टोक्यो 2020 में पदक पर निशाना लगाना है अंजुम मोदगिल का लक्ष्य

इस साल होने वाले टोक्यो ओलंपिक में भारतीय शूटर्स में पदक की प्रबल दावेदारों में से एक हैं अंजुम मोदगिल।

टोक्यो 2020 में जाने वाला भारतीय शूटिंग दल इस बार सबसे बड़ा और सबसे शक्तिशाली होने की पूरी उम्मीद है, और इसलिए ही शूटिंग में इस बार भारतीय फ़ैंस को एक से ज़्यादा पदकों की आस है। इस आस की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी भारत की प्रतिभाशाली शूटर अंजुम मोदगिल के कंधों पर भी है।

तेजस्विनी सांवत के बाद वर्ल्ड चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली अंजुम 10 मीटर एयर राइफ़ल और 50 मीटर राइफ़ल 3-पोजिशन कैटेगिरी में दक्ष हैं।

2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में महिलाओं की 50 मीटर राइफ़ल 3-पोजिशन में रजत पदक पर कब्ज़ा जमाने वाली अंजुम मोदगिल
2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में महिलाओं की 50 मीटर राइफ़ल 3-पोजिशन में रजत पदक पर कब्ज़ा जमाने वाली अंजुम मोदगिल2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में महिलाओं की 50 मीटर राइफ़ल 3-पोजिशन में रजत पदक पर कब्ज़ा जमाने वाली अंजुम मोदगिल

शूटिंग में अपने नाम का डंका बजवाने वाली मोडगिल एक बेहतरीन टेनिस खिलाड़ी भी रह चुकी हैं, साथ ही साथ वह एक ख़ूबसूरत पेंटर भी हैं, उनके बनाए गए चित्रों की मांग कला प्रेमियों के बीच काफ़ी है।

सुबह को देखकर ही हो जाता है शाम का अंदाज़ा

मोडगिल का जन्म 5 जनवरी 1994 को भारत के चंडीगढ़ में हुआ था, और बेहद कम ही उम्र में उनकी शूटिंग की चाहत सभी के सामने आ गई थी। 2011 में दिल्ली में आयोजित हुई नेश्नल शूटिंग चैंपियनशिप में उन्होंने अपने स्कूल सैक्रेड हार्ट सीनियर सेंकडरी स्कूल को तब गर्व का मौक़ा दिया था जब मोडगिल ने 9 पदक हासिल किए थे, इनमें 2 स्वर्ण, 3 रजत और 4 कांस्य पदक शामिल थे।

उस वक़्त 11वीं कक्षा में पढ़ रही 17 वर्षीय मोडगिल ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बात करते हुए कहा था, ‘’ये काफ़ी चुनौतीपूर्ण था, लेकिन कुछ पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। मुझे दूसरा रैंक आया है, और मैं ओलंपिक में भी हिस्सा लेना चाहती हूं।‘’

जब दिमाग़ में बैठ गई बात

अब टोक्यो 2020 का कोटा हासिल करने के बाद उन्होंने अपनी उस ख़्वाहिश को पूरा कर लिया है। शूटिंग के साथ साथ मोडगिल पढ़ाई में भी अव्वल थीं, और यही वजह है कि उन्होंने खेल मनोविज्ञान में मास्टर की डिग्री भी हासिल कर ली है।

मोडगिल मानती हैं कि उनके शूटिंग करियर में अच्छी पढ़ाई का भी योगदान रहा है, ‘’मेरे लिए महत्वपूर्ण ये रहा कि मैंने जाना और परखा कि एक कोच और खिलाड़ी का रिश्ता क्या होता है। और साथ ही साथ आप दबाव और चोट से अपने आप को कैसे बचा सकते हैं।‘’ स्पोर्ट्स स्टार के साथ बातचीत के दौरान मोडगिल ने उपरोक्त बातें कहीं।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बिखेरी चमक

मोडगिल के लिए पहली अंतर्राष्ट्रीय क़ामयाबी तब हासिल हुई थी जब उन्होंने गुवाहाटी में आयोजित 2016 साउथ एशियन गेम्स में दो गोल्ड मेडल हासिल किए। मोडगिल ने 50 मीटर राइफ़ल 3-पोजिशन के व्यक्तिगत और टीम इवेंट में ये पदक जीते थे।

अगले ही साल ऑस्ट्रेलिया के ब्रिसबेन में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भी पहली बार मोडगिल ने शिरकत करी, जहां उन्होंने 10 मीटर एयर राइफ़ल में रजत और 50 मीटर राइफ़ल प्रोन में कांस्य पदक जीता।

वह साल जहां से मोडगिल के सपने को मिला आकार और हासिल हुआ ओलंपिक का कोटा

साल 2018 में मोडगिल अपनी क़ामयाबी को और भी बुलंदियों पर ले गईं और कई बड़ी ट्रॉफ़ियां जीती। उस साल हुए गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में 50 मीटर एयर राइफ़ल 3-पोजिशन में रजत पदक जीतते हुए उन्होंने सीडब्लूजी के क्वालिफ़ाइंग राउंड का रिकॉर्ड भी तोड़ डाला था।

इसके एक महीने बाद सितंबर में साउथ कोरिया के चांगवोन में आयोजित हुई आईएसएसएफ़ वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप के 10 मीटर एयर राइफ़ल में मोडगिल ने रजत पदक जीता। ये एक ओलंपिक क्वालिफ़ाइंग इवेंट भी था, लिहाज़ा वह टोक्यो 2020 का कोटा हासिल करने वाली पहली भारतीय शूटर बन गईं थीं।

दूसरे भारतीय दिग्गज शूटर्स अपूर्वी चंदेला और मेहुली घोष के साथ मोडगिल ने इसी चैंपियनशिप में 10 मीटर एयर राइफ़ल टीम इवेंट का रजत पदक भी अपने नाम किया।

अब है बड़ी उम्मीद?

ओलंपिक के एक साल पहले यानी 2019 में मोडगिल के सिर और भी कई क़ामयाबी के ताजों ने शोभा बढ़ाई, उन्होंने म्यूनिक और बीजिंग में हुए आईएसएसएफ़ वर्ल्ड कप के 10 मीटर एयर राइफ़ल कैटेगिरी में स्वर्ण पदक हासिल किए।

अब जब आने वाले जुलाई में टोक्यो 2020 की शुरुआत होगी, तो भारतीय खेल प्रेमियों की नज़र अंजुम मोदगिल पर रहेगी। क्योंकि अब मोडगिल के न सिर्फ़ सैक्रेड हार्ट स्कूल के दोस्त ही फ़ैन्स हैं बल्कि पूरा देश इस प्रतिभाशाली शूटर का फ़ैन हो चुका है। मोडगिल जिस तरह दबाव और विपरित परिस्थितियों में भी शांत दिमाग़ से अपने लक्ष्य पर निशाना लगाने के लिए जानी जाती हैं, उसे देखते हुए तो यही लगता है कि देश की ये बड़ी उम्मीद अपने फ़ैन्स को नहीं करेगी निराश।

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