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भारतीय फुटबॉल की अगली पीढ़ी: युवा खिलाड़ियों पर नज़र जिनके दम पर भारत खेल सकता है FIFA वर्ल्ड कप

प्रतिभाशाली युवाओं की बदौलत भारतीय फुटबॉल का भविष्य उज्जवल हाथों में दिखाई दे रहा है।

लेखक जतिन ऋषि राज ·

FIFA वर्ल्ड कप में क्वालिफाई करना, ओलंपिक गेम्स में भाग लेना और एशिया की सर्वश्रेष्ठ 10 टीमों में अपना नाम शामिल करने का सपना लिए भारतीय फुटबॉल टीम आगे बढ़ रही है। ऐसे में इन सपनों की बागडोर संभालने के लिए भारत के पास कई युवा खिलाड़ी भी हैं।

हाल ही की भारतीय फुटबॉल टीम में सुनील छेत्री (Sunil Chhetri), संदेश झिंगन (Sandesh Jhingan) और गुरप्रीत सिंह संधु (Gurpreet Singh Sandhu) जैसे काबिल खिलाड़ी हैं और इन्होंने पिछले कई वर्षों से अपने खेल के ज़रिए लोगों का दिल तो जीता ही है और साथ ही इस खेल को भारत में भी ऊंचा दर्जा भी दिलाया है।

आज नहीं तो कल, भारतीय युवा कंधों पर इस टीम को आगे ले जाने की ज़िम्मेदारी होगी और उन्हें ही भारतीय फुटबॉल में वह सब करना होगा जिसकी नींव पिछले बहुत सालों से रखी जा चुकी है।

आइए देखते हैं कि अंडर 21 से कौन से ऐसे भारतीय फुटबॉलर हैं जो आगे चल कर इस खेल को भारतीय ज़मीन पर और ज़्यादा रोशन कर सकते हैं।

अमरजीत सिंह कियाम

अमरजीत सिंह कियाम ने कप्तान बन 2017 FIFA U-17 में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। तस्वीर साभार: AIFF

2017 FIFA U-17 में भारतीय फुटबॉल की कप्तानी कर चुके अमरजीत सिंह कियाम (Amarjit Singh Kiyam) इस समय किसी भी युवा टीम की कप्तानी करने के लिए तैयार हैं।

I-League के बाद अमरजीत सिंह ने इंडियन सुपर लीग (Indian Super League – ISL), में जमशेदपुर एफसी में कदम रखे और 2019-20 संस्करण उनके लिए काफी अच्छा रहा।

पिछले साल सीनियर टीम में डेब्यू करने वाले इस खिलाड़ी को इगोर स्टिमैक (Igor Stimac) द्वारा भी पसंद किया जाता है। ग़ौरतलब है कि अमरजीत थाईलैंड में हुए किंग्स कप के दौरान इस टीम के हिस्सा रहे थे। फील्ड पर मानों इस युवा का जोश देखते ही बन रहा था और डिफेंसिव मिड-फील्डर से वह जल्द ही बॉक्स-टू-बॉक्स खिलाड़ी बन गए।

इस शानदार खिलाड़ी की ख़ासियत ही अपने प्रतिद्वंदी को चकमा दे कर उसके खेमे में घुसकर गोल करने की है। माना जाता है कि उनका यह तरीका इटली के वर्ल्ड कप विजेता डेनियल डी रॉसी (Daniele De Rossi) से मेल खाता है।

अमरजीत को जो चीज़ अलग बनाती है वह किसी भी खेमे की कप्तानी करना है, फिर चाहे वह सीनियर टीम हो या जूनियर टीम, यह खिलाड़ी कभी भी किसी भी टीम को लीड कर सकता है।

भारतीय फुटबॉल के कप्तान सुनील छेत्री ने बातचीत के दौरान कहा “अमरजीत की उर्जा हम सभी तक पहुँचती है। वह एक ऐसे खिलाड़ी हैं जो सभी के लिए एक उदाहरण हैं।”

“अगर आप उन्हें एक दीवार से तीन घंटे की लड़ाई करने के लिए कहते हैं तो वह उस दीवार से तीन घंटे तक लड़ते रहेंगे।”

भारतीय फुटबॉल के एक उभरते हुए चेहरे के रूप और एक कप्तान की नज़र से देखा जाता है अमरजीत सिंह कियाम को।

