फ़ीचर

2018 के राष्ट्रमंडल खेलों के ऐरिना में प्रवेश से रोके जाने का मनु भाकर ने इस तरह दिया था जवाब  

18 वर्षीय भाकर टोक्यो ओलंपिक में भारत की प्रमुख उम्मीदों में शामिल   

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

2018 राष्ट्रमंडल खेलों के माध्यम से जिस तरह से युवाओं ने एक बड़े खेल मंच पर कदम रखा था उस लिहाज से भारत के पदक की दौड़ में निशानेबाजी स्पर्धा सबसे दिलचस्प पहलुओं में से एक था।

इसमें भारत ने 16 पदक हासिल करते हुए शीर्ष स्थान कायम किया था। इनमें सात स्वर्ण पदक शामिल थे। इस 16 पदकों में मनु भाकर (Manu Bhaker) का महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में जीता गया स्वर्ण पदक भी शामिल था। उनके साथी 16 वर्षीय अनीश भानवाला ने पुरुषों की 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल में स्वर्ण पदक और 18 वर्षीय मेहुली घोष ने 10 मीटर एयर राइफल में रजत पदक जीता। 

मनु के पिता रामकिशन भाकर (Ramkishan Bhaker) ने एक ऐसी घटना का जिक्र किया जिसने उनकी बेटी के आत्मविश्वास को बढ़ाया। 

रामकिशन ने ओलंपिक चैनल को बताया, "राष्ट्रमंडल खेलों (2018 गोल्ड कोस्ट) के एरेना में प्रवेश करने के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाले एथलीट ही हस्ताक्षर कर सकते हैं।" 

"इस एरेना में प्रवेश की निगरानी एक अधिकारी द्वारा की जा रही थी। जब मनु ने इसमें प्रवेश किया तो वह दौड़ता हुए वहां पहुंचा और उसे यह कहकर रोक दिया कि जिन एथलीटों ने स्वर्ण पदक जीता है केवल वो ही यहां हस्ताक्षर करके अंदर जा सकते हैं।" 

उन्होंने याद करते हुए कहा, "आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि मनु ने इसका क्या जवाब दिया। उसने कहा कि मैं कल स्वर्ण पदक जीतूंगी, लेकिन मुझे आज तो हस्ताक्षर करके प्रवेश करने दो। लेकिन अधिकारी ने इनकार कर दिया। फिर उसने अधिकारी को पेन लौटाया और कहा कि कल मेरे हाथ में पदक होगा और फिर हस्ताक्षर करूंगी। हमें उस पर पूरा भरोसा था कि वह पोडियम में पहुंचेगी।" 

अगले दिन मनु ने राष्ट्रमंडल खेलों में पहली बार में ही इतिहास रच दिया। उसने 240.9 अंकों के साथ रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता। भारत की ओर से अनुभवी हीना सिद्धू ने भी 234 अंक के साथ रजत पदक जीतकर तीसरा स्थान हासिल किया।

मनु भाकर भी इंटरनेशनल ऑनलाइन शूटिंग चैंपियनशिप में लेंगी हिस्सा। तस्वीर साभार: ISSF

यह क्षण न केवल भारतीय शूटिंग इतिहास के लिए, बल्कि उनके पिता के लिए भी बहुत खास था। मर्चेंट नेवी में मुख्य अभियंता रामकिशन द्वारा बेटी के लिए पैसे खर्च करना और शूटिंग रेंज को सुलभ बनाना, मनु के सपनों की उड़ान के लिए पंख देने जैसा है। उन्होंने अपनी बेटी की शूटिंग में यात्रा को आसान बनाने की हर कोशिश की है। 

उन्होंने कहा, "हर माता-पिता अपने बच्चे के लिए निवेश करते हैं, लेकिन मैं उससे आश्वासन लेता था कि उसे कम से कम 1-2 साल तक खेलना है। शूटिंग काफी खर्चीला खेल है, लेकिन मैंने यह सुनिश्चित किया कि मनु (भाकर) को कोई परेशानी नहीं आये। मैं उससे इस बारे में सोचने की बजाय केवल शूटिंग पर ध्यान देने को कहता था। उसके लिए रेंज तैयार करना मेरा काम था, लेकिन सुबह 4 बजे जग कर वहां पहुंचना उसका काम है। हमने कभी नहीं सोचा था कि वह ओलंपिक में प्रतिस्पर्धा करेगी।" 

मनु का मानना ​​है कि यह उसके पिता की दूरदृष्टि है जिसके कारण उसे जल्द ही सफलता मिली। राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करने के बाद उसका एक खेल दूसरे में बदल गया। 

शूटिंग के लिए तैयार होने से पहले मनु ने विभिन्न खेलों जैसे कि ह्येन लैंग्लोन (एक मणिपुरी मार्शल आर्ट), मुक्केबाजी और टेनिस में भी हाथ आजमाया था। 

उन्होंने कहा, "वह दूरदर्शी हैं। मैंने राष्ट्रीय स्तर पर करीब नौ-दस खेलों को बदला और इनमें अच्छा भी कर रही थी। वो मेरी भावनाओं को समझते थे और मुझे जब भी उनकी जरूरत पड़ी, वो हमेशा मेरे साथ खड़े नजर आये।" 

मनु पहली बार टोक्यो ओलंपिक खेलों में राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करेंगी। उसने मार्च, 2019 में म्यूनिख के ISSF वर्ल्ड कप में चौथा स्थान हासिल करते हुए इस मार्की इवेंट के लिए क्वालीफाई किया था।