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अपने प्रतिद्वंदियों को जानें: 2020 टोक्यो ओलंपिक में भारत की चुनौती

एक नज़र 2020 टोक्यो ओलंपिक में भारतीय पुरुष टीम के सामने आने वाली चुनौतियों पर डाल लेते हैं।

लेखक सैयद हुसैन ·

एफ़आईएच ने इस हफ़्ते की शुरुआत में 2020 टोक्यो ओलंपिक हॉकी के कार्यक्रम की घोषणा कर दी है, जहां भारतीय पुरुष टीम के पूल में कई दिग्गज टीमें शामिल हैं। ग्रहम रीड और कपंनी अपने अभियान का आग़ाज़ न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ करेगी, जिसके बाद उनका सामना मौजूदा ओलंपिक विजेता अर्जेंटीना के साथ होगा। भारत का तीसरा मुक़ाबला दुनिया की नंबर-1 टीम ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध होना है, इसके बाद स्पेन और मेज़बान देश जापान के साथ खेलते हुए टीम इंडिया अपना ग्रुप स्टेज ख़त्म करेगी।

न्यूज़ीलैंड

भारत 2020 टोक्यो ओलंपिक के अभियान का आग़ाज़ 1976 ओलंपिक चैंपियन न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ करेगा, और यह एक बेहद दिलचस्प लड़ाई होगी।

द ब्लैक स्टिक्स फ़िलहाल एफ़आईएच रैंकिंग में 9वें स्थान पर हैं, 2019 एफ़आईएच प्रो लीग में न्यूज़ीलैंड का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था। उन्हें 14 मुक़ाबलों में से एक में भी जीत नसीब नहीं हुई थी। हालांकि बेल्जियम, जर्मनी और स्पेन के ख़िलाफ़ उनका मैच रेगुलेशन टाइम के बाद ड्रॉ रहा था, पर इन तीनों से ही शूटआउट में न्यूज़ीलैंड को हार झेलनी पड़ी थी, जिसके बाद कीवी टीम आख़िरी स्थान पर रही थी।

2020 टोक्यो ओलंपिक में न्यूज़ीलैंड की कमान डिफ़ेंडर ब्लेयर टैंरट के कंधों पर होगी। 29 वर्षीय ये खिलाड़ी न्यूज़ीलैंड की टीम में सबसे अनुभवी डिफ़ेंडरों में से एक है, उनके नाम 200 से ज़्यादा अंतर्राष्ट्रीय मुक़ाबले हैं। अरुण पंचाई, शी मैकअलीज़, ह्यूजो इंग्लिस और स्टीव एडवर्ड्स डिफ़ेंडरों की ऐसी चौकड़ी है जिन्होंने आपस में मिलकर अब तक एक हज़ार से ज़्यादा मुक़ाबले खेले हैं।

साथ ही साथ भारतीय डिफ़ेंडरों के सामने दिग्गज खिलाड़ी स्टीव चाइल्ड और स्टीवेन जेनेस की चुनौती होगी, जो ब्लैक स्टिक्स के लिए पिछले दशक से सबसे ज़्यादा गोल करने वालों में से हैं।

ऑस्ट्रेलिया

भारतीय पुरुष हॉकी टीम के लिए ग्रुप स्टेज में सबसे बड़ी चुनौती चार बार के एफ़आईएच वर्ल्ड कप विजेता और मौजूदा समय में दुनिया की नंबर-1 टीम ऑस्ट्रेलिया की होगी।

द कूकाबुराज़ को टूर्नामेंट के पहले ही जीत के प्रबल दावेदारों में से एक माना जा रहा है, और पूरी उम्मीद जताई जा रही है कि यह टीम पूल टॉपर रहेगी। 6 बार की कॉमनवेल्थ स्वर्ण पदक विजेता रही इस टीम ने 2019 में 21 मुक़ाबले खेले थे और उनमे कंगारुओं को 16 में जीत नसीब हुई थी और सिर्फ़ दो में ही हार मिली थी।

भारत के ख़िलाफ़ भी ऑस्ट्रेलिया ने 2019 में दो मैच खेले और दोनों में ही द कूकाबुराज़ को जीत मिली थी। 2004 एथेन्स के विजेता ऑस्ट्रेलिया को मानो चैंपियन बनने की आदत सी है और इस टीम में एक से बढ़कर एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी भरे पड़े हैं।

जिनमें अरन ज़ालेव्सकी और दिग्गज मिडफ़ील्डर एडी ऑकेन्डेन शामिल हैं, इन दोनों को ही एफ़आईएच मेंस प्लेयर ऑफ़ द ईयर के लिए नामित किया गया था। फॉर्वर्ड जैकब वेटन और भरोसेमंद ब्लेक गोवर्स ऑस्ट्रेलिया की सबसे मज़बूत कड़ी में से एक हैं। जबकि युवा डिफ़ेंडर जेक हार्वी औरप अनुभवी जेरेमी हेवर्ड से भी भारतीय टीम को होशियार रहना होगा।

