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पेरिस 2024: भारतीय ब्रेक-डांसर आरिफ़ चौधरी क़दम से क़दम मिलाते हुए सोच बदलने के लिए हैं तैयार

पेरिस 2024 में मेडल इवेंट में शामिल होने के बाद, ब्रेक-डांसिंग के लिए एक नई उम्मीद की किरण जगी है।

लेखक सैयद हुसैन ·

मुंबई के ब्रेक-डांसर आरिफ़ चौधरी (Arif Chaudhary) के लिए पिछले कुछ सप्ताह बेहद शानदार रहे हैं।

एक ऐसी शख़्सियत जो देश के शीर्ष बी-बॉयज़ (ब्रेक डांसर्स के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द) में शामिल हैं, लेकिन सुर्खियों से हमेशा दूर रहना ही आरिफ़ मुनासिब समझते हैं। लेकिन अब इस 23 वर्षीय ब्रेक-डांसर से जैसे ही ब्रेक-डांसिंग और ओलंपिक गेम्स के बारे में पूछा जाता है तो उनके चेहरे पर एक ख़ूबसूरत मुस्कान खिल जाती है।

आरिफ़ चौधरी उर्फ़ फ़्लाइंग मशीन ने ओलंपिक चैनल के साथ बातचीत में कहा, “मुझे इसका बेसब्री से इंतज़ार है। मैं मानता हूं कि अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक संघ (IOC) की ओर से ये की गई एक शानदार पहल है, जो हमारे लिए आने वाले समय में एक बेहतरीन रास्ता बनाएगा।“

ब्रेक-डांस ने खेल के तौर पर अपना डेब्यू 2018 यूथ ओलंपिक में किया था और अब इसे इस महीने ही आधिकारिक तौर पर पेरिस 2024 में एक मेडल इवेंट में रखा गया है। पेरिस में होने वाले ओलंपिक में इस खेल में क़रीब 32 प्रतिभागी (16 बी-बॉयज़ और 16 बी-गर्ल्स) शिरकत करेंगे जिनके बीच 1vs1 फ़्रिस्टाइल डुएल्स होंगे जिन्हें ‘बैटल्स’ (Battles) का नाम दिया गया है।

आरिफ़ चौधरी मानते हैं कि इस खेल के लिए इससे बढ़कर और कुछ नहीं हो सकता।

“ये शानदार है, अब सभी लोग जान जाएंगे कि ब्रेकिंग किसे कहते हैं। ये हमेशा से छिपी रही है, बहुत कम ही लोग जानते हैं कि भारत में भी ब्रेकिंग का महत्व काफ़ी है। हालांकि लोग इसे देखते भी हैं लेकिन कभी कोई गंभीरता से नहीं लेता। मुझे लगता है अब हमारे देश में भी इसे करियर विकल्प के तौर पर लिया जाएगा। मुझे आशा है कि जैसे बच्चे क्रिकेट और फ़ुटबॉल को देखते हैं वैसे ही बी-बॉयिंग में भी आगे आएंगे।“

B-Boys Gold Medal Final - Breaking |Buenos Aires 2018 YOG

Held in the Parque Mujeres Argentinas, the B-Boys Breaking competition fina...

आरिफ़ पहली बार ब्रेकिंग में बीसी वन (BC One) के ज़रिए सामने आए थे, ये एक वार्षिक बी-बॉयज़ प्रतियोगिता है।

मुंबई की उप-नगरी जोगेश्वरी से आने वाले आरिफ़ चौधरी ने ख़ुद से ही ब्रेक-डांसिंग में अपनी एक पहचान बनाई है।

“शुरू में मैं ब्रेक-डांस देखकर हैरान रह जाता था कि कैसे इसे किया जाता है। तब मुझे ये भी नहीं मालूम था कि इसे बी-बॉयिंग कहते हैं। मैं वीडियो में देखता था और फिर इसे ख़ुद से करने की कोशिश करता था। तब मैं इसके लिए साइबर कैफ़े जाया करता था और वहां इसे देखकर सीखता था। धीरे-धीरे मैं प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लेने लगा और फिर आज इस मुक़ाम पर पहुंच गया।“

