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कृष्णन से लेकर सानिया और पेस तक: वे खिलाड़ी जिन्होंने टेनिस की दुनिया में फहराया भारत का परचम

भारतीय टेनिस दुनिया में काफी सालों से चमक बिखेर रही है और आज उसी पर रोशनी डालते हैं

लेखक लक्ष्य शर्मा ·

लिएंडर पेस,(Leander Paes) सानिया मिर्जा (Sania Mirza) और महेश भूपति (Mahesh Bhupati) जैसे खिलाड़ियों ने दुनियाभर में सुपरस्टार का दर्जा हासिल किया। यहां तक की भारत में जहां क्रिकेट को धर्म माना जाता है, वहां इन तीनों ने स्टार क्रिकेटर्स जितनी ही लोकप्रियता हासिल की है।

ये तीनों ही खिलाड़ी भारत के स्वर्णिम समय का हिस्सा रहे हैं लेकिन ऐसे कई अन्य सितारे भी हैं, जिन्होंने देश में खेल के भविष्य को बनाने में अपनी भूमिका निभाई है।

यहां भारत के सबसे प्रसिद्ध टेनिस खिलाड़ियों की बात करते हैं।

रामानाथन कृष्णन

आजादी के एक दशक के बाद तक यानी साल 1960 तक भारतीय टेनिस का कारवां शुरू नहीं हुआ था और इसके बाद शुरू हुआ तो इसका पूरा श्रेय रामानाथन कृष्णन (Ramanathan krishnan)  को जाता है। रामानाथन विंबलडन बॉयज़ एकल खिताब जीतने वाले पहले एशियाई खिलाड़ी थे। फाइनल में उन्होंने चार बार के ग्रैंड स्लैम चैंपियन एशले कूपर (Ashley Cooper) को शिकस्त दी थी।

रामानाथन सीनियर लेवल पर अपने इस प्रदर्शन को नहीं दोहरा सके लेकिन तमिलनाडु में जन्मे भारतीय टेनिस खिलाड़ी ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी थे।I

इस खिलाड़ी ने दो बार साल 1960 और 1961 के विंबलडन ओपन के सेमीफाइनल में जगह बनाई। वहीं 1962 के फ्रेंच ओपन के क्वार्टर फाइनल में वह जगह बनाने में सफल रहे, इसके अलावा वह चार बार विंबलडन ओपन के क्वार्टर फाइनल तक पहुंचे थे।

यही नहीं रामानाथन कई सालों तक डेविस कप में भारत के महत्वपूर्ण सदस्य थे, साल 1966 मे उन्होंने टीम को उपविजेता बनाने में अहम भूमिका निभाई।

उनकी कुछ सबसे प्रसिद्ध जीत में 1959 के डेविस कप में महान रॉड लेवर (Rod Laver) और 1961 के विंबलडन क्वार्टर फाइनल में 12 बार के ग्रैंड स्लैम एकल चैंपियन रॉय एमर्सन (Roy Emerson) को शिकस्त देना शामिल है।

वहीं 1966 डेविस कप के फाइनल कप मे ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रामानाथन ने अपने पार्टनर जयदीप मुखर्जी के साथ मिलकर विंबलडन के डबल्स चैंपियन जॉन न्यूकॉम्ब (John Newcombe) और टोनी रोशे (Tony Roche) को हराया था।

विजय अमृतराज

70 और 80 के दशक में विजय अमृतराज भारत के दिग्गज टेनविस खिलाड़ियों में से एक थे।

विजय अमृतराज (Vijay Amritraj) 70 और 80 के दशक में भारत के सबसे उभरते हुए सितारे थे। रामानाथन कृष्णन के रिटामेंट के बाद विजय अमृतराज ने ही भारत का नाम विश्व में रोशन किया।

विजय अमृतराज चार बार ग्रैंड स्लैम सिंगल के फाइनल में पहुंचने में सफल रहे, उन्होंने ये कारनामा दो बार विंबलडन ( साल 1973 और 1981) और दो बार यूएस ओपन ( 1973 और 1974) में किया।

सिंगल खिलाड़ी के तौर पर 15 बार एटीपी टूर का खिताब जीतने वाले इस खिलाड़ी ने कई बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारतीय खिलाड़ी ने 1984 के सिनसिनाटी मास्टर्स में टेनिस आइकन जॉन मैकेनरो (John McEnroe) को हराया तोर ब्योर्न बोर्ग (Björn Borg) के खिलाफ यूएस ओपन में जीत हासिल की।o

वहीं अपने भाई आनंद अमृतराज (Anand Amritraj) के साथ उन्होंने 13 एटीपी टाइटल जीते और 1976 के विंबलडन में वह सेमीफाइनल में पहुंचने में सफल रहे, सेमीफाइनल मुकाबले में उन्हें चैंपियन जोड़ी ब्रायन गॉटफ्रीड (Brian Gottfried) और राउल रामिरेज़ (Raul Ramirez) के हाथों हार झेलनी पड़ी