जीकसन सिंह

अमरजीत के ही परिवार से ताल्लुक रखने वाले जीकसन सिंह (Jeakson Singh) ने 2017 FIFA U-17 वर्ल्ड कप के दौरान सुर्खियाँ बटोरीं थी। भारतीय टीम ने पूरे संस्करण में एक ही गोल दागा था और वह जीकसन सिंह के बूट से कोलंबिया एक खिलाफ आया था। आज भी 2017 FIFA U-17 World Cup इकलौते भारतीय फुटबॉलर हैं जिन्होंने FIFA में गोल मारा है।

6’1 जैसे लंबे कद काठी के FIFA चंडीगढ़ फुटबॉल अकादमी से निकले हैं। हालांकि इंडियन एरोज़ में इस खिलाड़ी का किरदार छोटा ही रहा था।

सेंट्रल मिडफील्डर ने ISL में भी अपने कदम रख लिए हैं और अब वह कोच एल्को शाटोरी (Eelco Schattorie) की टीम केरला ब्लास्टर्स का अहम हिस्सा हैं।

इतना ही नहीं बल्कि नाइजीरिया के वर्ल्ड कप विजेता और पेरिस सेंट-जर्मैन के स्टार खिलाड़ी बर्थोलोमेव ओगबेचे (Bartholomew Ogbeche) भी जीकसन से काफी प्रभावित हुए। ग़ौरतलब है कि बर्थोलोमेव ओगबेचे केरला ब्लास्टर्स के कप्तान भी हैं।

अब भारतीय फुटबॉल राष्ट्रीय टीम के दरवाज़े पर खड़े इस युवा खिलाड़ी के पास हर वह माद्दा है जिस वह से वह इस टीम का दरवाज़ा जल्द ही खोल देगा।

धीरज सिंह मोइरंगथम

मणिपुर से एक और युवा खिलाड़ी हैं जिनके कंधे भारतीय फुटबॉल का गर्व उठाने के लिए तैयार हो रहा है। धीरज सिंह मोइरंगथम (Dheeraj Singh Moirangthem) 2017 FIFA U-17 वर्ल्ड कप का एक अहम हिस्सा थे और आगे चल कर वह भारतीय फुटबॉल के बेहतरीन गोलकीपरों की फ़ेहरिस्त में जुड़ सकते हैं।

यूथ वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन दिखाने के बाद के कदम स्कॉटिश प्रीमियर-शिप मदरवेल एफसी की ओर बढ़ भी बढ़े थे। हालांकि वर्क पर्मिट की वजह से यह तीन साल का करार पूरा न हो सका।

धीरज ISL में लगातार खेलते रहे हैं और अब वह भारतीय फुटबॉल सीनियर टीम में मज़बूत जगह बनाने के काफी नज़दीक हैं।

गोलकीपिंग में भारत की पहली पसंद गुरप्रीत सिंह संधु अभी सिर्फ 28 वर्ष के हैं और उनके बाद आने वाले कीपर मुंबई एफसी के अमरिंदर सिंह (Amrinder Singh) हैं और वह उनसे महज़ एक साल छोटे हैं। ऐसे में धीरज सिंह को सीनियर टीम में खेलते देखने में थोडा ज़्यादा समय लग सकता है।

धीरज सिंह भारत के भविष्य के सबसे बेहतरीन गोलकीपर बनने के पथ पर। तस्वीर साभार: ट्विटर/धीरज सिंह  

मोहम्मद नवाज़

जहां U-17 विश्व कप ने धीरज के करियर को प्रोत्साहन दिया वहीं मोहम्मद नवाज़ (Mohammad Nawaz) को खेलने का मौका ही नहीं मिला। हालांकि असल खिलाड़ी वही है जो अपने खल से हर चीज़ को अपने पक्ष में डाल ले।

2017 U-17 विश्व कप में न खेल पाने के बाद मोहम्मद नवाज़ ने शानदार वापसी की और एफसी गोवा के मुख्य गोलकीपर बन गए। ग़ौरतलब है कि एफसी गोवा ISL से सबसे बेहतरीन टीमों में से एक हैं।

कहते हैं कि की कोई भी चीज़ लंबी नहीं लेकिन बड़ी और पूर्ण होनी चाहिए। नवाज़ का करियर अभी तक छोटा रहा है लेकिन शानदार रहा है। अपने तेज़ रिफ्लेक्सेस की वजह से नवाज़ ने बेहतरीन गोल रोके और अपनी टीम और पूरे भारत के चहेते बन गए।

