फ़ीचर

ऐतिहासिक लम्हें और ओलंपिक की उम्मीदें, भारतीय मुक्केबाज़ी के लिए कुछ ऐसा रहा 2019

एम सी मैरी कॉम ने इस साल वर्ल्ड चैंपियनशिप में अपना आठवां पदक जीता

लेखक सैयद हुसैन ·

साल 2019 भारतीय शूटींग के लिए शानदार रहा जहां 15 भारतीय शूटर्स ने टोक्यो 2020 ओलंपिक का कोटा हासिल किया। भारतीय हॉकी टीम और बैडमिंटन के सितारों ने भी देश के लिए कई उपलब्धियां हासिल कीं, हॉकी में पुरुष और महिला टीम ने ओलंपिक का टिकट भी हासिल किया तो भारतीय स्वर्ण सुंदरी पी वी सिंधु ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में अपना और देश का पहला स्वर्ण पदक जीता।

इस साल देश के लिए खेलों में इतनी सारी उपलब्धियों के बीच में भारतीय मुक्केबाज़ी की क़ामयाबी ऐसी लग रही है जैसे कि इस पर किसी का ध्यान नहीं गया हो, जबकि भारतीय मुक्केबाज़ों के लिए भी ये साल ऐतिहासिक रहा है। एक तरफ़ एम सी मैरी कॉम ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में जहां अपना रिकॉर्ड आठवां पदक हासिल किया तो अमित पंघल के नाम भी एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक रहा। चलिए एक नज़र डालते हैं कि पिछले 12 महीनों में भारतीय मुक्केबाज़ी में क्या कुछ ख़ास और ऐतिहासिक रहा।

मैरी का जलवा बरकऱार

2012 लंदन गेम्स की कांस्य पदक विजेता मैरी कॉम क़रीब क़रीब दो दशकों से भारतीय महिला मुक्केबाज़ी की पोस्टर गर्ल बन चुकी हैं। मैरी ने इस साल भी उलान उड़े में हुई वर्ल्ड महिला बॉक्सिंग चैंपियनशिप में अपना जलवा बरक़रार रखा, और उन्होंने रिकॉर्ड आठवां पदक हासिल किया। उन्होंने इस दौरान दिग्गज मुक्केबाज़ इंग्रिट वैलेंसिया और जुतामस जिटपॉन्ग को भी शिकस्त दी। मैरी कॉम के नाम अब वर्ल्ड चैंपियनशिप में 6 गोल्ड, एक रजत और एक कांस्य के साथ कुल आठ पदक हो गए हैं और इतने पदक जीतने वाली वह दुनिया की पहली मुक्केबाज़ (महिला और पुरुष दोनों को मिलाकर) बन गईं हैं।

हालांकि 2019 वर्ल्ड महिला बॉक्सिंग चैंपियनशिप मैरी के इस ऐतिहासिक पदक जीत के अलावा भी याद किया जाएगा, वह इसलिए क्योंकि इस चैंपियनशिप में मैरी के साथ साथ तीन और भारतीय महिला मुक्केबाज़ों ने पदक पर कब्ज़ा जमाया। जमुना बोरो, लवलीना बोर्गोहाईन और मंजू रानी ने भी पोडियम का सफ़र तय किया, रानी तो गोल्ड मेडल से बेहद क़रीबी मुक़ाबले में चूक गईं। भारतीय महिला मुक्केबाज़ों के इस शानदार प्रदर्शन ने देशवासियों के लिए आने वाले वक़्त में नई उम्मीदें दे दी हैं, जो मैरी कॉम के संन्यास के बाद भी महिला बॉक्सिंग के लिए भविष्य के अच्छे संकेत हैं।

मैरी कॉम और लवलीना ने हाल ही में संपन्न हुए बीएफ़आई ट्रायल्स में भी कमाल का प्रदर्शन किया, और अपने अपने वेट कैटेगिरी में इन दोनों ही मुक्केबाज़ों ने फ़रवरी 2020 में होने वाले ओलंपिक क्वालिफ़ायर्स के लिए भी क्वालीफ़ाई कर लिया है।