स्पेन

दो बार का यूरो हॉकी चैंपियनशिप विजेता स्पेन 1960 ओलंपिक से लगातार शिरकत करता आ रहा है, तीन बार इस टीम ने फ़ाइनल तक का सफ़र भी तय किया है। जिसमें सबसे ताज़ा 2008 बीजिंग ओलंपिक का फ़ाइनल है, हालांकि तीनों ही बार इन्हें हार कर रजत पदक से संतोष करना पड़ा था।

द रेड स्टिक्स 1960 ओलंपिक से लगातार शिरकत करते आ रहे हैं

2019 एफ़आईएच प्रो लीग में स्पेन को 14 में से सिर्फ़ 2 मुक़ाबलों में ही जीत नसीब हुई थी, जो ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ आई थी। हालांकि 2019 में उनका प्रदर्शन भले ही अच्छा नहीं रहा हो, लेकिन इस टीम ने ऑस्ट्रेलिया के अलावा अपने घर में खेलते हुए ग्रेट ब्रिटेन और अर्जेंटीना पर भी विजय प्राप्त की थी।

2019 में स्पेन ने भारतीय हॉकी टीम के विरुद्ध भी दो बार आमने सामने हुए थे, लेकिन दोनों ही बार भारत ने उन्हें शिकस्त दी थी। यह दोनों ही मुक़ाबले बेल्जियम में खेले गए थे, जहां 1-6 और 1-5 के अंतर से स्पेन को हार मिली थी। 2020 टोक्यो ओलंपिक से पहले यह दोनों देश दो बार एक दूसरे के ख़िलाफ़ जून में होने वाली 2020 एफ़आईएच प्रो लीग में भिड़ने वाले हैं।

अर्जेंटीना

ऑस्ट्रेलिया के बाद पूल स्टेज में भारत की दूसरी सबसे बड़ी चुनौती वर्ल्ड नंबर-4 और मौजूदा ओलंपिक विजेता अर्जेंटीना की होगी। दक्षिण अमेरिका की इस टीम ने 2016 रियो ओलंपिक में भी सभी को चौंकाते हुए गोल्ड मेडल पर कब्ज़ा जमा लिया था, और इस बार भी वे अपने ख़िताब की रक्षा के लिए जी जान लगा देंगे।

अर्जेंटीना की नज़र 2020 टोक्यो ओलंपिक में अपने ख़िताब की रक्षा करने पर होगी

2019 एफ़आईएच प्रो लीग में खेले गए 14 मुक़ाबलों में अर्जेंटीना को 6 में जीत और 5 में हार का सामना करना पड़ा था। सीज़न का अंत भी इस टीम के लिए अच्छा नहीं रहा था, जब उन्हें स्पेन और बेल्जियम के हाथों टेस्ट सीरीज़ में हार झेलनी पड़ी थी।

इसके बावजूद यह एक ख़तरनाक टीमों में से एक है जहां कई सितारे मौजूद हैं। इस टीम की कमान पेड्रो लबारा के कंधों पर है तो अनुभवी डिफ़ेंडर गोन्ज़ालो पीलत भी इस टीम की रीढ़ हैं।

दिग्गज फॉर्वर्ड लुकास विला से भी भारत को बचकर रहना होगा, जिनके लिए साल 2019 बेहतरीन रहा है और उन्हें एफ़आईएच मेंस प्लेयर ऑफ़ द ईयर के लिए भी नामित किया गया था।

जापान

मेज़बान देश जापान के लिए यह ऐतिहासिक पल होगा, क्योंकि 52 सालों के बाद जापान ओलंपिक में शिरकत कर रहा है, पूल ए में मौजूद इस टीम को छुपा रुस्तम के तौर पर भी देखा जा रहा है।

मौजूदा एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक विजेता जापान 52 सालों बाद ओलंपिक खेलों में शिरकत कर रहा है

पाकिस्तान और मलेशिया जैसी मज़बूत टीमों को एशियन गेम्स के सेमीफ़ाइनल और फ़ाइनल में शिकस्त देने वाली यह सामुराई सेना ओलंपिक में कहीं से भी कमज़ोर नहीं आंकी जा सकती।

हालांकि हॉकी में तेज़ी से उभरता हुआ जापान, भारत के सामने कम से कम कागज़ पर तो फीका दिखाई देता है। 2019 में भारत ने जापान को तीन बार शिकस्त दी है, तीनों मैचों का योग 15-5 से भारत के पक्ष में जाता है।