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एक मुलाक़ात अनन्या कंबोज के साथ: 16 वर्षीय फ़ुटबॉलर जिनका मक़सद है खेल के ज़रिए भारतीय महिलाओं को मज़बूत बनाना 

कंबोज ‘फ़ुटबॉल फ़ॉर फ़्रेंडशिप’ नामक पहल में बेहद सक्रिय हैं, जो फ़ुटबॉल के माध्यम से समानता जैसे मूल्यों को बढ़ावा देने की एक पहल है। 

लेखक सैयद हुसैन ·

ज़रा सोचिए जब आप 13 साल के थे। आपने युवा अवस्था में प्रवेश की किया था। स्कूल जाया करते थे, अपने टेस्ट के लिए तैयार हुआ करते थे और दोस्तों के साथ खेला करते थे। आपके प्लान में किसी तरह की कोई ‘फ़ुटबॉल फ़ॉर फ़्रेंडशिप’ जैसी पहल के साथ जुड़ना नहीं था।

और इसलिए ही अनन्या कंबोज (Ananya Kamboj) दूसरों से काफ़ी अलग हैं।

2017 में 8वीं कक्षा में पढ़ रही कम्बोज ने मिशन इलेवन मिलियन के लिए फुटबॉल को बढ़ावा देने के बारे में एक निबंध लिखा था। और ये अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) द्वारा भारत में फुटबॉल को लोकप्रिय बनाने के लिए चलाए गए एक अभियान के तहत था, जब देश ने उस साल फीफा अंडर -17 पुरुष विश्व कप (FIFA U-17 Men’s World Cup) की मेज़बानी की थी।

कंबोज को इसके लिए न सिर्फ़ हर तरफ़ से सराहना मिली बल्कि ‘फ़ुटबॉल फ़ॉर फ़्रेंडशिप’ (F4F) में उन्हें युवा पत्रकार के तौर पर प्रवेश भी मिल गया था।

F4F 2013 में रूस स्थित गज़प्रॉम इंटरनेशनल द्वारा नौ सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई एक पहल है: दोस्ती, समानता, निष्पक्षता, स्वास्थ्य, शांति, भक्ति, जीत, परंपराएं और सम्मान।

अनन्या कंबोज के लिए एक शानदार अवसर था जिसका उन्होंने दोनों हाथों से फ़ायदा भी उठाया।

ओलंपिक चैनल के साथ बातचीत में कंबोज ने कहा, “बाजार में मिशन इलेवन मिलियन के पोस्टर पर मेरी नज़र पड़ी और मुझे एक दिलचस्प कहानी लिखने का विचार आया कि कैसे एक फुटबॉल मैच ने ईरान और अमेरिका के बीच बेहतर दोस्ती को बढ़ावा दिया।“

दिल जीतने वाली इस कहानी ने कंबोज को F4F का टिकट भी दिला दिया, जहां उन्हें एक युवा पत्रकार के तौर पर फ़ुटबॉल मैचों की रिपोर्ट लिखनी थी।

किसी भी युवा के लिए ये किसी सपने से कम नहीं था, और कंबोज की भी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था जो ख़ुद एक फ़ुटबॉल खिलाड़ी भी थीं। वह स्थानीय क्लब पंजाब एफ़सी (Punjab FC) की ओर से खेलती थीं। वह दिग्गज लियोनेल मेसी (Lionel Messi) की बहुत बड़ी फ़ैन हैं और वह जर्मन क्लब एफ़सी शाल्के (FC Schalke) का समर्थन करती हैं।

“वह अनुभव बेहद लाजवाब था। मैंने कई देशों के नए दोस्त बनाए, उनकी संस्कृति और परंपराओं के बारे में सीखा, और फ़ुटबॉल के बारे में भी बहुत कुछ सीखा।“

महज़ 16 साल की उम्र में अनन्या कंबोज एक लेखक भी हो गई हैं, उन्होंने अपनी पहली किताब ‘माई जर्नी फ़्रॉम मोहाली टू सेंट पीट्सबर्ग’ (My Journey from Mohali to St. Petersburg) प्रकाशित की, जिसमें उनके अनुभवों पर आधारित 21 कहानियां हैं। ये किताब 2018 FIFA मेंस वर्ल्ड कप के मौक़े पर लॉन्च हुई थी।

“ये किताब मेरे अनुभवों के बारे में है और राजनीतिक संबंधों के बारे में भी है और वे फुटबॉल के माध्यम से कैसे सुधारे जाते हैं और नौ मूल्य जो इसे होने में सक्षम बनाते हैं।"

इस साल, उनकी 10 वर्षीय बहन अहाना कंबोज (Aahana Kamboj) भी F4F के साथ शामिल थीं और उन्हें भी इस कार्यक्रम के लिए एक युवा पत्रकार के रूप में चुना गया था।

अनन्या कंबोज भले ही फ़ुटबॉल की एक ग्लोबल एंबेसेडर हो सकती हैं, लेकिन वह भारत में खेल की शक्ति का उपयोग करने के लिए भी उतनी ही उत्सुक हैं।

‘स्पोर्ट्स टू लीड’

फ़िलहाल अनन्या पंजाब के मोहाली में 11वीं कक्षा की छात्रा हैं, और अनन्या अपनी पढ़ाई के साथ साथ एक पत्रकार भी बनना चाहती हैं। वह एक ‘स्पोर्ट्स टू लीड’ नाम से सोशल पहल भी चलाना चाहती हैं।

उनके इस प्रोजेक्ट की शुरुआत अगले साल फ़रवरी या मार्च तक होने की संभावना है, जिसका मक़सद खेल के ज़रिए देश में महिलाओं का सशक्तिकरण है।

“मैं इस पहल के माध्यम से महिलाओं को उनकी क्षमता का एहसास कराने में मदद करना चाहती हूं। मैंने देखा है कि हमारे देश में महिलाओं को पुरुषों के समान अवसर नहीं मिलते हैं। मैं उनके जीवन स्तर में सुधार करना चाहती हूं और मुझे उम्मीद है कि स्पोर्ट्स टू लीड के ज़रिए इस भेदभाव के मामले में लैंगिक अंतर को कम किया जा सकेगा।“

इसमें वर्चुअल ऑनलाइन कार्यशालाओं के माध्यम से युवा लड़कियों और महिलाओं के लिए नेतृत्व प्रशिक्षण और जीवन कौशल में सत्र आयोजित किया जाएगा।

अपनी बात को ख़त्म करते हुए अनन्या कंबोज ने कहा, “मेरा मानना ​​है कि खेल देश में महिलाओं के लिए एक करियर विकल्प होगा और खेल के माध्यम से उनका भविष्य अच्छा होगा”

प्रमुख तस्वीर: अनन्या कंबोज/ट्विटर