हरियाणा के धूल भरे दंगल से दीपक पूनिया की टोक्यो तक की उड़ान

सुशील कुमार के मार्गदर्शन में दीपक जूनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने में सफल रहे

एक अनजान पहलवान जिसने बहुत कम वक्त में अच्छा प्रदर्शन कर टोक्यो ओलंपिक में पदक वाले प्रदर्शन की उम्मीद जताई, अब दीपक पूनिया (Deepak Punia) को पूरी दुनिया सलाम करती है।

20 साल के इस खिलाड़ी ने साल 2018 में जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप (Junior World Championship) में सिल्वर पदक जीता था। इसके बाद उन्होंने साल 2019 जूनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप (Junior World Wrestling Championship) में गोल्ड मेडल जीता, ऐसा करने वाले पिछले 18 साल में वह पहले भारतीय है। उन्होंने कंधे की चोट से जूझते हुए फाइनल में रूसी एलिक शेबज़ुकोव (Alik Shebzukov) को हराकर चैंपियन की तरह प्रदर्शन किया।

सीनियर एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप क्वालिफायर के दौरान एक मुकाबले में भारतीय पहलवान दीपक पूनिया
सीनियर एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप क्वालिफायर के दौरान एक मुकाबले में भारतीय पहलवान दीपक पूनियासीनियर एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप क्वालिफायर के दौरान एक मुकाबले में भारतीय पहलवान दीपक पूनिया

सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के 86 किलोग्राम कैटेगिरी में सेमीफाइनल में पहुंचने के साथ ही दीपक पूनिया ने टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर लिया। इसके सात ही वह बजरंग पूनिया (Bajrang Punia)और विनेश फोगाट (Vinesh Phogat) की लिस्ट में शामिल हो गए

इस खिलाड़ी के प्रदर्शन को भारत से बाहर भी काफी पसंद किया गया, जिसके बाद उन्हें यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (United World Wrestling) ने उन्हें 2019 के लिए वर्ष का अपना जूनियर पहलवान नामित किया था।

इसके बाद भी झज्जर हरियाणा के रहने वाले इस दो बार के एशियन चैंपियनशिप कांस्य पदक विजेता के लिए रास्ता इतना आसान नहीं था। सुशील कुमार (Sushil Kumar) के मार्गदर्शन के कारण ही उन्होंने ये सब हासिल किया है।

दीपक पूनिया की अच्छी शुरुआत

एक साधारण परिवार से आने वाले दीपक गांव में होने वाले स्थानीय दंगल देखने जाया करते थे। दीपक के दादाजी और पिता का रेसलिंग की तरफ पहले से ही झुकाव था इसलिए जब केवल 4 साल की उम्र में उन्होंने रेसलिंग में कदम रखा तो किसी को आश्चर्य नहीं हुआ।

वह अपने चचेरे भाई सुनील कुमार(जो उस समय दंगल की दुनिया में मशहूर थे) के साथ यात्रा करते थे, वह पास के गांव में दंगल के लिए जाते थे। इस खिलाड़ी की काबिलियत के कारण वह जल्दी ही पैसा भी कमाने लग गए, जिसके कारण वह अपने पिता जो दूध बेचते थे, उनकी मदद कर पाते थे।

इस खिलाड़ी के चचेरे भाई सुनील कुमार (Sunil Kumar) को लगा कि दंगल खेलकर दीपक अपनी प्रतिभा से इंसाफ नहीं कर रहा। इसके बाद उन्होंने साल 2015 में दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में उनका दाखिला करवा दिया।

रेसलिंग के लिए एक आदर्श विद्यालय छत्रसाल स्टेडियम

सुनील कुमार के कारण दीपक छत्रपाल स्टेडियम पहुंचे, ये वही रेसलिंग स्कूल है, जहां से दो दो ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार (Sushil Kumar) और योगेश्वर दत्त (Yogeshwar Dutt) निकले हैं। इसी वजह से ये दीपक के लिए आदर्श फैसला था।

