वॉलीबॉल के नियम, पोज़ीशन और वे तमाम जानकारियाँ जो आपको पता होनी चाहिए

ओलंपिक गेम्स में वॉलीबॉल खेल को पहली बार 1964 में शामिल किया गया था।

उत्तम उर्जा का दिखना और साथ ही अनुशासन का होना ही वॉलीबॉल की पहचान है। इनडोर वॉलीबॉल की बात करें तो इसने ओलंपिक गेम्स में डेब्यू सन 1964 टोक्यो में किया था। तब से लेकर अब तक यह रुका नहीं है।

वॉलीबॉल को बीच पर भी खेला जाता है और इनडोर भी खेला जाता है। दोनों ही तरीकों के मापदंड अलग होते हैं। सोवियत यूनियन के आ जाने से खेल में फर्क आया आया फिलहाल ब्रज़ील और चीन इस खेल में सर्वश्रेष्ठ स्थान पर हैं।

इस खेल में जहां शुरुआती सालों

में सोवियत यूनियन ने अपना वर्चस्व स्थापित कर लिया था तो धीरे-धीरे अब ब्राज़ील और चीन ने अपनी ताक़त सभी के सामने इस खेल में भी दिखा दी है। ओलंपिक गेम्स में वॉलीबॉल की स्थिति और साथ ही खेल के नियम और इतिहास जानने के लिए आगे पढ़ें।

वॉलीबॉल के नियम

अंतर्राष्ट्रीय वॉलीबॉल संघ (FIVB) की और से वॉलीबॉल के आसान नियम इस तरह हैं।

एक समय पर दो टीम इसमें खेलती हैं और हर टीम में 6 खिलाड़ी अपनी टीम का प्रतिनिधित्व करते हैं। दोनों टीमों के बीच एक नेट बंधा होता है। खेल शुरू होने से पहले सिक्का उछाल कर टॉस किया जाता है और जो जीतता है उसके पास पहले सर्व करने का अधिकार होता है।

सर्व करने का मतलब होता है कि एक खिलाड़ी बेसलाइन के पीछे से गेंद को दूसरी टीम के खेमे (आधे कोर्ट के पार) में फेंकता है और खेल ऐसे ही आगे बढ़ता हैएक टीम के खिलाड़ी केवल 3 बार ही गेंद को छू सकते हैं और उसके बाद उन्हें अपने प्रतिद्वंदियों के खेमे में ही गेंद को डालना होता है। जो खिलाड़ी सामने से आई सर्व को पिच करता है वह फोर आर्म्स से अपने साथियों के लिए गेंद बनाता है और इसे खेल की भाषा में ‘पास’ या ‘बंप सेट’ कहते हैं। जिस खिलाड़ी को ‘पास’ मिलता है या यूं कहें कि जो दूसरे नंबर का खिलाड़ी होता है उसे ‘सेटर’ कहते हैं और उसकी कोशिश होती है कि जितना हो सके वह नेट के उतनी नज़दीक गेंद को ले कर जा सके ताकि तीसरा खिलाड़ी स्मैश का प्रयोग कर अंक बटोर सके। ग़ौरतलब है कि जो भी खिलाड़ी स्मैश मारता है उसे ‘स्पाइक’ कहते हैं।

इसके बाद सामने वाली टीम उस स्मैश को ब्लॉक कर इसी प्रक्रिया को अपनाती है। नेट के पास अमूमन तौर पर सबसे लंबे व सबसे लचकीले खिलाड़ी होते हैं। जब तक कोई फाउल न करे या गेंद ज़मीन पर न टकराए तब तक खेल ऐसे ही चलता है और अगर ऐसा होता है तो सामने वाली टीम को एक अंक मिल जाता है।

वॉलीबॉल में कैसे मिलते हैं अंक

एक गेम में 5 सेट होते हैं और पहले 4 सेट 25 अंकों के होते हैं। अगर पहले दो सेटों में स्कोर 2-2 से बराबर है तो पांचवा सेट 15 अंकों का होता है। हर रैली टूटने के बाद एक अंक मिलता है और जिसके खाते में अंक जाता है वही टीम सर्व करती है। अगर कभी भी स्कोर 24-24 या 14-14 (पांचवें सेट में) बराबर हो गया तो टीम को जीतने के लिए लगातार दो अंकों की ज़रूरत होती है।