2012 में जब आरिफ़ अपने पहले ‘बैटल’ में प्रतिभागी बनकर उतरे थे तो उन्होंने ख़िताबी जीत के साथ ही सभी को चौंका दिया था।

“ये मेरी पहली प्रतियोगिता थी और इसके बारे में मुझे कुछ ज़्यादा नहीं पता था। लेकिन उस जीत के बाद मुझे एहसास हो गया था कि अगर इसे मैंने गंभीरता से लिया तो फिर मैं और अच्छा कर सकता हूं।“

इसके बाद तो फिर आरिफ़ चौधरी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और इस स्पर्धा में वह देश की एक बड़ी शख़्सियत बन गए, उन्होंने अब तक तीन राष्ट्रीय ख़िताब जीता है और इतनी जीत किसी और भारतीय को नसीब नहीं हुई है।

आरिफ़ ने कुछ बड़ी प्रतियोगिताओं में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया है, इन बैटल्स के लिए वह ऑस्ट्रिया, नीदरलैंड, स्लोवाकिया, चीन, जापान और ताईवान तक की यात्रा कर चुके हैं।

इस कला में एक दशक से ज़्यादा समय देने के बाद आरिफ़ चौधरी की नज़र अब देश का नाम रोशन करने पर है। उनका मक़सद है कि इस खेल को वह पूरे देश में लोकप्रिय बनाएं, इसके लिए वह अपनी तरफ़ से भरपूर कोशिश कर रहे हैं।

अब जब ये ओलंपिक में भी शामिल हो गया है तो फिर आरिफ़ चौधरी को भी भरोसा है कि ये खेल उन लोगों तक भी पहुंच जाएगा जिन्हें अब तक बी-बॉयिंग के बारे में जानकारी नहीं थी।

“मेरे लिए ये एक कला है, जब मैंने शुरुआत की थी तो इसके बारे में ज़्यादा नहीं मालूम था। तब मैं ये भी नहीं सोचता था कि ये एक कला है या खेल, इसे करना मुझे अच्छा लगता था। धीरे-धीरे मैं जब आगे बढ़ता गया तो मुझे अहसास हो गया था कि बी-बॉयिंग खेल और कला का शानदार मिश्रण है। “

आरिफ़ ने अपनी बातें आगे बढ़ाते हुए कहा, “ब्रेकडांसिंग की शुरुआत तो 70 के दशक में ही न्यूयॉर्क की सड़कों पर हो चुकी थी। लेकिन ये सिर्फ़ एक डांस नहीं ये जिमनास्टिक, जैज़ और कई कलाओं का मिश्रण भी है। जिमनास्टिक में एयरफ़्लेयर बी-बॉयिंग से ही प्रेरित है, इसलिए मैं फिर कहूंगा कि इसकी शुरुआत सड़कों से हुई फिर क्लब में पहुंचा और फिर स्टेज से होते हुए ये अब एक खेल बन चुका है।“

आरिफ़ चौधरी तीन बार के राष्ट्रीय ब्रेकिंग चैंपियन हैं। तस्वीर साभार: आरिफ़ चौधरी/फ़्लाइंग मशीन

अगर भारत की बात की जाए तो 2004 में ऑल इंडिया डांस स्पोर्ट फ़ेडेरेशन (All India DanceSport Federation) की स्थापना हुई थी।

आरिफ़ चौधरी को इसके सुनहरे भविष्य के साथ साथ ख़ुद पर भी भरोसा है कि वह पेरिस 2024 के लिए क्वालिफ़ाई कर जाएंगे।

“मुझे उम्मीद है कि मैं ब्रेकिंग के लिए लोगों की सोच बदल सकूंगा और मैं रुकने वाला नहीं हूं। मुझे उम्मीद है कि देश में इस खेल को और भी समर्थन और प्रोत्साहन मिलेगा और मैं पेरिस गेम्स में ज़रूर जगह बनाऊंगा।“