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पेस और भूपति से प्रेरित दिविज शरण ने बनाई अपनी खुद की राह

जब भी भारत के टेनिस स्टार खिलाड़ियों के बारे में बात की जाती है तो सबसे नाम दिविज शरण का आता है। 

लेखक विवेक कुमार सिंह ·

बीती सदी के अंत में विंबलडन और रोलैंड गैरोस जैसे अंतरराष्ट्रीय टेनिस के बड़े और पवित्र मैदान पर युगल जोड़ी लिएंडर पेस और महेश भूपति के कारनामों ने भारत में इस खेल के लिए वास्तविक रुचि पैदा करने का काम किया। इसने विशेष रूप से नई दिल्ली में एक युवा लड़के को प्रेरित करने का काम किया, क्योंकि दिविज शरण उन लोगों में से हैं जो इस जोड़ी की सफलता से प्रेरित थे।

जबकि दुनिया भर में कई अन्य लोगों की तरह उन्होंने रोजर फेडरर को भी अपना आदर्श माना है। यह पेस और भूपति की उपलब्धियां थीं, जिसने देश में बहुत से खिलाड़ियों को प्रेरित किया। इन टेनिस दिग्गजों ने इस खेल को अपनाने के लिए 7 वर्षीय दिविज शरण को भी प्रेरित किया।

33 वर्षीय इस भारतीय स्टार ने पिछले कुछ वर्षों से डबल्स प्रतियोगिता में खुद को बेहतर किया है। 2007 में अपना पहला फ्यूचर्स डबल्स खिताब जीतना हो या 2011 में अपना पहला डबल्स एटीपी चैलेंजर खिताब, 2013 में पहला एटीपी वर्ल्ड टूर खिताब हो या 2014 में एशियाई खेलों में पदक जीतना, दिविज शरण ने एक लंबा सफर तय किया है। इस सफर ने उन्हें बेहतर तो किया ही है, साथ ही वो हर एक प्रतियोगिता के लिए दावेदार बने हुए हैं।

दिविज शरण का टेनिस के लिए समर्पण

2 मार्च, 1986 को नई दिल्ली में जन्मे, दिविज शरण को छोटी उम्र से ही टेनिस के लिए समर्पित देखा गया था, जब उन्होंने रोजर फेडरर, महेश भूपति और लिएंडर पेस की मूर्तियां बनाई थीं। सात साल की उम्र में, उन्होंने एक लोकल एकेडमी में खेल खेलना शुरू किया।

जब वो एक खिलाड़ी के रूप में परिपक्व हो गए, उसके बाद उन्होंने ग्रास और हार्ड कोर्ट को प्राथमिकता दी और वॉली में महारत हासिल की – जो अब उनका पसंदीदा शॉट है। सिंगल्स प्रतियोगिता में अधिक सफलता न मिलने की वजह से दिविज शरण ने डबल्स पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया।

जब वो एक खिलाड़ी के रूप में परिपक्व हो गए, उसके बाद उन्होंने ग्रास और हार्ड कोर्ट को प्राथमिकता दी और वॉली में महारत हासिल की – जो अब उनका पसंदीदा शॉट है। सिंगल्स प्रतियोगिता में अधिक सफलता न मिलने की वजह से दिविज शरण ने डबल्स पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया।

भारत को मिला भविष्य का सितारा

2007 में लिया गया ये निर्णय उनके लिए समझदारी वाला रहा और तीन साल बाद उन्होंने अपना पहला फ्यूचर्स डबल्स खिताब (द नाइजिरिया एफ-1 फ्यूचर्स) जीता।

साल 2011 में चीन में खेले गए निंग्बो चैलेंजर में अपना पहला डबल्स एटीपी चैलेंजर खिताब जीतने के बाद शरण ने आगे चलकर 19 और फ़्यूचर्स खिताब हासिल किए।

यही नहीं हमवतन करण रस्तगो के साथ जोड़ी बनाकर दिविज शरण पहले सेट में पिछड़ने के बाद चेक गणराज्य के जान हर्निच और एस्टोनिया के जुएरगेन ज़ोप को 3-6, 7-6 (7-3), 13-11 से हरा दिया।

वो साल जब दिविज शरण ने दिखाया अपना दम

एटीपी चैलेंजर टूर पर सफलता का पहला स्वाद चखने के बाद दिविज शरण 2012 में आठ और मौकों पर फाइनल में पहुंचे, जिनमें से दो में उन्होंने जीत भी दर्ज की।

युकी भांबरी के साथ जोड़ी बनाकर दिविज शरण ने मई में दक्षिण कोरिया में बुसान चैलेंजर जीता और उसके बाद विष्णु वर्धन के साथ बैंकॉक चैलेंजर में एक और जीत हासिल की।

