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इतिहास रचने से पहले “मैं टूट गई थी”: अंजू बॉबी जॉर्ज

पेरिस की यात्रा के दौरान भारतीय लॉन्ग जम्प की दिग्गज को पता था कि कोच बॉबी जॉर्ज उन्हें उनके जीवन की सबसे मुश्किल परीक्षा के लिए तैयार कर रहे थे।

लेखक रितेश जायसवाल ·

अंजू बॉबी जॉर्ज (Anju Bobby George) भले ही एथेंस 2004 के ओलंपिक खेलों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देते हुए पांचवें स्थान पर रहीं, लेकिन जल्द ही विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उसने पदक जीतने वाली एकमात्र भारतीय होने का गौरव हासिल किया। ओलंपिक के जैसे ही यह भी एक बड़ी प्रतियोगिता थी।

पेरिस में 2003 के संस्करण में केरल की एथलीट ने भारत को पहली बार विश्व चैंपियनशिप पदक दिलाने के लिए लंबी छलांग लगाई थी। लेकिन इस सफलता को हासिल करने की अंजू बॉबी जॉर्ज की यात्रा काफी मुश्किल रही।

उस दौर के बेहतरीन लॉन्ग जंपरों में से एक के मार्गदर्शन में वर्ल्ड की तैयारी करते हुए माइक पावेल और अंजू बॉबी जॉर्ज ने यूएसए में करीब दो महीने तक साथ में समय बिताया। इसके बाद उन्होंने यूरोप की यात्रा की, जहां सबसे बड़ी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने से पहले अंजू ने कुछ ग्रां प्री इवेंट में भी हिस्सा लिया।

'मैं टूट गई थी'

विश्व रिकॉर्ड धारक के साथ प्रशिक्षण लेने और कुछ ग्रां प्री इवेंट में शामिल होने के बाद भारतीय एथलीट की तैयारी में सहायता मिलने की उम्मीद की गई थी, लेकिन इस जद्दोजहद के दौरान अंजू को काफी मुश्किल का सामना करते हुए देखा गया।

भारतीय दिग्गज ने ओलंपिक चैनल को बताया, “माइक (पॉवेल) के साथ प्रशिक्षण करना बहुत मुश्किल था। भारत में मुझे जो कुछ भी करने की आदत थी यह उससे काफी अलग था। हम सूरज के तले दिनभर ट्रेनिंग किया करते थे।”

फ्रांस की गोल्ड मेडल विजेता यूनिस बार्बर और रूस की सिल्वर मेडल विजेता टाटयाना कोटोवा के साथ भारत की अंजू बॉबी जॉर्ज।

"इसलिए प्रशिक्षण, प्रतियोगिता और फिर यात्रा, ये सबकुछ एक साथ होना मुझ पर दबाव डाल रहा था। मेरे शरीर को इस तरह के परिश्रम की आदत नहीं थी। मैं वास्तव में थकी हुई थी और कई बार चलने या खाने के लिए संघर्ष करती थी।”

अंजू और उनके कोच के साथ ही साथ पति बॉबी जॉर्ज (Bobby George) ने वर्ल्ड से आगे की प्रतियोगिताओं के लिए स्पेन को अपना आधार बनाया। लेकिन सावधानी के साथ की गई उनकी तैयारी के बावजूद दोनों को मैड्रिड में एक और चुनौती का सामना करना पड़ा।

अंजू बॉबी जॉर्ज ने कहा, “हम हीटवेव के लिए तैयार नहीं थे। यह वास्तव में बुरा था। इससे मेरी परेशानी और भी बढ़ गई। मुझे अच्छी तरह याद है, हमारे पास वर्ल्ड के लिए जाने में महज़ तीन सप्ताह का समय ही बाकी था और मैं बहुत बुरी स्थिति में पहुंच गई थी।”

