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दुती चंद ने तोड़ा रिकॉर्ड, बोलीं- टोक्यो 2020 के लिए यह काफी नहीं

एक नया नेशनल रिकॉर्ड बनाने के बाद भारत की सबसे तेज़ महिला स्प्रिंटर ने ओलंपिक चैनल से हुए एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा कि उनका ‘रोड टू टोक्यो 2020’ का सफर काफी मुश्किल हो सकता है।

लेखक रितेश जायसवाल ·

भारतीय स्प्रिंटर दुती चंद (Dutee Chand) ने शनिवार को खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में 100 मीटर के फाइनल में एक आसान जीत के साथ अपने ओलंपिक वर्ष की शुरुआत की है, लेकिन अभी भी टोक्यो 2020 में जगह बनाने के लिए उन्हें काफी मेहनत करने की जरूरत है। भुवनेश्वर के कलिंगा स्टेडियम में दुती ने खिताब के लिए दौड़ लगाते हुए अपना नया नेशनल यूनिवर्सिटी रिकॉर्ड बनाया और आने वाले समय के लिए अपनी तैयारियों से खुद को और बेहतर करने की ठानी है।

हर दिन 2020 ओलंपिक के करीब आते हुए दुती चंद को पता है कि टोक्यो 2020 के लिए क्वालिफिकेशन सुनिश्चित करने के लिए उनके पास ज्यादा समय नहीं है।

दुती अभी भी भारत की सबसे तेज महिला धावक हैं - 100 मीटर दौड़ में उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ 11.22 सेकंड है - लेकिन वह अभी भी 11.15 सेकंड के ओलंपिक क्वालीफाइंग लक्ष्य से काफी दूर हैं। 24 वर्षीय दुती जानती हैं कि दौड़ के समय को बेहतर करने के लिए कड़ी मेहनत करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, "विश्व निकाय (विश्व एथलेटिक्स) ने जो क्वालिफिकेशन समय निर्धारित किया है, वह मेरे लिए वास्तव में मुश्किल है।"

उन्होंने आगे कहा, “मेरा व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ अभी क्वालिफिकेशन समय के नज़दीक भी नहीं है। लेकिन मैं अभी भी कोशिश कर रही हूं। मुझे आशा है कि मेरी मेहनत रंग लाएगी। ओलंपिक... सबसे बड़ी प्रतियोगिता है, इससे बड़ा कुछ नहीं है! मैंने पहली बार चार साल पहले रियो ओलंपिक में हिस्सा लिया था। अब मैं टोक्यो 2020 में भी शामिल होने की उम्मीद कर रही हूं।”

दुती चंद के लिए महत्वूर्ण समय

दुती चंद ने 2019 सीज़न की शुरुआती छमाही में एक बेहतरीन दौड़ लगाई। जिससे यह कयास लगाए जाने लगे कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 100 मीटर की दौड़ जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन सकती हैं। हालांकि वह उस गति को कायम ऱखने में असफल रहीं और जल्द ही उनके प्रदर्शन में गिरावट देखने को मिली। अब वह साल 2020 में खुद को बेहतर बनाने में लगी हैं।

दुती चंद ने अपने प्रशिक्षण पर बात करते हुए कहा, “मैंने अक्टूबर में प्रशिक्षण शुरू किया। मैं धीरज के साथ खुद को तैयार करने में लगी रही। मैं अब अपनी गति पर काम करूंगी। मुझे लगता है कि पिछले कुछ महीनों में मैंने जिस तरह का प्रशिक्षण लिया है, वह मेरे लिए काफी लाभदायक सिद्ध हो सकता है।

दुती चंद ने अपने ओलंपिक वर्ष की शुरुआत खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में अपने ही रिकॉर्ड को तोड़ने के साथ की। फोटो साभार: KIUG मीडिया

भारत की शीर्ष धावक यह जानती हैं कि यदि वह ओलंपिक क्वालिफाइंग लक्ष्य से पीछे हैं तो उनके प्रयास अभी पर्याप्त नहीं हैं। भारत में इवेंट की संख्या और प्रतिस्पर्धाओं के स्तर ने भी कुछ स्तर पर उन्हें सीमित कर दिया है। दुती चंद को पता है कि उन्हें टोक्यो 2020 में हिस्सा लेने के लिए अभी कड़ी मेहनत करने की जरूरत है।

अच्छी प्रतियोगिताओं और प्रतिस्पर्धियों की कमी

देश में प्रतियोगिताओं की स्थिति पर ध्यान आकर्षित करते हुए उन्होंने कहा, “आपने देखा होगा कि अन्य देशों में हर महीने 2-3 प्रतियोगिताएं होती हैं। लेकिन यहां भारत में, हमें अच्छी प्रतियोगिताओं के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है”।

“भले ही भारतीय ग्रांड प्रिक्स हो, या फेडरेशन कप, अपने देश में पूरे वर्ष में शायद ही 3-4 प्रतियोगिताएं होती हैं। जो प्रतियोगिताएं होती भी हैं, उनमें बेहतरीन प्रतिभागियों की संख्या बेहद कम होती है। प्रतिभाशाली एथलीटों को देश में अच्छी प्रतिस्पर्धा करने का अवसर ही नहीं मिलता है। यहां कोई नहीं है जो आपको अपनी सीमाओं से परे जाकर बेहतर बनाने पर जोर दे। मुझे लगता है इसी वजह से हम अपने अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धियों से बेहतर समय में दौड़ को खत्म नहीं कर पाते हैं।

अपने पूरे करियर के दौरान प्रतिकूल परिस्थितियों से जूझने और उनसे लड़कर जीत हासिल करने वाली दुती चंद को एक बार फिर अपनी प्रतिभा और खुदपर भरोसा करना होगा, तभी वह टोक्यो के नेशनल स्टेडियम में दौड़ लगाने के लिए पहुंच सकेंगी। वैसे आश्चर्य की बात नहीं होगी अगर यह महिला फर्राटा धावक टोक्यो ओलंपिक में अपनी जगह बनाने में सफल रहती है, क्योंकि वह इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी तरह से संकल्पित नज़र आ रही हैं।