मेंस युगल विजेता पूरव राजा और दिविज शरण ने 2016 के मैनचेस्टर, इंग्लैंड में एगॉन मैनचेस्टर ट्रॉफी के साथ पोज़ दिया।

एटीपी में मिली सफलता के बाद दिविज शरण ने न्यूजीलैंड के खिलाफ डेविड कप में पदार्पण किया, जिसकी वजह से वो डबल्स की रैंकिंग में शीर्ष 100 के करीब (107) पहुंच सके।

आने वाले वर्षों में शरण सफलता की सीढ़ियां चढ़ते गए, जिसमें 2013 क्योटो चैलेंजर का खिताब भी शामिल है। आपको बता दें कि ये पहला खिताब था जिसे दिविज शरण ने पुरव राजा के साथ मिलकर जीता था, जो शायद उनके सबसे सफल साथी रहे होंगे।

इसके अलावा दोनों ने उस साल विम्बलडन के मुख्य ड्रॉ के लिए सफलतापूर्वक क्वालीफाई किया, ये दोनों खिलाड़ियों के लिए पहला ग्रैंड स्लैम प्रतियोगिता था। दिविज शरण ने आखिरकार युगल रैंकिंग के शीर्ष 100 को क्रैक करते हुए 71वें स्थान पर पहुंच गए।

युकी भांबरी के साथ मिलकर, दिविज शरण ने 2014 में अपना पहला एशियाई खेल पदक जीता, 2014 में उन्होंने कांस्य पदक पर कब्जा किया था जबकि पूरव राजा के साथ मिलकर क्योटो चैलेंजर का खिताब अफने नाम किया।

दिविज शरण का संघर्षपूर्ण साल

साल 2015 में साधारण प्रदर्शन करने वाले शरण ने उस साल केवल चार चैलेंजर फाइनल में प्रवेश किया, जिसकी वजह से उनकी रैंकिंग में गिरावट आई और वो 134 रैंक पर चले गए। साल 2016 में दीविज शरण ने धमाकेदार वापसी की, जिसमें उन्होंने चार एटीपी चैलेंजर खिताब जीते और मैक्सिको में लॉस काबोस ओपन में पूरव राजा के साथ मिलकर दूसरा एटीपी वर्ल्ड टूर खिताब अपने नाम किया।

उस साल उन्होंने अपनी रैंकिंग में काफी सुधार की और साल के खत्म होते होते वो 63वें स्थान पर आ गए। साल 2017 में उन्होंने स्कॉट लिपस्की को अपना डबल्स पार्टनर बनाया, और दोनों ने बेल्जियम में यूरोपीय ओपन का खिताब जीतकर जश्न मनाया, जहां इन दोनों ने सैंटियागो गोंजालेज और जूलियो पेराल्टा को 6-4, 2-6, (10-5 से हराया, ये शरण के लिए तीसरा एटीपी खिताब था।

दिविज शरण ने एशिया में बजाया डंका

रोहन बोपन्ना के साथ जोड़ी बनाकर, दिविज शरण ने जकार्ता में 2018 एशियाई खेलों में कजाकिस्तान के अलेक्सांद्र बब्लिक और डेनिस येवसेव के खिलाफ 6-3, 6-4 से जीतकर स्वर्ण पदक जीता। रैंकिंग में 39वें स्थान पर पहुंचकर दिविज शरण ने साल का समापन किया, वो दूसरे साल में शीर्ष 50 खिलाड़ियों में बने रहे।

रोहन बोपन्ना के साथ पुणे ओपन पर कब्जा करने वाले दिविज शरण के लिए 2019 के सीज़न ने उन्हें सबसे ऊंचाई पर पहुंचाया। इसके बाद निराशाजनक नतीजों के कारण दोनों ने अपनी साझेदारी को समाप्त कर दिया। हालांकि उस साल इगोर ज़ेलेने के साथ मिलकर शरण ने पांचवें एटीपी टूर खिताब जीतकर साल का अंत बेहतरीन अंदाज में किया।

दिविज शरण हैं टोक्यो 2020 में भारत की उम्मीद

आपको बता दें कि इस साल ही ओलंपिक खेलों का आयोजन होना है, ऐसे में टोक्यो 2020 में भारत को पदक दिलाने वाले खिलाड़ियों की उम्मीदों में से एक दिविज शरण भी हैं।

महाराष्ट्र ओपन के साथ, शरण पिछले साल की तरह अपनी सफलता को दोहराने की उम्मीद कर रहे होंगे और अपनी 53वीं रैंकिंग में सुधार करना चाहेंगे, क्योंकि ओलंपिक का ड्रा अब नजदीक आ गया है।