अपने खेल को जानिए: ओलंपिक बॉक्सिंग के नियम, पंच और गीयर

बुनियादी बातों से लेकर गियर और पंचो की स्टाइल तक, यहां जानिए एमेच्योर मुक्केबाज़ी के सभी नियम

बहुत पहले 'द रंबल इन द जंगल' और 'द थ्रिला इन मनीला' जैसे मुकाबलों के लिए वह मशहूर थे, मुहम्मद अली (Muhammad Ali) ने 1960 में रोम में किशोरावस्था में अपना नाम बनाया था।

लाइट हैवीवेट (81 किग्रा) वर्ग में प्रतिस्पर्धा करते हुए, उन्होंने फाइनल में ज़बिनग्यू पिएट्रोज़्कोव्स्की (Zbigniew Pietrzykowski) को हराया और खुद को 'द ग्रेटेस्ट' होने के रास्ते पर रखा।

अली की तरह, शौकिया मुक्केबाज़ी ने खेल में कुछ सबसे बड़े नामों का पोषण और प्रसार किया है, जिसमें व्लादिमीर क्लिट्स्को (Wladimir Klitschko), फ्लोयड मेवेदर (Floyd Mayweather) और केटी टेलर (Katie Taylor) शामिल हैं - सभी ओलंपिक मुक्केबाजी के रास्ते से महानता की ओर बढ़ रहे हैं।

फ्लोयड मेवेदर ने अटलांटा में 1996 के खेलों में दो दशकों में पहली बार क्यूबा को हराने वाले पहले अमेरिकी मुक्केबाज बनते हुए कांस्य पदक जीता। उस ओलंपिक में, यह व्लादिमीर क्लिट्सचको थे, जो सुपर-हेवीवेट श्रेणी में स्वर्ण पदक जीतने के लिए गए थे।

पेशेवर स्टारडम की दिशा में अपने सफल संक्रमण से पहले एमेच्योर मुक्केबाजी एक लॉन्चपैड रही है।

भारत में एमेच्योर मुक्केबाजी को लगातार बढ़ावा मिल रहा है। जब से विजेंदर सिंह (Vijender Singh) ने 2008 में मुक्केबाजी में भारत की तरफ से पहला ओलंपिक पदक जीता और उसके बाद एमसी मैरी कॉम (MC Mary Kom) ने 2012 में भारत को इस खेल में दूसरा मेडल जिताया। तब से भारतीय फैंस मुक्केबाजों से ज्यादा उम्मीद करने लगे हैं।

ये बात अलग है कि 2016 ओलंपिक गेम्स में मुक्केबाजी में भारत कोई पदक नहीं जीत पाया था लेकिन अब 2020 ओलंपिक में इससे बहुत उम्मीदें हैं। मैरी कॉम सहित कई मुक्केबाजों ने अच्छा प्रदर्शन कर फैंस के मन में मेडल की उम्मीद जगाई है।

अब जब 3 मार्च से मुक्केबाजी के लिए ओलंपिक क्वालिफायर शुरू हो रहे हैं तो आपको इसके नियम को समझने चाहिए।

नियम और बेसिक बातें

एमेच्योर मुक्केबाजी ओलंपिक का हिस्सा साल 1920 से है। यह नॉक आउट ( हारते ही टूर्नामेंट से बाहर) फॉर्मेट में खेला जाता है। जो मैच जीतता है, वह अगले दौर में प्रवेश करता है। टूर्नामेंट के विजेता को गोल्ड और उपविजेता को रजत पदक से सम्मानित किया जाता है। वहीं जो खिलाड़ी सेमीफाइनल में हारता है, उसे कांस्य पदक से संतोष करना पड़ता है।

ध्यान देने वाली पहली बात ये है कि इनमें से एक ओलंपिक मुक्केबाजी है, जो अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के अधिकार क्षेत्र में आती है। आपको बता दें कि यह पेशेवर मुक्केबाजी से अलग है। इसके नियम, उपकरण और सेटअप सभी पेशेवर मुक्केबाजी से अलग होते हैं।

कमर के हिस्से के नीचे नहीं मार सकते

मुक्केबाज को कमर के नीचे मारने की इजाजत नहीं होती है, यह नियम के खिलाफ है। अगर मुक्केबाज चेतावनी के बाद भी ऐसा करता है तो उसे अयोग्य करार दे दिया जाता है। बॉक्सर को अपने दस्ताने से अपने प्रतिद्वंद्वी के सिर या शरीर पर प्रहार करना होता है।

 पंच कमर के ऊपर होने चाहिए
 पंच कमर के ऊपर होने चाहिए पंच कमर के ऊपर होने चाहिए

प्रोफेशनल मुक्केबाजी से अलग एमेच्योर में विजेता का फैसला अंकों के आधार पर किया जाता है। जो मुक्केबाज जितने साफ तरीके से पंच मारता है, उसे ज्यादा अंक मिलते हैं। पुरुषों के बाउट में 3 मिनट के 3 राउंड होते हैं, वहीं महिला वर्ग में 2 मिनट के 4 राउंड होते हैं। इसके अंतर्गत 5 जजों का एक पैनल होता है जो फैसला देता है। यह फैसला 5-0 हो सकता है या बहुमत में (4-1) भी हो सकता है। आपको बता दें कि यह जजों के फैसलों पर 3-2 या ड्रॉ भी हो सकता है।

