उसैन बोल्ट के ओलंपिक करियर के यादगार स्वर्णिम पल

बीजिंग 2008 में रेस के हीरो बनने से रियो 2016 में पदकों की हैट्रिक लगाने तक का सुनहरा दौर। आइए उसैन बोल्ट के इस स्वर्णिम सफर पर एक नज़र डालते हैं।

जब कभी भी दुनिया के उम्दा धावकों की बात होती है, तो जमैका को बीते वर्षों में कई स्टार एथलीट देते हुए देखा गया है। उनमें प्रमुख नाम हैं- शैली-एन फ्रेजर-प्राइस, योहान ब्लेक और इलेन थॉम्पसन। लेकिन इन सबसे भी बड़ा एक और नाम उसैन बोल्ट का है।

उन्होंने ओलंपिक और वर्ल्ड चैंपियनशिप में वह मुकाम हासिल किया है, जो दुनियाभर के धावकों के लिए तोड़ पाना काफी मुश्किल हो गया है। आज उनके जन्मदिन (21 अगस्त) पर हम उसैन बोल्ट के 5 बेहतरीन पलों को याद कर रहे हैं।

उसैन बोल्ट का जन्म 21 अगस्त 1986 को जमैका में हुआ था। आपको जानकर हैरानी होगी कि पहले उनकी रुचि क्रिकेट में ज्यादा थी। लेकिन उनके क्रिकेट कोच ने पिच पर उनके दौड़ने की स्पीड को देखकर उन्हें धावक बनने की सलाह दी।

इसके बाद वह अपने इस नए सफर पर निकल पड़े। 2002 में जूनियर किंग्सटन चैंपियनशिप जीतने के बाद से इन्होंने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। इस जीत के साथ ही वह जूनियर गोल्ड मेडल जीतने वाले दुनिया के सबसे युवा एथलीट बन गए। उस समय 15 साल के बोल्ट का कद 6 फीट 5 इंच का हो चुका था। 200 मीटर की यह रेस उन्होंने 20.61 सेकेंड में खत्म की।

बोल्ट ने इसके बाद 2003 में वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप में 200 मीटर की रेस को 20.40 सेकेंड में खत्म कर गोल्ड मेडल जीता। साल 2004 में 17 साल की उम्र में वह एक प्रोफेशनल स्प्रिंटर बन गए।

एथेंस ओलंपिक 2004 में बोल्ट ने बहुत उत्साह के साथ हिस्सा लिया, लेकिन पैरों की चोट की वजह से 200 मीटर की रेस खत्म करने में उन्हें 21.05 सेकेंड का समय लग गया। इस वजह से वह दौड़ से बाहर हो गए।

2005 में बोल्ट ने अपने नए कोच ग्लेन मिल्स के सानिध्य में ट्रेनिंग शुरू की। जिसके बाद मिल्स ने बोल्ट के करियर को बदलकर रख दिया। बोल्ट का शुमार उस दौरान दुनिया के शीर्ष पांच रैंकिंग वाले धावकों में किया जाने लगा।

लेकिन हैमस्ट्रिंग इंजरी के कारण वह 2006 के कॉमनवेल्थ खेलों से बाहर हो गए। इसके बाद 2007 में ओसाका में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में 200 मीटर की रेस 19.91 सेकेंड में दौड़कर उन्होंने सिल्वर मेडल जीता। इस दौड़ को टाइसन ने 19.76 सेकेंड में खत्म कर गोल्ड मेडल जीता।

इसके बाद 2008 में बोल्ट ने रीबॉक ग्रैंड प्रिक्स में 100 मीटर की रेस 9.78 सेकेंड में पूरी करके नया वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम कर दिया।

बीजिंग ओलंपिक 2008 से शुरू हुआ स्वर्णिम सफर

ओलंपिक में बोल्ट की कामयाबी का सिलसिला 2008 बीजिंग से शुरू हुआ जो आने वाले एक दशक तक उसी लय में जारी रहा। इस ओलंपिक में बोल्ट ने 100 मीटर रेस 9.69 सेकेंड, 200 मीटर रेस 19.30 सेकेंड और 4x100 मीटर रिले में गोल्ड मेडल जीतते हुए अपना बुलंद आगाज़ किया। 

इसके बाद 2009 में बर्लिन में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में 100 मीटर की रेस को बोल्ट ने 9.58 सेकेंड में पूरी करके अपना ही रिकॉर्ड तोड़ते हुए नया विश्व कीर्तिमान बनाया।

यह वर्ल्ड चैंपियनशिप में उनका पहला गोल्ड मेडल था। इसी प्रतियोगिता में बोल्ट ने 200 मीटर की रेस को 19.19 सेकेंड में खत्म करके एक और नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। ये दोनों वर्ल्ड रिकॉर्ड अब भी कोई नहीं तोड़ पाया है।

बोल्ट ने इसके बाद दिएगु में हुई 2011 की वर्ल्ड चैंपियनशिप में 200 मीटर और 4x100 मीटर रिले रेस में गोल्ड हासिल किया। लेकिन 100 मीटर की रेस में फाल्स स्टार्ट के कारण वो मेडल जीतने से चूक गए।

लंदन ओलंपिक 2012 में तीन गोल्ड

लंदन ओलंपिक में भी बोल्ट ने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा। उन्होंने 100 मीटर की रेस 9.63 सेकेंड में पूरी करते हुए नया ओलंपिक रिकॉर्ड बनाकर यह गोल्ड मेडल जीता। इसके साथ ही 200 मीटर की रेस को 19.32 सेकेंड में दौड़कर गोल्ड हासिल किया। फिर 4x100 मीटर रिले रेस में भी गोल्ड मेडल जीतकर उन्होंने हैट्रिक लगा दी।

इसके बाद 2013 के मास्को में हुई वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप और 2015 की बीजिंग में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में 100 मीटर, 200 मीटर और 4x100 मीटर रिले रेस मे कुल 6 गोल्ड मेडल जीते।

रियो ओलंपिक 2016

साल 2016 में रियो में हुए ओलंपिक में भी बोल्ट का स्वर्णिम सफर जारी रहा। उन्होंने 100 मीटर, 200 मीटर और 4x100 मीटर रिले रेस में गोल्ड मेडल जीता। इसी के साथ उन्होंने लगातार तीन ओलंपिक खेलों के तीनों इवेंट्स में 9 गोल्ड मेडल हासिल करके इतिहास रच दिया।

हालांकि 2008 बीजिंग ओलंपिक में 4x100 मीटर रिले का गोल्ड जीतने वाली जमैका टीम के नेस्टा कार्टर के डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद यह गोल्ड मेडल जमैका से छीन लिया गया।

फिर बोल्ट ने लंदन में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा लिया और यहीं से उन्होंने अपने प्रोफेशनल रेसिंग करियर को अलविदा कह दिया। लेकिन एक बेहतरीन स्वर्णिम सफर पर चलते हुए नए कीर्तिमान बनाने वाले इस धावक को दुनिया हमेशा याद रखेगी। इसमें कोई दो राय नहीं कि बोल्ट को सर्वकालिक महान खिलाड़ियों में गिना जाएगा।

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