फ़ीचर | हॉकी

हरमनप्रीत सिंह के कंधों पर होगी भारत को टोक्यो ओलंपिक के पोडियम तक पहुंचाने की ज़िम्मेदारी 

दुनिया की पांचवें नंबर की भारतीय हॉकी टीम टोक्यो ओलंपिक से ठीक पहले बेहतरीन फ़ॉर्म में है, ठीक वैसे ही जैसे इस टीम के डिफ़ेंडर हरमनप्रीत सिंह हैं। 

लेखक सैयद हुसैन ·

जब बात भारतीय हॉकी की होती है तो दिमाग़ में हरमनप्रीत सिंह का नाम सबसे पहले आता है। भारतीय हॉकी की कई जीतों में इस डिफ़ेंडर का योगदान अतुलनीय रहा है। उन्हीं की बदौलत भारत ने टोक्यो 2020 के लिए भी क्वालिफाई किया है। हरमनप्रीत इस टीम की एक बेहद मज़बूत कड़ी हैं।

टोक्यो 2020 ओलंपिक के लिए खेले गए पहले और दूसरे दोनों ही क्वालिफ़ायर में भारत को जीत दिलाने में इस खिलाड़ी की भूमिका अहम रही।

भारतीय हॉकी टीम के इस खिलाड़ी के जन्मदिन के मौक़े पर हम जानते हैं कि कैसे हरमनप्रीत को हॉकी से प्यार हुआ और अब तक कैसा रहा है उनका हॉकी का सफ़र।

खेत में चलाया ट्रैक्टर

6 जनवरी 1996 को पंजाब के अमृतसर से थोड़ा दूर उन्होंने एक किसान के घर जन्म लिया था। कम उम्र में खेत में चलने वाले ट्रैक्टर के पहियों के साथ हरमनप्रीत ख़ूब खेला करते थे, जिसे देखकर उनके पिता ने उन्हें ट्रैक्टर चलाने की इजाज़त दी।

ट्रैक्टर चलाने और खेत में काम करते-करते हरमनप्रीत के हाथ और कंधें बेहद मज़बूत हो गए थे, ट्रैक्टर में लगने वाले भारी हल को उठाने की ताक़त ने ही उन्हें ड्रैग फ़्लिक में दक्षता दिला दी।

ख़ुद ही चलाई क़िस्मत की गाड़ी

बचपन से ही हरमनप्रीत को हॉकी का भी शौक़ था। 15 साल की उम्र में ही वह जालंधर में सुरजीत हॉकी अकादमी में दाख़िला लेने पहुंच गए थे, जहां उनका सपना था एक अच्छा फ़ॉर्वर्ड खिलाड़ी बनना।

लेकिन 2014 में जब उन्होंने मलेशिया में आयोजित सुल्तान जोहोर कप में डेब्यू किया तो उनके खेलने की शैली और ताक़त डिफ़ेंडर की थी। उस वक़्त 18 वर्षीय हरमनप्रीत ने अपने खेल का जादू दिखाते हुए पेनल्टी कॉर्नर्स के ज़रिए कुल 9 गोल किए थे। आख़िरी लम्हों में शॉट तब्दील करने की ताक़त हमेशा ही गोलकीपर को उलझन में डाल देती है।

अगले साल मलेशिया में ही हरमनप्रीत सिंह को और क़ामयाबियां हासिल हुईं, जहां उन्होंने 2015 मेंस हॉकी जूनियर एशिया कप में टीम को गोल्ड मेडल जिताया और ख़ुद 14 गोलों के साथ टूर्नामेंट के टॉप स्कोरर रहे।

स्वर्णिम यादें

2016 वह साल था जिसने हरमनप्रीत को पूरी तरह बदल दिया और ये सफ़र आज भी जारी है, 101 मुक़ाबलों में उनके नाम अब तक 56 गोल हैं।

लंदन में हुई 2016 मेंस हॉकी चैंपियंस ट्रॉफ़ी के कांस्य पदक मैच में हरमनप्रीत ने गोल दागा और उस टूर्नामेंट में उन्हें ‘यंग प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट’ के ख़िताब से भी नवाज़ा गया।

इसके बाद बारी थी रियो 2016 ओलंपिक की, जहां उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया और भारत की ओर से सबसे कम उम्र में ओलंपिक में शिरकत करने वाले भारतीय हॉकी खिलाड़ियों में से एक बने। साल 2016 का अंत उन्होंने गोल्ड मेडल के साथ किया जब लखनऊ में आयोजित मेंस हॉकी जूनियर वर्ल्ड कप में टीम को जीत दिलाई, साथ ही साथ 2016-17 मेंस एफ़आईएच हॉकी वर्ल्ड लीग सीज़न में भी उन्होंने कांस्य पदक जीता।

2017 में भी हरमनप्रीत ने अपना ये फ़ॉर्म जारी रखा, मेंस हॉकी एशिया कप के दसवें संस्करण में उन्होंने कुल 7 गोल किए और प्रतियोगिता के टॉप स्कोरर रहे। ख़िताबी भिड़ंत में भारत ने मलेशिया को 2-1 से शिकस्त देकर चैंपियनशिप ट्रॉफ़ी जीती थी।

8 दिसंबर 2018 को कलिंगा स्टेडियम में खेले गए भारत बनाम कनाडा एफ़आईएच मेंस हॉकी वर्ल्ड कप के उद्घाटक मैच में हरमनप्रीत सिंह ने पहला गोल दागा

2018 में खेले गए मेंस हॉकी चैंपियस ट्रॉफ़ी के आख़िरी संस्करण में हरमनप्रीत सिंह और भारत को रजत पदक से संतोष करना पड़ा था, क्योंकि बेहद क़रीबी मुक़ाबले में ऑस्ट्रेलिया के हाथों पेनल्टी शूटआउट में भारतीय टीम को शिकस्त झेलनी पड़ी थी। चैंपियस ट्रॉफ़ी के स्थान पर अगले साल से हॉकी प्रो लीग की शुरुआत हो गई।

तैयारी टोक्यो की

टोक्यो 2020 की ओर कदम बढ़ाते हुए, 23 वर्षीय हरमनप्रीत और भारतीय टीम शानदार फ़ॉर्म में दिख रही है। 2019 में भारत ने न्यूज़ीलैंड को 5-0 से हराते हुए अगस्त में ओलंपिक टेस्ट इवेंट जीता। इसके बाद बेल्जियम दौरे पर भारत ने स्पेन को 5-1 से करारी शिकस्त भी दी, जो एक के बाद एक तीन जीत थी।

नियमित कप्तान मनप्रीत सिंह के साथ हरमनप्रीत सिंह पूरी तरह से वर्ल्ड नंबर-5 टीम को टोक्यो 2020 के पोडियम तक पहुंचाने के लिए तैयार हैं। ताकि रियो 2016 में मिली क्वार्टर फ़ाइनल की हार को भुलाया जा सके।