उन्होंने याद करते हुए आगे कहा, "हमने कुछ डॉक्टरों से सलाह ली और सभी ने एक ही सलाह दी कि आराम करो... अब किसी भी प्रतिस्पर्धा में हिस्सा नहीं लो। मैं टूट सी गई थी। विश्व चैंपियनशिप वह मंच था, जिसके लिए मैं सिडनी ओलंपिक में हिस्सा न ले पाने के बाद से तैयारी कर रही थी और उस वक्त मैं मुश्किल से चल पा रही थी। मेरा शरीर एक गेंद की तरह सूज गया था।”

चीजें हताशा से भरी हुईं लग रही थीं। लेकिन उनके पति बॉबी जॉर्ज के पास एक उपाय था।

अंजू बॉबी जॉर्ज ने 2003 वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप से पहले माइक पॉवेल के साथ प्रशिक्षण लिया।

पेरिस में दो सप्ताह का समय

वह अंजू को 2003 की विश्व चैंपियनशिप में प्रतिस्पर्धा करते हुए देखना चाहते थे और बॉबी के अंदर के कोच ने पेरिस की इस जरूरी यात्रा के लिए अंजू को ले जाने का फैसला किया।

अंजू बॉबी जॉर्ज ने याद करते हुए कहा, “उनका कहना था कि हम इतनी दूर तक आए हैं, हमें कम से कम शहर की घूम लेना चाहिए।”

"हालांकि शुरू में मुझे यह मूर्खतापूर्ण लगा, लेकिन हम पेरिस के लिए आगे बढ़े। मेरे अनुसार यह एक छुट्टियों वाली यात्रा के जैसे थी।”

जब फ्रांस की राजधानी में इस युगल ने शोर से दूर कुछ दिन बिताए तो अंजू बॉबी जॉर्ज को पेरिस वर्ल्ड्स में अपने इवेंट के लिए एक बार फिर हिम्मत जुटाने में मदद मिली।

राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक ने याद करते हुए कहा, “मुझे याद है वह मुझे आराम करने और बाहर न निकलने के लिए कहता। यह लगभग दो सप्ताह तक जारी रहा।”

अंजू को इस बारे में बहुत कम ही जानकारी थी कि बॉबी उनके आराम करने के दौरान प्रतियोगिता स्थल पर जाकर सभी चीज़ें सुव्यवस्थित करने का काम करेगा।

पेरिस में दो सप्ताह में इस जोड़े ने शहर घुमने पर बहुत कम ही ध्यान दिया। मुख्य उद्देश्य तो अंजू को प्रतियोगिता के लिए तैयार करने पर था। इस बीच बॉबी ने थोड़ी गर्मजोशी के लिए अपनी साथी को हल्की जॉगिंग करने के लिए धक्का देना जारी रखा।

अंजू ने कहा, “मैं थोड़ा हैरान थी जब उसने मुझे जॉगिंग करने के लिए बाहर निकलने को कहा। मुझे नहीं पता नहीं था कि वर्ल्ड का सपना अभी भी जारी था। यह सच में मेरे लिए काम कर गया, क्योंकि इसने मुझे यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि मैं वर्ल्ड के बारे में या दबाव के बारे में ज्यादा चिंता न करूं। मेरे लिए, मैं प्रतिस्पर्धा में हिस्सा नहीं ले रही थी।”

कोच की ध्यान बांटने वाली रणनीति अंजू बॉबी जॉर्ज के लिए काम कर गई और इसने उन्हें महिलाओं की लम्बी कूद के लिए फिर तैयार कर दिया था।

भारतीय ने शुरुआती दौर में 6.59 मीटर की अच्छी छलांग लगाई और विश्व एथलेटिक्स के फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। इसके बाद मेडल राउंड के दौरान भी एक समस्या उत्पन्न हुई, जिसने उनकी इस सफलता को और भी अधिक दिलचस्प बना दिया।

अंजू बॉबी जॉर्ज के पांचवें प्रयास ने उन्हें 2003 वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में मेडल जीतने में मदद की। 

गायब हुए चेक मार्क

इटली की पूर्व चैंपियन फियोना मे (Fiona May) एक बड़ी स्थानीय उम्मीदवार थीं और अंतिम स्वर्ण पदक विजेता यूनिस बार्बर और रूस की तात्याना कोतोवा के साथ अंजू बॉबी जॉर्ज को पता था कि उन्हें पदक जीतने के लिए कुछ खास करने की जरूरत होगी।