इस प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ी के पास अब अनुभवी और शानदार कोच से सीखने का मौका था, इनमें दो बार के ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार के कोच भी शामिल हैं।

2019 वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के सेमीफ़ाइनल में 86 किग्रा भारवर्ग में दीपन पूनिया ने स्टीफ़ेन रिशमुथ को मात दी थी। तस्वीर साभार: UWW
2019 वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के सेमीफ़ाइनल में 86 किग्रा भारवर्ग में दीपन पूनिया ने स्टीफ़ेन रिशमुथ को मात दी थी। तस्वीर साभार: UWW2019 वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के सेमीफ़ाइनल में 86 किग्रा भारवर्ग में दीपन पूनिया ने स्टीफ़ेन रिशमुथ को मात दी थी। तस्वीर साभार: UWW

कहा जाता है कि खिलाड़ियों के करियर में  एक पल ऐसा आता है जो उसकी यात्रा को परिभाषित करता है। दीपक पूनिया के लिए ये क्षण साल 2016 में आया। भारतीय सेना में उन्हें एक महत्वपूर्ण पद दिया, दीपक के लिए ये इसलिए भी अच्छा था क्योंकि यह उनकी अच्छी आय स्त्रोत थी।

आपको बता दें कि वह एक ऐसे परिवार से आते हैं, जिन्होंने काफी चुनौतियों का सामना किया है। उनके पिता उन्हें 69 किलोमीटर जाकर रोजाना दूध और फल देने जाते थे।

दीपक पूनिया की सफलता में सुशील कुमार का बड़ा योगदान

इस खिलाड़ी के आदर्श सुशील कुमार को उम्मीद नहीं  थी कि, दीपक इतनी जल्दी सफलता हासिल कर लेंगे, हां उन्होंने इस खिलाड़ी कीा प्रतिभा को बहुत पहले ही पहचान लिया था। दीपक सुशील को गुरुजी कह कर ही बुलाते हैं।

सुशील कुमार ने दीपक पूनिया को सलाह दी कि वह केवल रेसलिंग पर ही फोकस करें, इससे ही उन्हें भविष्य में काफी नौकरी मिल जाएगी।

दीपक पूनिया सीनियर एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप क्वालिफ़ायर्स में अपने प्रतिद्वंदी को चारों खाने चित करते हुए।
दीपक पूनिया सीनियर एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप क्वालिफ़ायर्स में अपने प्रतिद्वंदी को चारों खाने चित करते हुए।दीपक पूनिया सीनियर एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप क्वालिफ़ायर्स में अपने प्रतिद्वंदी को चारों खाने चित करते हुए।

 सुशील कुमार की बात सुनकर केवल 16-17 साल की उम्र में इस खिलाड़ी ने साल 2016 में कैडेट वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता। बाकी जो उन्होंने हासिल किया है वह इतिहास का हिस्सा है। हां ये बात साफ है कि वह अपने गुरु के कदमों पर चलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। 

ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतना पूनिया का लक्ष्य

दीपक ने हिंदुस्तान टाइम्स से पिछले महीने बात करते हुए कहा कि “मेरे लिए इस समय सबसे ज्यादा जरूरी टोक्यो ओलंपिक है। इसके लिए मैं अपना शत प्रतिशत दे रहा हूं। टोक्यो में मेडल जीतने के लिए मुझे जो करना चाहिए वह मैं कर रहा हूं।”

दीपक पूनिया जिस चीज में अपना ध्यान केंद्रित किए रहते हैं तो वह उसे हासिल करने में जुट जाते हैं और अब उनके बातों से तो यही लगता है कि ओलंपिक में पदक जीतना उनका जुनून बन गया है।

टोक्यों ओलंपिक के लिए दीपक पूनिया पूरी तरह से फोकस है और अपने गुरु सुशील कुमार के साथ वह भी मेडल जीतने की उम्मीद जा रहे हैं। पिछले 18 साल में जूनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय दीपक ने पहले ही इतिहास रच दिया है। इसी वजह से टोक्यो ओलंपिक में दीपक पूनिया से व्यक्तिगत पदक की उम्मीद की जा रही है।

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