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उतार चढ़ाव से भरा रहा है भारतीय हॉकी टीम के स्ट्राइकर गुरजंत सिंह का करियर

भारतीय हॉकी टीम में डेब्यू करने के बाद से ही इस युवा स्ट्राइकर को पूरे एक सीज़न के लिए टीम में अपनी जगह बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ा है, उनको लगता है कि ओलंपिक वाला साल कुछ अलग होगा। 

लेखक विवेक कुमार सिंह ·

बात अगर गुरजंत सिंह (Gurjant Singh) की करें तो भारतीय फैंस उन्हें हॉकी टीम में सबसे तेज़ी से गोल करने वाले खिलाड़ियों में से एक के रूप में जानते हैं।

ये साल 2016 के एफआईएच जूनियर विश्व कप के फाइनल में हुआ था, ये वो जगह थी जहां इस भारतीय हॉकी खिलाड़ी की प्रतिभा पहली बार देखने को मिली। एफआईएच प्रो लीग के शुरुआती गेम में ये फिर देखने को मिला, जहां गुरजंत सिंह ने नीदरलैंड के खिलाफ पहले मैच में एक शानदार अवसर के लिए मुश्किल से 13 सेकंड का समय लिया।

दोनों अवसरों पर बिना कोई चतुराई दिखाए गोल करने में वन-टच शॉट्स में में शामिल होना उनकी काबिलियत दर्शाने के लिए काफी थी जो कभी कभार ही भारतीय स्ट्राइकरों में देखने को मिलता है, जिसने भारतीय हॉकी को हैरान कर दिया।

कभी चार साल पहले सीनियर टीम की ओर रुख करने के बाद, 25 वर्षीय ने बमुश्किल 44 मैच खेलने में कामयाबी पाई है और अक्सर चोटों और खराब फॉर्म के कारण खुद को हॉकी से दूर पाया है। हालांकि उन्होंने जब भी खेला है भारतीय हॉकी टीम के लिए उनका प्रदर्शन अच्छा रहा है।

अमृतसर में जन्मे गुरजंत सिंह को 2018 सीज़न में खराब प्रदर्शन के बाद एशियाई खेलों और एफआईएच विश्व कप से भारतीय हॉकी टीम से बाहर कर दिया गया था। एक साल बाद एक अभ्यास मैच के दौरान नाक में फ्रैक्चर होने की वजह से उन्हें सुल्तान अजलान शाह कप से भी बाहर होना पड़ा था।

उतार-चढ़ाव से भरा है गुरजंत सिंह का करियर

सीनियर टीम में जगह बनाने के बाद अपने करियर के बारे में ओलंपिक चैनल से बात करते हुए गुरजंत सिंह ने कहा कि “मेरी शुरूआत तो अच्छी रहती है लेकिन मैं उसे जारी नहीं रख पाता हूं।”

“पिछला सीज़न उतार-चढ़ाव से भरा हुआ था, चोट की वजह से मैं 3-4 महीने तो खेला ही नहीं। ”ये एक दौर है। जब से मैंने सीनियर टीम के लिए पदार्पण किया है, तब से मेरे लिए यही चल रहा है। सबसे पहले, ये फॉर्म (2018 एशियाई खेलों से पहले) वजह थी और जब मैंने वापसी की (2019 सुल्तान अजलान शाह कप से पहले) तो चोट मेरे रास्ते का कांटा बन गया।"

गुरजंत सिंह ने कहा कि “हालांकि इस तरह का दौर अक्सर किसी एथलीट को संदेह के घेरे में धकेलता है और अपने करियर के बारे में सोचने पर मजबूर करता है।”

भारतीय स्ट्राइकर गुरजंत सिंह उम्मीद करते हैं कि भारतीय हॉकी टीम में वो पूरे सीज़न के लिए अपनी जगह सुनिश्चित कर पाएंगे। फोटो: हॉकी इंडिया

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि मैं हर बार टीम से बाहर होने की वजह से मानसिक रूप से मजबूत हुआ हूं। हर बार जब मैं बाहर हुआ या चोटिल हो गया, तो मैंने अपने आप को बहुत मुश्किल से प्रोत्साहित किया। मैं टीम में रहना चाहता हूं और इसके लिए जितनी मेहनत करनी पड़े मुझे करनी है।“

गुरजंत सिंह के आगे की योजना

इस युवा स्ट्राइकर के लिए टीम में वापसी करना किसी टू स्टेप प्रक्रिया जैसी है। "मुझे लगता है, एक बार जब आप बाहर हो जाते हैं, तो सबसे पहले, आपको खुद को यह विश्वास दिलाने की ज़रूरत होती है कि आप अभी भी टीम में बने रहने के लिए अच्छे हैं और फिर आपको उस खिलाड़ी से बेहतर प्रदर्शन करने की जरुरत है जिसने टीम में आपकी जगह ली है। जिसके लिए दोगुना प्रयास करना होता है।“

"मुझे लगता है, ये सब संभावनाओं का खेल है। राष्ट्रीय शिविर में होने से वास्तव में मुझे फॉर्म में वापस आने में मदद मिली है और मेरे खेल पर भी फ़र्क पड़ा है। जब आप उन लोगों के साथ होते हैं जो चाहते हैं कि आप टीम में वापस रहें और ऐसा करने में आपको उनसे अतिरिक्त मदद मिल जाए, तो प्रेरणा की कमी कभी नहीं होती है।”

भारतीय हॉकी टीम के लिए इस सीज़न में अब तक खेले गए मैचों में उनका प्रदर्शन अच्छा रहा है, गुरजंत सिंह उस दौर से बाहर निकलने के लिए तैयार हैं जो अक्सर उन्हें आगे जाने से रोक देता था। लेकिन उसका एकमात्र तरीका ये है कि वो चोट से दूर रहें और अपने हॉकी के स्तर को कम न होने दें।