वॉलीबॉल में अंक बटोरने का सबसे आम तरीका स्पाइक द्वारा होता है। सबसे ज़्यादा इसी तरीके से एक टीम अंक की प्राप्ति कर अपने कारवां को आगे बढ़ाती है। इसके अलावा कुछ फ़ाउल द्वरा भी अंक बटोरे जा सकते हैं जैसे कि सर्व करते समय लाइन के आगे चले जाना,कोई खिलाड़ी अगर दूसरी बार बॉल को छू रहा है और उस दौरान अगर उसने नेट को भी छू दिया तो वह भी एक फ़ाउल माना जाता है। कोई भी टीम गेंद को दूसरे खेमे में फेंकने के लिए 3 बार से ज़्यादा बार गेंद को छू दे तो इसमें भी वह एक अंक गंवा बैठते हैं। वही दूसरी तरफ अगर गेंद को कोर्ट से बाहर मार दिया तो वह भी फ़ाउल होता है।

वॉलीबॉल में खिलाड़ियों की पोज़ीशन

वॉलीबॉल टीम में 5 पोज़ीशन होती ह, सेंटर्स, मिडल ब्लॉकर्स, आउटसाइड हिटर, वीकसाइड हिटर, लीबरो। जिसमें सेंटर्स का काम होता है कि वह स्पाइकर्स के लिए गेंद को बनाएं ताकि वह स्मैश मार सकें।

मिडल ब्लॉकर्स डिफेंस के साथ आक्रामक खेल भी खेलते हैं। स्पाइकर द्वारा तेज़ी से आ रही स्मैश को रोकने का ज़िम्मा मिडल ब्लॉकर्स का होता है और साथ ही अगर कोर्ट के बीचो बीच गेंद इन्हें मिलती है तो वे अटैक भी करते हैं। आउटसाइड हिटर को साइड हिटर भी कहा जाता है। यह टीम के अहम अटैकर होते हैं और यह कोर्ट की बाईं दिशा पर खेलते हैं।

लीबरो वॉलीबॉल के सबसे दिलचस्प खिलाड़ी होते हैं। उनकी यूनिफार्म भी दूसरों से अलग होती हैं और वह सब्स्टीटयूट की भूमिका निभाते हैं लीबरो को ब्लॉक और अटैक करने की अनुमति नहीं होती और वह बॉल को पास करने के लिए कोर्ट पर आते हैं। या तो वह टीम के सदस्यों को डिफेंस में मदद करते हैं या फिर उनके लिए गेंद को बनाते हैं।।

वॉलीबॉल में स्मैश कैसे मारें

स्मैश को सबसे ताकतवर शॉट माना गया है और इस शॉट से सबसे ज़्यादा अंक बटोरे जाते हैं। स्पाइक पोज़ीशन का खिलाड़ी इसे प्रयोग में ला कर अपनी टीम के लिए अंक प्राप्त करता है। एक स्पाइक प्रमुखता से आउटसाइड हिटर और वीकसाइड हिटर के लिए सुरक्षित रहता है, हालांकि ज़रूरत पड़ने पर मिडिल ब्लॉकर्स भी स्पाइक की भूमिका निभाते हैं ताकि अपनी टीम की आक्रामकता को मज़बूत कर सकें।

एक स्मैश के लिए सेंटर को स्पाइक के लिए गेंद को हवा में उछाल कर बनाना पड़ता है। इस गेंद को नेट से नज़दीक बनाया जाता है और इसके बाद स्पाइक को अपनी दौड़ और कूद में ताल मेल बैठा कर इसे दूसरी टीम के कोर्ट में मारना होता है। सेंटर जितनी ज़्यादा अच्छी बॉल बनाएगा स्पाइक के पास उतना ही अतिरिक्त समय होगा और ऐसे में अंक बटोरना आसान होता है।

एक कारगर स्पाइक की ख़ासियत और ताक़त, टॉपस्पिन होती है। ऐसे में हिटर की कोशिश होती है कि वह गेंद को हाथ के बीचोंबीच से मारे ताकि व गति के साथ दिशा भी प्रदान करे। 

वॉलीबॉल के कोर्ट का साइज़ और बाक़ी उपकरण

FIVB के नियमानुसार वॉलीबॉल कोर्ट 18 मीटर (59 फ़िट) लंबा और 9 मीटर (29.5 फ़िट) चौड़ा होना चाहिए।कोर्ट को दो भागों में बांटा जाता है जिसमे 9 मीटर (29.5 फ़िट) के बाद बीच में नेट लगाया जाता है। नेट का ऊपरी हिस्सा 2.43 मीटर (7.97 फ़िट) की उंचाई पर होता है (मेंस) और 2.24 मीटर (7.35 फ़िट) की ऊंचाई वुमेंस के लिए होती है। अटैकलाइन जो फ्रंट और बैक कोर्ट को बांटती है वह नेट से 3 मीटर (10 फ़िट)  दूर होती है।

FIVB मान्यता की वॉलीबॉल का वज़न 260-290 ग्राम (9.2-9.9 आउंस) होता है और उसका घेरा 65-67 सेंटी मीटर (25.5-26.5 इंच) का होता है और साथ ही उसकी पीएसआई 4.3-4.6 की होती है।

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