फ़ीचर

तरुणदीप राय: एक अनुभवी खिलाड़ी जो अब भी देश की सेवा कर रहे हैं।

भारत के अनुभवी तीरंदाज 2 दशक से भी ज्यादा समय से देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और अभी भी वह रुकने के मूड में नहीं है।

लेखक ओलंपिक चैनल लेखक ·

जब भी ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों का जिक्र होता है तो कई सालों से तरुणदीप राय (Tarundeep Rai) का नाम एकदम से दिमाग में नहीं आता

सिक्किम से ताल्लुक रखने वाले तरुणदीप ने खेल की दुनिया मे अपना एक नया मुकाम हासिल किया है। वैसे भी नॉर्थ ईस्ट से ज्यादा खिलाड़ी अपनी चमक नहीं बिखेर पाते। तरुणदीप से पहले भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान बाइचुंग भूटिया (Bhaichung Bhutia) ने अपने राज्य का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया था, संयोगवश वह तरुणदीप के चचेरे भाई ही है।

यह तीरंदाज अब तक 2 ओलंपिक 2004 एथेंस और 2012 लंदन ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुका है। साल 2008 में हुए बीजिंग ओलंपिक में वह कंधे की चोट के कारण हिस्सा नहीं ले पाए थे। इसके बाद साल 2010 में उन्होंने सफल वापसी की।

निरंतरता की मिसाल

19 साल की उम्र में एशियन तीरंदाजी चैंपियनशिप (Asian Archery Championships) में अपने करियर का आगाज करने वाले तरुणदीप राय लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और इंटरनेशनल टूर्नामेंट में कई मेडल जीत देश का नाम रोशन कर रहे हैं।

इस खिलाड़ी ने अपना पहला गोल्ड मेडल साल 2004 में एशियन ग्रांड प्रिक्स बैंकॉक (Asian Grand Prix Bangkok) में जीता था। इससे पहले तरुणदीप ने एशियन तीरंदाजी चैंपियनशिप (Asian Archery Championship) के टीम इवेंट में कांस्य पदक अपने नाम किया था।

इसी साल तरुणदीप ने वर्ल्ड तीरंदाजी चैंपियनशिप (World Archery Championship) में सिल्वर पदक अपने नाम किया। इसके बाद उन्होंने जकार्ता में हुए एशियन तीरंदाजी ग्रांड प्रिक्स (Asian Archery Grand Prix)में कांस्य पदक जीता।

केवल 21 साल की उम्र में भारतीय सरकार ने तरुणदीप की काबिलियत को पहचाना और साल 2005 में उन्हें अर्जुन अवॉर्ड (Arjuna Award) से सम्मानित किया गया।

साल 2006 में दोहा में हुए एशियन गेम्स में तरुणदीप ने जयंत तालुकदार (Jayanta Talukdar), मंगल सिंह (Mangal Singh) और विश्वास (Viswash) के साथ मेंस रिकर्व टीम इवेंट में कांस्य पदक जीता।

The Indian men’s recurve team that won bronze at the 2006 Asian Games in Doha

चोट के बाद खेल में सफल वापसी

साल 2007 इस खिलाड़ी के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा क्योंकि चोट के कारण उन्हें काफी दर्द झेलना पडा था, वह दौर इतना खराब था कि उन्होंने उल्टे हाथ से प्रैक्टिस शुरू कर दी।

टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि “उस चोट ने मुझे लाइफ के बारे में बहुत कुछ सिखाया, मैंने बाएं हाथ से भी प्रैक्टिस की लेकिन वह कोशिश कामयाब नहीं रही”। “उस दौरान मैं पेन किलर ले रहा था, इसके बावजूद दर्द में था। साल 2008 और 2009 को मैं कभी भूल नहीं सकता”

तरुणदीप ने बताया कि “24 साल की उम्र में उस तरह की सर्जरी सही नहीं थी क्योंकि अधिक्तम खिलाड़ी तो उसी दौर में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं”। हालांकि, तरुणदीप राय ने अपने सपने को साकार करने की कोशिशि की।

इस कोशिश की वजह से इस तीरंदाज ने साल 2009 के अंतिम महीनों में तेहरान में हुए एशियन ग्रांड प्रिक्स सिल्वर पदक जीता। इसी दौरान उन्होंने मेंस रिकर्व टीम के साथ गोल्ड मेडल पर भी कब्जा किया।

कंधे की चोट के एक साल बाद तरुणदीप ने अपना स्वर्णिम दौर देखा और इंटरनेशनल इवेंट में 4 मेडल जीते। इसके बाद साल 2010 में इस खिलाड़ी ने बैंकॉक में हुई सैकेंड एशियन ग्रांड प्रिक्स (2nd Asian Grand Prix) के मेंस रिकर्व में गोल्ड मेडल पर निशाना लगाया। इसके अलावा क्रोशिया में हुए तीरंदाजी वर्ल्डकप (Archery World Cup) में उसी इवेंट में सिल्वर पदक अपने नाम किया।

तरुणदीप उस समय अपनी पूरी फॉर्म में थे, इसी दौरान उन्होंने चीन में हुए तीरंदाजी वर्ल्डकप में रिकर्व में गोल्ड मेडल जीता। इसके अलावा उन्होंने एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीता, एशियन गेम्स में व्यक्तिगत रूप में पदक जीतने वाले वह पहले भारतीय तीरंदाज बने।

शारीरिक मेहनत के साथ तरुणदीप राय ख़ुद को युवा और उभरते हुए तीरंदाज़ों की ही तरह फ़िट रखना चाह रहे हैं।

अभी रुकने का कोई प्लान नहीं

तरुणदीप लगातर 2 दशक से इंटरनेशनल टू्र्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और साल 2019 में हुई वर्ल्ड तीरंदाजी चैंपियनशिप में उन्होंने सिल्वर पदक जीता। इसके अलावा बैंकॉक में हुई एशियन तीरंदाजी चैंपियनशिप के मेंस रिकर्व में वह कांस्य पदक जीतने में सफल हुए। ये प्रदर्शन दिखाता है कि ये खिलाड़ी अभी रुकने वाला नहीं है।

अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही अर्जुन अवॉर्ड पाने वाले इस खिलाड़ी को साल 2020 में भारतीय सरकार ने देश के चौथे सबसे बड़े अवॉर्ड पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित किया। 36 साल का ये तीरंदाज पहले ही ओलंपिक 2020 का कोटा हासिल कर चुका है और अब समय ही बताएगा कि वह मेडल जीतते है या नहीं।