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मैं और रोहन अच्छी तरह से टोक्यो की परिस्थितियों से वाकिफ़ हैं: दिविज शरण

भारत की दूसरी सबसे ऊंची रैंकिंग वाली जोड़ी ने ये भी बताया कि उन्होंने एक दूसरे को अपना जोड़ीदार क्यों बनाया।

लेखक विवेक कुमार सिंह ·

2020 ओलंपिक के टेनिस मैच एरिएक टेनिस पार्क में आयोजित किए जाएंगे, इस वेन्यू से दिविज शरण और रोहन बोपन्ना अच्छी तरह से परिचित हैं। वर्तमान में रोहन बोपन्ना (Rohan Bopanna) दुनिया में 36वें स्थान पर हैं, और दिविज शरण (Divij Sharan) 56वें स्थान पर हैं, जिन्होंने जापान ओपन 2019 के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई थी।

दिविज शरण का मानना है कि 2020 टोक्यो ओलंपिक में वेन्यू से परिचित होना भारत के लिए बड़ा लाभ हो सकता है। ओलिंपिक चैनल के साथ एक विशेष इंटरव्यू में दिविज शरण ने कहा "यह बहुत अच्छा है कि ओलंपिक टोक्यो में हो रहा है क्योंकि मैं और रोहन बोपन्ना दोनों टोक्यो की स्थितियों को अच्छी तरह से जानते हैं। हम पालमबांग में खेले, जो एक समान सतह वाला हार्ड कोर्ट था। हमने एशियाई खेलों में अच्छा प्रदर्शन किया और टोक्यो में वैसी ही समान सतह है। मुझे जापान में खेलना बहुत पसंद है”। 

"हम पूरे सप्ताह में शीर्ष खिलाड़ियों के ख़िलाफ़ प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, और ये कोई नई बात नहीं है। मेरे और रोहन के पास उच्च रैंक वाले विरोधियों के ख़िलाफ़ अच्छा रिकॉर्ड है। बस आपको बड़े स्टेज के लिए तैयार रहने की जरूरत है। मुझे नहीं लगता कि हम ओलंपिक में अच्छा प्रदर्शन क्यों नहीं कर सकते।”

दिविज शरण और रोहन बोपन्ना ने 2019 की शुरुआत में जोड़ी बनाई थी और उन्होंने घरेलू मैदान पर पुणे ओपन युगल खिताब जीतकर धमाकेदार वापसी की, जो एटीपी टूर में दिविज शरण का चौथा खिताब था।

दिविज शरण और अर्टेम सिटेक हुए ऑस्ट्रेलियन ओपन से बाहर।  

हालांकि, इस जोड़ी ने अपनी निम्न संयुक्त रैंकिंग का हवाला देते हुए साझेदारी को समाप्त करने का फैसला किया, दिविज शरण का मानना है कि वो और रोहन बोपन्ना एक दूसरे के खेल से अच्छी तरह वाकिफ़ हैं और दूसरे खिलाड़ी के साथ अभ्यास की कमी एक समस्या हो सकती है।

"मुझे नहीं लगता कि यह एक समस्या है। हमने कई बार एक-दूसरे के साथ खेला है और हमें अभी भी एक-दूसरे के साथ अभ्यास करने का समय मिला है। मुझे यकीन है कि हमें ओलंपिक से पहले एक साथ खेलने के अवसर मिलेंगे और हम टोक्यो के लिए तैयार होंगे।”

ऐसे निकलेंगे भारत से ओलंपिक के लिए पदकधारी

ओलंपिक में भारतीय टेनिस के लिए एकमात्र पदक 1992 ओलंपिक में आया था, जहां लिएंडर पेस (Leander Paes) ने सिंगल्स इवेंट में कांस्य पदक जीता। सानिया मिर्जा (Sania Mirza)और रोहन बोपन्ना की मिश्रित युगल जोड़ी कांस्य पदक मैच हारने से पहले 2016 ओलंपिक में कांस्य पदक हासिल करने के बेहद करीब पहुंच गई थी।

दिविज शरण का मानना ​​है कि टूर्नामेंट और बेहतर प्रारूप भारतीय एथलीटों को ओलंपिक पदक के लिए और प्रोत्साहित करेगा। 

“टेनिस एक ऐसा खेल है जिसे हर देश खेलता है और अंत में केवल तीन खिलाड़ी या टीम पोडियम पर पहुंचते हैं। लेकिन हमारे पास महेश भूपति (Mahesh Bhupathi) लिएंडर पेस, सानिया मिर्जा और रोहन बोपन्ना हैं जिन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया है और पदक जीतने के करीब पहुंचे हैं। तो ऐसा नहीं है कि भारत पदक नहीं जीत सकता।

दिविज शरण ने कहा “मैं अन्य देशों में शानदार इवेंट और योजनाएं देखता हूं जहां खिलाड़ियों का समर्थन बहुत ज्यादा किया जाता है और कई टूर्नामेंट खेले जाते हैं। इसलिए, अगर ऐसा ही हमारे देश में होने लगे, तो मुझे यकीन है कि हम खिलाड़ियों को रैंकिंग में और ऊपर देख सकते हैं और ओलंपिक में भी अधिक संभावनाएं होंगी”।