20 साल की उम्र के मोहम्मद नवाज़ और युवा धीरज, दोनों ही भारतीय फुटबॉल के भविष्य के गोलकीपर हैं और यह स्थिति मानों भारतीय फुटबॉल के लिए एक सुनहरा अवसर लाएगी।

ISL 2019-20 के प्वाइंट्स टेबल पर सबसे ऊपर रहने के बाद अब गोवा AFC चैंपियंस लीग में खेलने के लिए तैयार है। ऐसे में नवाज़ से अच्छे और अनुभवों प्रदर्शन की उम्मीद भी की जा रही है।

सुमित राठी

सुमित राठी का हट्टी और जुझारू जज़्बा उन्हें बहुत हद तक जेमी वार्डिस्के की तरहपहचान दिलाता है।

2019 की शुरुआत में बहुत कम भारतीय फुटबॉल प्रशंसक इस सेंट्रल डिफेंडर का नाम जानते थे लेकिन साल बीतने के बाद और 2020 शुरू होने के बाद सुमित राठी (Sumit Rathi) का नाम हर प्रशंसक की ज़ुबान पर था। ATK मोहन बागान की ओर से खेलते हुए सुमित राठी ने कम समय में बहुत नाम बना लिया है।

पिछले साल ATK मोहन बागान बी टीम का हिस्सा रहे राठी को कोच एंटोनियो लोपेज हाबास (Antonio Lopez Habas) ने ISL डेब्यू ओड़िसा एफसी के खिलाफ कराया। उस मुकाबले में सुमित राठी ने दूसरे भाग में दिग्गज अनस एडाथोडीका (Anas Edathodika) की जगह ली थी और तब से लेकर आज तक इस खिलाड़ी ने पलट कर नहीं देखा।

भारतीय नेशनल टीम के खिलाड़ी अनस को काफी समय तक क्लब से बाहर रखने के बाद सुमित राठी ने ATK की खिताबी जीत में अहम भूमिका निभाई।

इसके बाद राठी को ISL एमर्जिंग प्लेयर ऑफ़ द ईयर का खिताब भी मिला जो कि किसी भी युवा खिलाड़ी को प्रेरणा देने के लिए काफी है। अपनी उम्र के हिसाब से राठी के खेलने का अंदाज़ परिपक्व है और यही कारण उन्हें बाकी खिलाड़ियों से बेहतर बनाता है। 2019-20 सेमी-फाइनल के दौरान बैंगलूरू एफसी के खिलाफ राठी द्वारा कुछ ग़लतियां ज़रूर हुईं थी जिस वजह से आशिक कुरुनियन (Ashique Kuruniyan) ने मुकाबले के पहला गोल जड़ा था।

करो या मरो की स्थिति में ऐसी त्रुटियां किसी भी खिलाड़ी को बिखेरने के लिए काफी हैं लेकिन मुकाबले के अंत तक राठी मानों एक अलग ही खिलाड़ी के रूप में उभरे। उनके इसी अंदाज़ ने उनकी टीम ATK को फाइनल तक पहुंचाने में मदद की।

भारतीय युवा फुटबॉल खिलाड़ी: जिन पर सबकी नज़र

बेंगलुरु एफसी के पांच खिलाड़ी सुरेश सिंह वांगजम (Suresh Singh Wangjam), स्ट्राइकर राहुल केपी (Rahul KP), नरेंद्र गहलोट (Narender Gahlot), ATK मोहन बागान के कोमल थाटल (Komal Thatal) और मनवीर सिंह (Manvir Singh) के साथ साथ शुभम सारंगी (Shubham Sarangi) और इंडियन एरोज़ के रोहित दानू (Rohit Danu) और विक्रम प्रताप सिंह (Vikram Pratap Singh) जैसे कई फुटबॉलर हैं जिन पर निगाहें टिकी होंगी।

इनके आलावा सहल अब्दुल समाद (Sahal Abdul Samad), दो बार के AIFF एमर्जिंग प्लेयर ऑफ़ द ईयर अनिरुद्ध थापा (Anirudh Thapa), लल्लियनज़ुआला छांगते (Lallianzuala Chhangte), आशिक कुरुनियन और उदांता सिंह (Udanta Singh) जो अंडर 25 में शुमार हैं वह आज भारतीय खेमे के महत्वपूर्ण अंग हैं।