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आदर्श योगेश्वर दत्त की तरह बजरंग पूनिया की नज़र भी ओलंपिक पदक पर

बजरंग पूनिया ने ओलंपिक 2020 में अपनी जगह सुनिश्चित कर ली है। हालांकि उनके पदकों की संख्या में ओलंपिक पदक की जगह अभी भी अधूरी है, जिसे वह टोक्यो 2020 में हासिल करना चाहेंगे

लेखक ओलंपिक चैनल ·

भारतीय पहलवान बजरंग पूनिया (Bajrang Punia) के पदकों की संख्या, किसी भी नए पहलवान के लिए सपनों का ख़जाना जैसा है। उनकी आलमारी विश्व चैंपियनशिप (World Championships) से लेकर कॉमनवेल्थ गेम्स (Commonwealth Games) तक हर चीज में जीते गए पदक से सुशोभित है। हालांकि, इसमें ओलंपिक पदक की जगह अभी भी अधूरी है, जो इस पदकों की संख्या को और भी शानदार कर सकती है। वहीं, इस दौरान बजरंग पूनिया ने ओलंपिक चैनल से बातचीत की और अपनी ज़िंदगी से जुड़े कई तमाम पहलुओं का बखूबी से ज़िक्र किया।

2018 कॉमनवेल्थ गेम्स के 65 किग्रा भारवर्ग में वेल्स के केन चैरिग को हराकर बजरंग पूनिया स्वर्ण पदक जीतने के बाद जश्न मनाते हुए

बजरंग अगर ओलंपिक टोक्यो 2020 में पदक हासिल करते हैं तो वह अपने आदर्श, 2012 लंदन ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता योगेश्वर दत्त (Yogeshwar Dutt) के बराबरी पर आ जाएंगे। आपको ये भी बता दें कि बजरंग पूनिया ने अपनी स्वेच्छा से 2016 के रियो ओलंपिक (Rio Olympic) में योगेश्वर दत्त को मौका दिया था। और अब उसी 60 किग्रा वर्ग में बजरंग पूनिया टोक्यो 2020 में भारत के लिए पदक जीतने के इरादे से मैट पर उतरेंगे।

बजरंग पूनिया ने ओलंपिक चैनल से बात करते हुए कहा, "मैं कभी नहीं चाहता कि मेरे और योगी भाई (योगेश्वर दत्त) के बीच कोई बात हो और मैं हमेशा उन्हें जीवन में आगे बढ़ते हुए देखना चाहता हूं।" आगे बात करते हुए उन्होंने कहा, "उन्होंने देश के लिए कई पदक जीते हैं और मैं कभी भी उनका मुकाबला नहीं करना चाहता, यहां तक ​​कि ओलंपिक जैसे स्थान में भी नहीं।"

बजरंग, योगेश्वर दत्त के नक्श-ए-कदम पर आगे बढ़े

बजरंग पूनिया को साल 2005 में रेसलिंग कोच वीरेंद्र कुमार के अखाड़े में चुना गया था, ताकि वह मैट पर पेशेवर रूप से प्रशिक्षित हो सकें। जहां, सुनील कुमार और योगेश्वर दत्त जैसे दिग्गज पहलवानों ने भी कुशलता हासिल की। इस दौरान जब बजरंग अपने करियर को संवार रहे थे तो पहलवान योगेश्वर दत्त ने अपने पिता को खो दिया था, लेकिन अपने पिता को खोने और घुटने में चोट के बावजूद उन्होंने 2006 के एशियाई खेलों में 60 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में हिस्सा लिया और कांस्य पदक हासिल किया था।

और इस तरह बजरंग, योगेश्वर दत्त के नक्श-ए-कदम पर आगे बढ़ने लगे। बजरंग पूनिया ने उस पल को याद करते हुए कहा, "जब मैंने गौर किया तो देखा कि उन्होंने कैसे मैट पर कुश्ती की और उसके बाद से उनके पद चिन्हों पर मैं भी चलने लगा, और तब से वह मेरे लिए आदर्श बन गए।" बजरंग पूनिया को साल 2008 में उनके आदर्श योगेश्वर दत्त के साथ छत्रसाल स्टेडियम में साथ खेलने और सीखने का मौक़ा मिला।

पूनिया ने उस लम्बे वक़्त को याद करते हुए कहा, "मैं साल 2008 के उन शुरुआती दिनों में उनका पालन करता था, क्योंकि मैं 42 किग्रा भार वर्ग में कुश्ती कर रहा था, जबकि वह कम उम्र में अपने 60 किग्रा भार वर्ग में कुश्ती करते थे। मैं उनसे चिन-अप और सिट-अप जैसे एक्सरसाइज़ सीखना चाहता था। उस समय मेरा केवल एक ही मकसद रहता था कि मैं उनके आसपास रहकर काफी कुछ सीखूं।"

दीपक पूनिया के लिए बजरंग हैं उनके रोल मॉडल  

आखिरकार इस तरह बजरंग पूनिया ज्यादा से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में हिस्सा लेना शुरु कर चुके थे और खुद का नाम बना चुके थे। पूनिया ने दत्त के साथ प्रशिक्षण लिया, जिन्होंने अपने लिए और आने वाले पूनिया के लिए एक अनौपचारिक गुरु के रूप में अपना कर्तव्य पूरा किया। ।  

बजरंग ने उत्साह से भरे अंदाज में कहा, "साल 2012 में जब मैंने अपने देशवासियों के लिए स्वर्ण पदक जीता था, तो मैंने योगेश्वर भाई के साथ मुक्केबाज़ी का अभ्यास शुरु किया था। वह मेरे मार्गदर्शक के रूप में हैं, अगर मैं कहीं गलत हूं तो वह सही मार्गदर्शन करेंगे। उनका समर्थन आज भी मेरे साथ है।"

वहीं अब बजरंग ओलंपिक पदक जीतने के लिए उत्सुक हैं। इसके साथ ही हरियाणा के झज्जर जिले से एक और युवा पहलवान दीपक पूनिया आते हैं। वह खेल में जब भी किसी दुविधा में आते हैं तो वह बजरंग पूनिया के पास जाते हैं।

जब बजरंग पूनिया से उनके रिश्ते के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "किसी भी एथलीट के लिए अपनी नई यात्रा के दौरान सेट होने से पहले रोल मॉडल ढूँढना उसकी क्वालिटी है। मेरा मानना है कि योगेश्वर दत्त मेरे रोल मॉडल हैं, और आज मैं दीपक के लिए एक रोल मॉडल के रूप में अपने आपको देखते हुए गर्व महसूस कर रहा हूं।"  

अब बजरंग पूनिया के लिए आगे क्या?

पिछले साल 2020 ओलंपिक में अपनी जगह बनाने के बाद बजरंग पूनिया ने नए साल में मिली-जुली शुरुआत की है। सीज़न की फ़र्स्ट रैंकिंग प्रतियोगिता मैटेलो पेलिकोन मेमोरियल (Matteo Pellicone Memorial) में 65 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने के बाद उन्हें एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में (Asian Wrestling Championships) जापान के ताकोतो ओटोगुरो (Japan’s Takuto Otoguro) से हार का सामना करना पड़ा।

वहीं, अब कोरोना वायरस (Coronavirus) के प्रकोप के बाद दुनियाभर में खेल आयोजनों पर रोक लग गई है। बजरंग पूनिया ओलंपिक 2020 में अपना जगह बना चुके हैं, जहां वह बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर रहे होंगे, शायद अपने आदर्श योगेश्वर दत्त के कांस्य पदक से भी ज्यादा।