यूनिफॉर्म और गियर

एमेच्योर मुक्केबाजी में रैंकिंग के आधार पर, मुक्केबाज लाल (उच्च रैंक) या नीली (निचली रैंक) की यूनिफॉर्म पहनते हैं, जिसमें शॉर्ट और साथ ही टी शर्ट भी शामिल है। इसके अलावा मुक्केबाज अपनी आंखों, सिर और कानों को गंभीर चोट से बचाने के लिए कई उपकरण पहनते हैं।

दस्ताने में मुख्य संपर्क क्षेत्र पर चारों तरफ एक सफेद पट्टी होती है। यह जजों की सहजता के लिए है।

स्टाइल और स्टांस

एमेच्योर मुक्केबाजी में खासतौर पर 4 तरह की स्टाइल होती है लेकिन ये जरूरी नहीं है कि मुक्केबाज केवल स्टाइल में ही खुद को बांधे रखे। यह स्टाइल के मिश्रण पर निर्भर करता है।

स्वैमर: इस स्टाइल में बॉक्सर अपने विरोधी के समय और फोकस करने के उद्देश्य करने की कोशिश करता है। अपने पैरों की तेजी की बदौलत विरोधी के हुक और अपर कट से बचने की स्टाइल है। स्वैमर को ठोड़ी पर काफी प्रहार करना होता है इसलिए इस स्टाइल में बॉक्सर लेफ्ट जैब का इस्तेमाल करते है। इससे वह विरोधी के प्रहार को कम कर सकता है।

आमतौर पर स्वैमर एक शॉर्ट फाइटर होते हैं, जिन्हें अपनी सीमित पहुंच की भरपाई करनी होती है।

आउट-बॉक्सर- स्वैमर के विपरीत, आउट-बॉक्सर अपने विरोधियों से दूरी बनाने के लिए और अधिक गति के लिए लंबी दूरी के मुक्के मारने का प्रयास करता है। इस दौरान वह हुक और अपर कट के बजाय जैब्स और सीधे घूंसे पर भरोसा करते हैं। नतीजतन, वे नॉकआउट के बजाय अंकों पर जीत हासिल करते हैं।

स्लैगर- यह स्वैमर और आउट बॉक्सर की तरह ज्यादा चपल नहीं होते है। स्लैगर केवल शक्ति का खेल है, जहां मुक्केबाज केवल एक पंच में विरोधी को ढेर कर सकते हैं। अपने घूंसे की क्षमता के कारण, वे संयोजनों पर बहुत निर्भर नहीं करते हैं। इसके अलावा, उनके घूंसों का पूर्वानुमान पहले ही हो जाता है।

बॉक्सर- पंचर: यह थोड़ा थोड़ा आउट बॉक्सर की तरह होते हैं। हाथ की गति, संयोजन और काउंटर आउट बॉक्सर जैसे ही होते है और उसके बाद स्लैगर की तरह वह ताकत का इस्तेमाल करते हैं। बॉक्सर पंचर स्लैगर की तरह ताकतवार पंच तो मार ही सकते है, इसके साथ वह काफी सटीकता से ऐसा करते है।

काउंटर- पंचर - एक काउंटर-पंचर एक प्रतिद्वंद्वी को गलती करने के लिए आमंत्रित करता है, जिसका फायदा वह उठाता है। यह एक शारीरिक लड़ाई के रूप में एक मनोवैज्ञानिक लड़ाई है, क्योंकि काउंटर-पंचर अपने प्रतिद्वंद्वी पर आक्रामण भी करता है साथ ही खुद का बचाव भी करता है। यह शैली आग से खेलने की तरह है। अगर काउंटर पंचर के रिफ्लेक्शन तेज नहीं होते तो वह खुद के लिए मुश्किल भरा होता है।

साउथपॉ: यह ऑर्थोडॉक्स फाइटर की तरह दाएं हाथे से नहीं लड़ते हैं बल्कि बांए हाथ का इस्तेमाल करते हैं।

स्विच-हिटर: एक स्विच-हिटर अपने प्रतिद्वंद्वी को भटका देने के उद्देश्य ऑर्थोडॉक्स और साउथपॉ स्टांस का उपयोग कर सकता है।

पंचों के प्रकार

एमेच्योर मुक्केबाजी में आमतौर पर 4 पंचों का इस्तेमाल होता है, जिनमें जैब, हुक, क्रॉस और अपर-कट शामिल है।

नोट: साउथपॉ मुक्केबाज की स्थिति में बायां पंच दायां हो जाएगा, नीचे दी जानकारी ऑर्थोडोक्स मुक्केबाजों के हिसाब से हैं।