दोनों अमृतराज भाइयों ने भारत को 1974 और 1987 के डेविस कप के फाइनल में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

रमेश कृष्णन

1986 विंबलडन में खेलते हुए रमेश कृष्णन

रमेश कृष्णन (Ramesh Krishnan) को 1986 के विंबलडन से लोकप्रियता मिली। रामानाथन कृष्णन के बेटे रमेश भी अपने पिता के पदचिन्हों पर चले। जूनियर सर्किट पर उन्होंने 1979 विंबलडन बॉयज टाइटल के अलावा जूनियर लेवल पर फ्रेंच ओपन का खिताब अपने नाम किया।

रमेश कृष्णन ने अपने करियर में आठ एटीपी सिंगल्स खिताब जीते तो वह तीन बार ग्रैंडस्लैम के क्वार्टर फाइनल में पहुंचने में सफल रहे। इस खिलाड़ी ने एक बार 1986 के विंबलडन में और दो बार (साल 1981 और 1987) यूएस ओपन के नॉकआउट में जगह बनाई।

यहीं नहीं भारतीय खिलाड़ी ने एक बहुत ही युवा आंद्रे अगासी (Andre Agassi) को हराकर 1986 में अमेरिका के शेंक्टाडी में एटीपी चैलेंजर खिताब जीता।

1998 में पद्म श्री से सम्मानित होने वाले इस खिलाड़ी ने भारतीय टीम को 1987 के डेविस कप के फाइनल में पहुंचाया।

1992 में बार्सिलोना ओलंपिक में अपने रिटायरमेंट से ठीक एक साल पहले, रमेश कृष्णन ने एक बहुत ही युवा भारतीय टेनिस खिलाड़ी का नाम लिएंडर पेस के साथ जोड़ी बनाई और मेंस डबल्स के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। और यही से भारत को एक और सितारा मिल गया।

लिएंडर पेस

1996 अटलांटा ओलंपिक में लिएंडर पेस का कांस्य पदक जीतना भारतीय टेनिस इतिहास के सबसे सुनहरे पलों में से एक है।

लिएंडर पेस (Leander Paes) का 1996 के अटंलाटा ओलंपिक (Atlanta Olympics) में कांस्य पदक जीतना भारत की सबसे बड़ी जीतों मे शुमार है।

जूनियर यूएस ओपन और विंबलडन ओपन चैंपियन ने साल 1991 में प्रोफेशनल खिलाड़ी के तौर पर टेनिस की दुनिया में कदम रखा।

पांच साल बाद, वह अटलांटा 1996 ओलंपिक खेलों में ब्राजील के खिलाड़ी फर्नांडो मेलिगेनी (Fernando Meligeni) को हराकर एकल कांस्य पदक जीतने के बाद भारतीय टेनिस के पहले मेगास्टार के रूप में उभरे। 

1952 में केडी जाधव के पदक जीतने के बाद समर ओलंपिक में भारत का यह पहला व्यक्तिगत पदक था।

इस खिलाड़ी का करियर भले ही एकल में बड़ी उपलब्धि के साथ शुरू हुआ लेकिन लिएंडर पेस ने युगल खिलाड़ी के रूप में टेनिस हॉल ऑफ फेम में अपनी जगह हासिल की। यहां तक की भारतीय खिलाड़ी ने वर्ल्ड के सबसे सफलतम खिलाड़ियों में अपनी जगह बनाई।

लिएंडर पेस ने 8 मेंस डबल्स खिताब अपने नाम किए हैं, जिनमें विंबलडन (1999), फ्रेंच ओपन (1999, 2001 और 2009), ऑस्ट्रेलियन ओपन (2012) और यूएस ओपन (2006, 2009 और 2013) शामिल है। इसके अलावा मिक्स्ड डबल्स में भी इस खिलाड़ी ने कई मेडल अपने नाम किए हैं। भारतीय खिलाड़ी ने 4 बार विंबलडन (Wimbledon ), तीन बार ऑस्ट्रेलियन ओपन (Australian Open) और दो बार यूएस ओपन (US Open) और एक बार फ्रेंच ओपन (French Open) का खिताब जीता है।j

ये खिलाड़ी साल 1999 में दुनिया का नंबर वन डबल्स टेनिस खिलाड़ी बना और डेविस कप में सबसे अधिक युगल जीत का रिकॉर्ड भी इसी खिलाड़ी के नाम है।

महेश भूपति

भारत की ओर से ग्रैंड स्लैम जीतने वाले पहले टेनिस खिलाड़ी हैं महेश भूपति

महेश भूपति (Mahesh Bhupathi) भारत के पहले ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने ग्रैंडस्लैम टाइटल अपने नाम किया। शुरुआती में महेश भूपति ने लिएंडर पेस के साथ मिलकर कई मेडल्स जीते।

हालांकि महेश भूपति ने अकेले भी भारत का नाम दुनिया में रोशन किया है। महेश भूपति जापान के रिका हीराकिन (Rika Hirakiin) के साथ  1997 फ्रेंच ओपन मिक्स्ड डबल्स का खिताब जीतने के साथ ही  ग्रैंड स्लैम जीतने वाले पहले भारतीय टेनिस खिलाड़ी बने।