पंघल का भी ज़ोरदार पंच

पिछले कुछ सालों से भारतीय पुरुष मुक्केबाज़ी में अमित पंघल का नाम लगातार सुर्ख़ियों में बना हुआ था, लेकिन साल 2019 में इस युवा मुक्केबाज़ ने अपने प्रदर्शन के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपना लोहा मनवाया। पंघल के लिए बैंकॉक में हुई 2019 एशियन वर्ल्ड चैंपियनशिप उनके करियर का पहला ऐतिहासिक लम्हा बन गया जब उन्होंने इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक पर कब्ज़ा जमाया। फ़ाइनल मुक़ाबले में उन्होंने अपना दबदबा क़ायम रखा और साउथ कोरिया के किम इन्कयू को 5-0 से रौंद डाला, ये पंघल का साल में दूसरा गोल्ड मेडल था। पहला स्वर्ण उन्होंने स्ट्रान्जा मेमोरियल टूर्नामेंट में अपने नाम किया था।

कुछ ही महीने बाद ये 24 वर्षीय भारतीय अपने ही प्रदर्शन को और भी बेहतर करते हुए, वर्ल्ड चैंपियनशिप के फ़ाइनल में पहुंचने वाला पहला भारतीय पुरुष मुक्केबाज़ बना। हालांकि ख़िताबी मुक़ाबले में उन्हें मौजूदा ओलंपिक चैंपियन शाखोबिदिन ज़ोइरोव से हार का सामना करना पड़ा लेकिन पंघल के इस ऐतिहासिक प्रदर्शन ने उन्हें मुक्केबाज़ी की दुनिया में अलग पहचान दिला दी।

पंघल का जलवा बिग बाउट लीग के पहले संस्करण में भी जारी रहा, पूरी लीग में पंघल अपराजित रहे और गुजरात जाइंट्स को अपनी कप्तानी में चैंपियनशिप की ट्रॉफ़ी दिला दी। मौजूदा समय में पंघल फ़्लाइवेट कैटेगिरी में दुनिया के नंबर-1 मुक्केबाज़ हैं, और फ़रवरी में होने वाले ओलंपिक क्वालिफ़ायर में जीत के साथ वह ओलंपिक कोटा हासिल करने के सबसे बड़े दावेदारों में से एक हैं।

मनीष कौषिक (दाएं) ने 2019 एआईबीए वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक हासिल किया था।

पंघल के अलावा भारत के लाइटवेट कैटेगिरी विशेषज्ञ मनीष कौषिक के लिए भी साल 2019 बेहतरीन रहा है। इस साल मनीष ने येकातेरीनबर्ग में आयोजित हुई वर्ल्ड पुरुष बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भारत के लिए कांस्य पदक हासिल किया। तो वहीं कविंदर सिंह बिष्ट, शिवा थापा और आशीष कुमार के नाम भी एशियन चैंपियनशिप में पदक रहे।

दिसंबर 20 और 30 को बेल्लारी, में हुए ओलंपिक क्वालिफायर के मेंस बॉक्सिंग ट्रायल्स में भारत के कुछ नामों ने फाइनल फेहरिस्त में अपना नाम शुमार कर चीन में होने वाली प्रतियोगिता का हिस्सा बनें। वे नाम कुछ इस प्रकार हैं: गौरव सोलंकी (57 किग्रा), विकाश कृष्णन (69 किग्रा), नमन तनवर (51 किग्रा), आशीष कुमार (75 किग्रा) और सतीश कुमार (91+ किग्रा)।

ये साल बड़े नामों के लिए अद्भुत रहा जिनमें मैरी कॉम और अमित पंघल का नाम तो शामिल है ही। साथ ही साथ महिला मुक्केबाज़ जमुना बोरो और मंजू रानी के लिए भी साल 2019 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें पहचान दिलाने वाला माना जाएगा। अब जब ओलंपिक क्वालिफ़ायर में क़रीब एक महीने से कुछ ही ज़्यादा का समय बचा है तो कहा जा सकता है कि सही समय पर भारतीय मुक्केबाज़ सही राह पकड़ चुके हैं, जिसने उम्मीदों को भी बढ़ा दिया है।