लेफ्ट जैब: लेफ्ट जैब मुख्य हाथ से सीधा पंच है, जो गार्ड की पोजिशन में मारा जाता है। वहीं मुट्ठी को हॉरिजॉन्टल तरीके से घुमाते हुए विरोधी पर हमला करते हैं। इसके अंतर्गत विरोधी की नाक पर लक्ष्य साधा जाता है, जो कि बॉक्सिंग का सबसे मुख्य पंच भी माना जाता है।

मुक्केबाजों को कम वेट (वजन) ट्रांसफर करते हुए लंबी पहुंच की दूरी को कवर करना होता है। यह प्रतिद्वंद्वी को मुकाबला करने के लिए बहुत कम जगह देता है और अपने स्वयं के कवर के लिए अच्छी तकनीक है।

ऐसा इसलिए है क्योंकि जैसे ही घूंसे का पूरी तरह से इस्तेमाल किया जाता है। बाएं कंधे को ठोड़ी की सुरक्षा के लिए लाया जा सकता है जबकि पीछे वाला हाथ जबड़े को ढाल सकता है। बॉक्सर्स के लिए एक बड़ा हथियार होता है। यह मुकाबला खत्म करने वाला नहीं होता है लेकिन ज्यादा दूरी को कवर करने में सहायक होता है। विरोधी से बचने से ज्यादा यह ज्यादा पंच लगाने के लिए इस्तेमाल होता है।

राइट क्रॉस- जैसा कि नाम से पता चलता है, राइट क्रॉस को रद्द करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, या सही ढंग से समय पर पहुंचने पर पर जैब भी कैंसल किया जा सकता है। राट क्रॉस में विरोधी के चेहरे को टारगेट किया जाता है। इसके अंतर्गत दाएं हाथ से ताकतवर शॉट सामने की तरफ इस्तेमाल किया जाता है।

राइट क्रॉस को अक्सर एक-दो क्रम में जैब के लिए अनुवर्ती के रूप में उपयोग किया जाता है। जबकि लेफ्ट जॅबिंग वाला हाथ पीछे हटा हुआ है, चेहरे को ढालने के साथ-साथ ठोड़ी को दबाने के प्रयास में कंधे को दाएं और रखना होता है।

कुछ बॉक्सर धड़ को घुमाकर पंच में अतिरिक्त शक्ति को घुसाने की कोशिश करते हैं और क्रॉस-थ्रो के रूप में काउंटर-क्लॉक वाइज को घुमाते हैं। यह आगे के पैर पर भार को स्थानांतरित करता है, पंच को अधिक गति प्रदान करता है।

हुक- हुक एक घुमाकर हाथ से मारा जाने वाला एक पंच है। इसके अंदर रियर हैंड से विरोधी के जॉलाइन को टारगेट किया जाता है।

अपनी मुट्ठी को सीधा रखते हुए, बॉक्सर इसे वर्टिकल से हॉरिजॉन्टल की स्थिति में रोल करता है। इसके अंतर्गत विरोध एक साथ स्टैप लेता और अपनी बॉडी को रोटेशन में रखा जाता है। जहां कोहनी को मुट्ठी के पीछे रखा जाता है, वहीं दूसरा हाथ जबड़े की सुरक्षा करता है। जबड़े के अलावा, हुक निचले शरीर के क्षेत्र को भी टारगेट कर सकता है।

अपर-कट- हुक की तरह, अपर- कट में मुक्के को घुमा के मारा जाता है। जो प्रतिद्वंद्वी की ठोड़ी की ओर जाता है, लेकिन हॉरिजॉन्टल की जगह वर्टिकल

सही तरीके से अपर-कट का इस्तेमाल करने से विरोधी को नॉकआउट किया जा सकता है
सही तरीके से अपर-कट का इस्तेमाल करने से विरोधी को नॉकआउट किया जा सकता हैसही तरीके से अपर-कट का इस्तेमाल करने से विरोधी को नॉकआउट किया जा सकता है

गार्ड की स्थिति से, बॉक्सर अपने धड़ को दाईं ओर शिफ्ट करता है और अपने पिछले हाथ को प्रतिद्वंद्वी के जबड़े की ओर एक चाप में लॉन्च करने से पहले अपने घुटनों को मोड़ता है। जैसे ही मुक्का मारा जाता है, घुटने धीरे से ऊपर धकेलते हैं और सिर क्रॉस के प्रक्षेप चलता है।

राइट अपर-कट, जो एक लेफ्ट हुक के बाद इस्तेमाल होता है, यह एक बहुत ही क्रूर संयोजन होता है, जो अगर समय पर और सही तरीके से क्रियान्वित किया जाए तो विरोधी को नॉकआउट हो सकता है।

कहां देख सकते हैं बॉक्सिंग ओलंपिक क्वालिफायर्स

एशिया/महाद्वीप बॉक्सिंग क्वालिफायर्स अम्मान और जॉर्डन में 3 से 11 मार्च तक होंगे

हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में ओलंपिक चैनल की वेबसाइट पर आप इसका लाइव प्रसारण देख सकते हैं।

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