1999 से 2001 के बीच महेश भूपति ने पेस के साथ मिलकर तीन ग्रैंड स्लैम खिताब जीते लेकिन इसके बाद उन्होंने खुद को एक महान खिलाड़ी के रूप में साबित किया।

उन्होंने मैक्स मिर्नी के साथ 2002 यूएस ओपन डबल्स का खिताब जीता और इसके साथ ही इस खिलाड़ी ने  8 बार मिक्स्ड डबल्स ग्रैंडस्लैम का खिताब जीता, भूपति ने हर खिताब 2-2 बार जीते हैं।

2004 में एथेंस ओलंपिक में भूपति के पास लिएंडर के पास कांस्य पदक जीतने का मौका था लेकिन भारतीय जोड़ी मारियो एंकिएव (Mario Ančić ) और इवान लजुबीसिएक (Ivan Ljubičić) की क्रोएशियाई जोड़ी से पार नहीं पार सकी। हालांकि इस जोड़ी ने बाद में 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स में एक साथ कांस्य पदक अपने नाम किया।

रोहन बोपन्ना

भारतीय टेनिस खिलाड़ी रोहन बोपन्ना की खेलते हुए तस्वीर।

भारतीय टेनिस खिलाड़ी रोहन बोपन्ना (Rohan Bopanna) भी इस लिस्ट में अपना नाम दर्ज करवाने में कामयाब रहे।

महेश भूपति और लिएंडर पेस के बाद रोहन बोपन्ना ने ही अन्य भारतीय ग्रैंडस्लैम विजेता हैं। इस खिलाड़ी कनाडा के अपने साथी गैब्रिएला डाब्रोव्स्की (Gabriela Dabrowski) को साथ मिलकर साल का फ्रेंच ओपन मिक्स्ड डबल्स इवेंट जीता।

बोपन्ना 2016 रियो ओलंपिक के मिक्स्ड डबल्स इवेंट में सानिया मिर्जा के पार्टनर थे, जहां इस जोड़ी न सेमीफाइनल तक का सफर तय किया। इस भारतीय जोड़ी को कांस्य पदक के मैच में चेक जोड़ी लूसी हेराडेका (Lucie Hradecká) और राडेक स्टेपनेक (Radek Štěpánek) से हार झेलनी पड़ी।

सानिया मिर्ज़ा

सानिया मिर्ज़ा ने भारतीय महिला टेनिस की तस्वीर बदल डाली।

सानिया मिर्जा को भारत में महिला टेनिस के बदलाव का श्रेय दिया जाता है।

साल 1998 के ऑस्ट्रेलिया ओपन में निरुपमा संजीव भारत की तरफ से पहला ग्रैंडस्लैम मैच जीतने वाली पहली महिला था, इसके अलावा देश के पास महिला टेनिस की उपलब्धि गिनवाने का दूसरा अवसर नहीं था।

लेकिन इसके बाद की स्थिति सानिया मिर्जा के आने के बाद पूरी तरह बदल जाती है। जूनियर लेवल की विंबलडन गर्ल्स डबल्स चैंपियन सानिया मिर्जा भारत की पहली ऐसी महिला खिलाड़ी हैं, जिन्होंने डबल्यूटीए खिताब जीता है, सानिया ने ये कारनामा साल 2005 में हैदराबाद ओपन जीतकर किया था। अब तक ये कारनामा करने वाली सानिया इकलौती खिलाड़ी हैं।

चार साल बाद भारत की पहली महिला खिलाड़ी बनी, जिन्होंने ग्रैंड स्लैम जीता हो, भारतीय स्टार ने महेश भूपति के साथ मिलकर 2009 ऑस्ट्रेलियन ओपन के मिक्सड डबल्स का खिताब जीता। दो साल बाद इस जोड़ी ने फ्रेंड ओपन में भी यही कारनामा किया।

सानिया मिर्जा का तीसरा मिक्स्ड डबल्स स्लैम साल 2014 में आया, जब उन्होंने अपने ब्राजीली पार्टनर ब्रूनो सोरेस(Bruno Soares) के साथ मिलकर यूएस ओपन का खिताब अपने नाम किया।

साल 2015 में सानिया ने स्विस लीजेंड मार्टिना हिंगिस (Martina Hingis) के साथ जोड़ी बनाई, इस शानदार जोड़ी ने लगातार 44 मैच जीतने के साथ ही 3 लगातार ग्रैंड स्लैम खिताब जीते। जिनमें साल 2015 में विंबलडन ओपन और यूएस ओपन के साथ साथ साल 2016 का फ्रेंच ओपन भी शामिल है।

इसी दौरान वह भारत की पहली महिला खिलाड़ी बनीं, दो डबल्यूटीए डबल्स रैंकिंग में पहले स्थान पर काबिज हुई।

ग्रैंडस्लैम खिताब के अलावा सानिया के नाम 42 डबल्यूटीए डबल्स टाइटल भी शामिल है।