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भारतीय हॉकी के लिए इस सीज़न ने जगाई सुनहरी उम्मीद

टोक्यो 2020 में क्वालिफाई करने से लेकर प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन वाला रहा यह साल भारतीय हॉकी टीम के लिए। 

लेखक सैयद हुसैन ·

अवसर कई तरह के थे, कुछ आसान तो कुछ मुश्किल, कभी ऐसे विपक्ष से भी सामना हुआ जिन्होंने कड़ी टक्कर दी। लेकिन इन सबके बीच भारतीय हॉकी के लिए साल 2019 बहुत शानदार रहा, और टीम ने एक प्लानिंग के साथ सीज़न का मज़ा लिया।

साल 2019 में भारतीय हॉकी टीम किसी बड़े टूर्नामेंट में नज़र तो नहीं आई लेकिन एफ़आईएच ओलंपिक हॉकी क्वालिफ़ायर्स में बेहतरीन प्रदर्शन के साथ टीम ने सीज़न का अंत किया।

मनप्रीत सिंह के नेतृत्व में भारतीय पुरुष टीम का यह सीज़न अपेक्षाकृत आसान रहा था, जहां टीम ने सीज़न का अंत रूस पर 11-3 की शानदार जीत के साथ अंत किया, जिसने भारतीय पुरुष टीम को 2020 टोक्यो ओलंपिक का टिकट भी दिला दिया। दूसरी तरफ़ भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान रानी रामपाल के प्रेरणादायक प्रदर्शन की बदौलत भारतीय महिला टीम ने सांस रोक देने वाले मुक़ाबले में यूएसए को शिकस्त देकर लगातार दूसरी बार ओलंपिक के लिए क्वालिफ़ाई कर लिया।

अवसरों से भरा सीज़न

इस सीज़न में ज़्यादातर टीम इस बार नई शुरू हुई एफ़आईएच प्रो लीग में व्यस्त थीं, तो भारत ने इस सत्र का आग़ाज़ सुल्तान अज़लान शाह कप के साथ किया। जो भारत के कई युवा खिलाड़ियों के लिए शानदार अवसर की तरह लेकर आया, क्योंकि भारत की चुनौती एफ़आईएच रैंकिंग में अपने से नीचे रैंकिंग वाली टीमों के साथ थी।

इन अवसरों का भी भारतीय हॉकी टीम ने बेहतरीन फ़ायदा उठीया और अपने युवा खिलाड़ियों को मौक़ा देते हुए भविष्य की टीम बनाने की ओर देखा।

2019 का सीज़न कई युवा खिलाड़ियों के लिए भी शानदार रहा, जहां कई खिलाड़ियों ने पहली बार सीनियर स्तर पर भारत का प्रतिनिध्व किया। जहां पुरुष टीम में विवेक सागर प्रसाद और हार्दिक सिंह शामिल थे, तो महिला हॉकी टीम में लालरेमसियामी और शर्मिला देवी जैसी युवा खिलाड़ियों ने देश का प्रतिनिधित्व किया।

19 वर्षीय प्रसाद ने 2018 यूथ ओलंपिक में भारत को अपनी कप्तानी में रजत पदक जिताया था, इस सीज़न इस युवा खिलाड़ी ने लगातार भारत के लिए खेला और मिडफ़ील्ड में अक्सर वह अपने कप्तान मनप्रीत के साथ ज़िम्मेदारी निभाते हुए नज़र आए।

दूसरी तरफ़ हार्दिक ने भी अपने आप को भारत की रक्षापंक्ति और मिडफ़ील्ड की बीच की मज़बूत कड़ी के तौर पर साबित किया है। साथ ही साथ उनका आक्रामक रवैया भी आने वाले समय में कोच रीड और टीम इंडिया के काम आ सकता है।

महिलाओं की बात की जाए तो लालरेमसियामी का प्रदर्शन भारतीय हॉकी में एक शानदार कहानी की तरह रहा है। उन्हें एफ़आईएच राइज़िंग स्टार ऑफ़ द ईयर के लिए भी नामित किया गया। तो शर्मिला के प्रदर्शन ने भी सभी को अचंभित किया।

18 वर्षीय यह खिलाड़ी भारतीय महिला हॉकी टीम के अटैक की एक अहम कड़ी बनकर सामने आईं हैं, साथ ही साथ डिफ़ेंस को भेदते हुए गोल के मौक़े बनाने की क़ाबिलियत भी इस युवा खिलाड़ी की ताक़त है।

मिली नई दिशा

नए कोच के साथ नई सोच और खेलने का नया स्टाइल, हालांकि यह तब घातक साबित हो सकता था जब समय पर इसके हिसाब से टीम ख़ुद को ढाल नहीं पाती। सही तरीक़े से और धीरे धीरे बदलाव टीम के प्रदर्शन को भी बेहतर करता है।

