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बैडमिंटन रैकेट की लंबाई, चौड़ाई, उसके स्ट्रिंग्स का आकार और वो सबकुछ जो आपको जानना चाहिए

शौकिया खिलाड़ियों के लिए रैकेट के विभिन्न आकार उपलब्ध हैं लेकिन पेशेवर खिलाड़ियों को बैडमिंटन रैकेट के कुछ विशेष नियमों का पालन करना पड़ता है।

लेखक विवेक कुमार सिंह ·

बैडमिंटन एशिया में और यूरोप के कुछ हिस्सों में युवाओं के बीच खेले जाने वाला एक लोकप्रिय खेल है।

बैडमिंटन रैकेट (Badminton Racket) या रैकेट, बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (Badminton World Federation) का आधिकारिक शब्द है, एक आसान और हल्के उपकरण से बैडमिंटन को बनाया जाता है।

जबकि शौकिया खेल के लिए बैडमिंटन रैकेट अलग अलग लंबाई वाले आकार होते हैं, पेशेवर बैडमिंटन खिलाड़ियों को एक निश्चित लंबाई और चौड़ाई के रैकेट का उपयोग करना पड़ता है।

BWF द्वारा निर्धारित निर्देशों पर एक नज़र

बैडमिंटन रैकेट के पांच प्रमुख भाग हैं – तार वाला एरिया, हेड, थ्रॉट, शाफ़्ट और हैंडल। इन सबको मिलाने पर एक संपूर्ण रैकेट तैयार होता है।

फ्रेम की अधिकतम लंबाई 680 मिमी हो सकती है, जबकि पूरी चौड़ाई 230 मिमी तक सीमित है।

स्ट्रिंग क्षेत्र 

ये वो एरिया होता है, जिससे खिलाड़ी शटल कॉक को हिट करते हैं या उन्हें उसी एरिया से शटल को हिट करना होता है।

BWF नियम ये निर्धारित करते हैं कि स्ट्रिंग एरिया समतल होना चाहिए, और उनके बुनाई ऐसी होनी चाहिए कि जब एक तार दूसरे के साथ गुजरे तो वो ऊपर-नीचे हो।

स्ट्रिंग पैटर्न एक समान होने चाहिए और वो ज्यादा घने या ज्यादा दूर भी न हों। जिससे शटल को हिट करने के बाद उसमें तनाव उत्पन हो।

स्ट्रिंग की लंबाई 280 मिमी से अधिक नहीं होनी चाहिए, जबकि चौड़ाई 220 मिमी के भीतर बनाए रखने की आवश्यकता होती है।

हेड

जिस एरिया में तारों से बुनाई होती है वो बैडमिंटन रैकेट का प्रमुख हिस्सा होता है, जिसे हेड कहा जाता है।

रैकेट के हेड का आकार आम तौर पर अंडाकार होता है - जिसका उपयोग पेशेवर खिलाड़ियों द्वारा किया जाता है जो आमतौर पर अपने शॉट्स पर अधिक शक्ति लगाना पसंद करते हैं।

हालाँकि, इसका एक और आकार होता है, जिसे 'आइसोमेट्रिक हेड' कहा जाता है - जिसका अर्थ है कि रैकेट ऊपर से चौड़ा है।

आइसोमेट्रिक हेड के आकार वाले रैकेट में एक बीच में ऐसी जगह होती है, जहां रैकेट के टकराने पर खिलाड़ी बेहतर अनुभव करता है। ज्यादातर खिलाड़ी चाहते हैं कि वो उसी स्थान से शटल को मारें। हालांकि, ये आम तौर पर शौकिया बैडमिंटन खिलाड़ियों द्वारा उपयोग किया जाता है। पेशेवर खिलाड़ी इसका उपयोग नहीं कर सकते हैं।

थ्रॉट

ये रैकेट का वो हिस्सा है जो सिर को शाफ्ट से जोड़ता है। इससे रैकेट को स्थिरता मिलती है। हालांकि ये एक वैकल्पिक हिस्सा है, क्योंकि कुछ बैडमिंटन रैकेट सीधे सिर को शाफ्ट से जोड़ते हैं।

ऐसे रैकेट में जिनमें कोई थ्रॉट नहीं होता है, उनमें स्ट्रिंग एरिया को बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, विस्तारित सीमा की अधिकतम चौड़ाई 35 मिमी हो सकती है, जबकि इस दौरान ये भी सुनिश्चित करना चाहिए कि स्ट्रिंग एरिया की कुल लंबाई 330 मिमी से अधिक न हो।

बैडमिंटन रैकेट में हेड को शाफ्ट से जोड़ने वाला थ्रॉट का उपयोग हो भी सकता है और नहीं भी।

शाफ्ट

शाफ्ट रैकेट का वो हिस्सा है जो हैंडल को हेड से जोड़ता है, या कुछ रैकेट्स में हेड को थ्रॉट से जोड़ता है।

शाफ्ट की लंबाई या चौड़ाई के लिए किसी तरह का कोई निर्देश नहीं दिया गया है।

हैंडल

हैंडल रैकेट का वो हिस्सा होता है, जिस हिस्से को खिलाड़ी पकड़ कर रखते हैं। खिलाड़ियों द्वारा पकड़ जाने वाला रैकेट का सबसे निचला हिस्सा सबसे महत्वपूर्ण भाग होता है।

एक खिलाड़ी के लिए आरामदायक पकड़ अक्सर ये दर्शाती है कि खिलाड़ी रैकेट के साथ कितना सहज है और पेशेवर खिलाड़ियों के लिए तो ये उनके मैच का फैसला कर सकता है।

हैंडल की लंबाई या चौड़ाई के लिए कोई निर्देश नहीं हैं, प्रत्येक खिलाड़ी इसे अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप बनवाता है।

इनके अलावा BWF नियम ये भी कहते हैं कि रैकेट को पकड़ने के लिए किसी और उपकरण का प्रयोग नहीं किया जा सकता। उदाहरण के लिए, स्ट्रिंग एरिया में छोटे टेप लगाना, वजन को कम या अधिक करने के लिए किसी चीज की मदद लेना। हैंडल को खिलाड़ी के हाथ सुरक्षित रहने के लिए किसी प्रकार की कोई भी चीज इस तरह उपाय में होना चाहिए, जिससे वो आकार और स्थान में बदलाव न कर सके।

बैडमिंटन रैकेट भी एक निश्चित, लंबाई का होना चाहिए और ऐसे किसी भी उपकरण के साथ जोड़ना नहीं होना चाहिए जो रैकेट के आकार को बदल सकता है।