भारतीय ने पहले प्रयास में 6.61 मीटर की छलांग के साथ अच्छी शुरुआत की, जिससे उन्हें शीर्ष स्थान पर पहुंचते हुए देखा गया। लेकिन अगले दो प्रयासों में हुए फाउल ने उन्हें परेशान कर दिया।

भारतीय ट्रैक एंड फील्ड स्टार ने याद करते हुए कहा, "जब तक दूसरी छलांग लगाती, यूनिस बारबर और तात्याना कोतोवा आगे बढ़ गईं थीं। और जब चौथी छलांग लगाई गई तो जेड जॉनसन (ग्रेट ब्रिटेन की एथलीट) भी आगे निकल गई थी।”

लेकिन नतीजे सामने आने से पहले एक परेशानी का सामना करना अभी भी बाकी था।

जैसे ही महिला एथलीट अपने पांचवें प्रयास के लिए आगे बढ़ीं, अंजू बॉबी जॉर्ज सहित कई ने देखा कि चेक के निशान (एक एथलीट को कदम सही करने में मदद करने के लिए रनवे के साथ-साथ बिंदुओं पर रखे गए) हटा दिए गए थे।

अंजू ने समझाते हुए बताया, “मैं पूरी तरह हिल गई थी। चेक मार्क बहुत ही जरूरी होते हैं। एक आपकी शुरुआत के लिए, फिर आपकी एक लंबी दूरी के लिए और ऐसे ही कई अन्य। उन्हें जाने बिना अच्छी छलांग लगा पाना वाकई काफी मुश्किल होता है।”

“सबसे पहले फियोना ने ही बताया था कि चेकमार्क गायब हैं। उसने किसी तरह खुद को संभाला और अपनी छलांग लगाई। लेकिन तभी लाल झंडी दिखाई गई और वह प्रतियोगिता से बाहर हो गई।

अंजू ने आगे स्पष्ट करते हुए कहा, “तब मैंने स्टार्टिंग एरिया पर जाकर देखा तो मेरे चेकमार्क भी गायब थे। लेकिन मैंने अपनी शुरुआत को चिह्नित करने वाले क्षेत्र से कुछ दूरी पर एक तौलिया रख दिया था, ताकि उससे मुझे मदद मिल सके।”

लेकिन फिर प्रतियोगिता के दौरान अंजू ने पेरिस में स्थितियों को समायोजित करने के लिए अपने चेक मार्क को फिर से व्यवस्थित किया।

उस तौलिया ने उनकी परेशानी को दूर करने में काफी मदद की। हालांकि यह सटीक स्थान नहीं था। आखिरकार अंजू ने अपनी दौड़ को समाप्त किया, जिसके बारे में उनका मानना है कि उसकी छलांग में कुछ दूरी का अंतर जरूर आया होगा।

अंजू ने कहा, “मैं इस दौड़ के दौरान अपने दूसरे मार्कर तक नहीं पहुंच सकी, जहां मैं पहुंचना चाहती थी और इससे मेरे प्रदर्शन पर काफी प्रभाव पड़ा था। मेरे घुटने टकरा गए और मेरी लय नहीं बन पाई। जिसकी वजह से जम्प के दौरान मेरी उड़ान एकदम सपाद हो गई।”

विचलित अंजू बॉबी जॉर्ज ने बाहर आने से पहले निराशा में अपना चेहरा झुका लिया। वह सोच रही थीं कि विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने से चूक गईं।

लेकिन भाग्य को कुछ और ही मंजूर था। जेड जॉनसन अपनी अंतिम कूद सही से नहीं कर पाईं, जिसके चलते अंजू बॉबी जॉर्ज अपने पांचवें प्रयास में 6.70 मीटर की लंबी छलांग लगाकर विश्व चैंपियनशिप पदक जीतने में कामयाब रहीं।

आज भी अंजू बॉबी जॉर्ज विश्व एथलेटिक्स में पदक जीतने वाली एकमात्र भारतीय बनी हुई हैं।