एक समय दुविधा में फंसे मनप्रीत और लड़कों ने अनुभवी ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज ग्रहम रीड का शानदार स्वागत किया।

द कूकाबुराज़ को रैंकिंग में शीर्ष पर ले जाने में अहम भूमिका निभाने वाले, और ऑस्ट्रेलिया को कई ट्रॉफ़ी जिताने वाले रीड के लिए भारत को नई दिशा में ले जाना एक कठिन परीक्षा थी। लेकिन इस नए कोच के अंदर टीम ने शानदार प्रदर्शन किया और विपक्षियों पर एकतरफ़ा जीत दर्ज करते हुए आसानी के साथ ओलंपिक क्वालिफ़ायर्स में जगह बना ली थी। रीड के पास अहम मुक़ाबलों से पहले टीम का बेहतर संयोजन बनाने का पर्याप्त समय था जिसका उन्होंने फ़ायदा उठाया।

एक तरफ़ पूरे सीज़न में भारत की रोटेशन पॉलिसी जारी रही, और इसे रीड ने तब तक जारी रखा जब तक उन्हें अच्छा टीम संयोजन नहीं मिल गया। इस दौरान उन्हें उनके भरोसेमंद साथी क्रिस सिरियेलो का भी शानदार साथ मिला, जो टीम इंडिया के एनालेटिकल कोच भी हैं। सिरियेलो इससे पहले रीड के साथ एक खिलाड़ी के तौर पर भी खेल चुके हैं, इसलिए उन्हें यह अच्छे से मालूम है कि रीड कैसी टीम चाहते हैं।

दूसरी तरफ़ महिला टीम के हेड कोच सोजर्ड मारिजने ने भी इस सीज़न जमकर मेहनत की और भारतीय महिला टीम को पूरी तरह से बदलते हुए शानदार बना डाला, जो अब किसी भी दिन किसी भी टीम को हराने का माद्दा रखती है।

भारतीय महिला टीम इस सीज़न लगातार मज़बूत होती गई, जहां उन्होंने अपने विदेशी दौरों से बहुत कुछ सीखा और ख़ुदको प्रतिद्वंदियों से बेहतर साबित करना चाहा।

फिर चाहे वह हिरोशीमा में खेली गई एफ़आईएच सीरीज़ फ़ाइनल्स में आसानी के साथ फ़ाइनल तक का सफ़र तय करना हो, या फिर मौजूदा ओलंपिक विजेता ग्रेट ब्रिटेन को उन्हीं के घर मे कड़ी चुनौती देना हो, हर जगह इस टीम ने कमाल का प्रदर्शन किया और रानी रामपाल ने शायद ही अपने फ़ैंस को निराश किया हो। और सीज़न का अंत इस टीम ने एफ़आईएच ओलंपिक क्वालिफ़ायर्स में यूएसए को सांस रोक देने वाले मुक़ाबले में शिकस्त देकर 2020 टोक्यो ओलंपिक का टिकेट हासिल करने के साथ किया।

विवेक प्रसाद: भारतीय हॉकी टीम के भाविष्य की उम्मीद 

दो साल पहले वो अपनी ज़िंदगी में जूझ रहे थे। जनवरी 2018 में वो राष्ट्रीय टीम...

रिज़र्व खिलाड़ियों की मज़बूत फ़ेहरिस्त

अगर आप भारतीय गोलकीपर पी आर श्रीजेश से उनके बेहतरीन समय के बारे में पूछेंगे तो वह आपको उस समय में ले जाएंगे जब वह भरत छेत्री और एड्रियन डीसूज़ा के साथ खेला करते थे। तब वह ज़्यादातर समय बेंच पर बैठकर अपने सीनियर खिलाड़ियों को गोल की रक्षा करते हुए देखते थे।

अब ठीक इसी तरह कृष्णा पाठक, सूरज करकेरा और राजनी एतिमरपू ज़्यादातर समय बेंच पर बैठकर बिताते हैं। इस सीज़न भारत ने अपेक्षाकृत अपने रिज़र्व गोलकीपरों को ओलंपिक से पहले तैयार रहने के लिए काफ़ी मौक़े भी दिए हैं।

इस सीज़न में किए गए बेहतरीन प्रदर्शनों के दम पर, हम उम्मीद कर सकते हैं कि आने वाले समय में भारतीय हॉकी अपने खो चुके सुनहरे अतीत को वापस हासिल करने की तरफ़ क़दम बढ़ाएगी। और नए साल में ओलंपिक की चुनौतियों को भी शानदार ढंग से स्वीकार करेगी।