला गोल्ड मेडल जीता था। 

वुमेंस रेस में चीन की चेन युइंगिंग (Chen Yueling) ने 10 किमी वर्ग में पहला गोल्ड मेडल जाता था। यह कारनामा उन्होंने साल 1992 में किया था। इतना ही नहीं बाकि वांग लिपिंग (Wang Liping) ने वुमेंस 20 किमी में पहला गोल्ड हासिल कर अपने होने का प्रमाण पेश किया था। यह कीर्तिमान उन्होंने 2000 में पूरा किया था।

रणजीत सिंह (Ranjit Singh) पहले भारतीय एथलीट बनें जिन्होंने ओलंपिक रेस वॉकिंग में हिस्सा लिया था ऐसा उन्होंने 1080 मास्को गेम्स में किया था। 20 किमी वर्ग अमिन खेते हुए उन्होंने सम्मान जनक 18वां पायदान भी हासिल किया था जिस पर आज तक पूरा भारत वर्ष गर्व करता है।