ध्यान चंद से लेकर पीवी सिंधु तक – भारतीय ओलंपिक इतिहास का लेखा-जोखा

ओलंपिक गेम्स में भारत ने कुल 28 मेडल अपने नाम किए है। 

ओलंपिक गेम्स, खेल की दुनिया का सबसे बड़ा मेला और इस मेले में भारत ने बहुत से मुकाम हासिल किए हैं। ओलंपिक के इतिहास में भारत ने अब तक कुल 28 मेडल जीते हैं। ऐसे में यह जानना बेहद ही दिलचस्प हो जाता है कि किन-किन खेलों में और कब भारतीय खिलाड़ियों ने मेडल पर अपना कब्ज़ा जमा कर भारत को गौरवांवित किया। आईए एक नज़र डालते हैं उन सुनहरे पलों पर जब भारतीय तिरंगे ने खेल के इस महाकुंभ में अपनी छाप छोड़ी।

विजेंदर सिंह ओलंपिक मेडल जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बनें 
विजेंदर सिंह ओलंपिक मेडल जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बनें विजेंदर सिंह ओलंपिक मेडल जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बनें 

एथलेटिक्स

1900 पेरिस ओलंपिक: स्वतंत्रता से पहले भारत के नॉर्मन प्रिचर्डने 1900 पेरिस गेम्स में शिरकत करते हुए भारत की झोली में ब्रॉन्ज़ मेडल डाला था। नॉर्मन प्रिचर्ड ने 60 मीटर, 100 मीटर, 200 मीटर, 110 मीटर और 200 मीटर हर्डल रेस में भाग लिया था। यह ओलंपिक गेम्स में भारत के लिए पहला मेडल भी साबित हुआ।

बॉक्सिंग

2008 बीजिंग ओलंपिक: इस संस्करण में विजेंदर सिंह बने पहले भारतीय बॉक्सर जिन्होंने अपनी सरज़मीं के लिए मेडल जीता हो। हरियाणा के इस मुक्केबाज़ ने कार्लोस गौन्गोरा को 9-4 से हराकर क्वाटरफाइनल में प्रवेश किया जिस वजह से उन्होंने एक मेडल तो देश के लिए पुख्ता कर ही लिया था। हालांकि इमिलिओ कोरिया के खिलाफ वह ब्रॉन्ज़ मेडल मुकाबले में 5-8 से हार गए और गोल्ड जीतने का उनका सपना अधूरा रह गया।

2012 लंदन ओलंपिक: भारत में अब मुक्केबाज़ी का शौंक चरम पर था। पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं भी इसमें हिस्सा लेने लगी थी। एक ऐसी महिला जिसने रिंग में अपने प्रतिद्वंदियों से कई बार कड़े सवाल पूछे और अपनी मेहनत व हुनर के बल पर ब्रॉन्ज़ मेडल भी जीता। यह नाम और कोई नहीं बल्कि मैरी कोम है। 51 किग्रा वर्ग में खेलते हुए मैरी ने यूके कीनिकोला एडम्स को शिकस्त देकर मेडल अपने नाम किया। इस उपलब्धि के साथ वे पहली भारतीय महिला बॉक्सर बनीं जिसने ओलंपिक गेम्स में मेडल अपने नाम किया।

बैडमिंटन

2012 लंदन ओलंपिक: भारत के लिए बैडमिंटन के खेल में बदलाव तब आया जब साइना नेहवाल ने ओलंपिक गेम्स में मेडल जीता। नेहवाल महिलाओं में ही नहीं बल्कि भारतीय बैडमिंटन के इतिहास में मेडल जीतने वाले पहली खिलाड़ी बनी। चीन की वांग झिन के खिलाफ मुकाबले में नेहवाल के हाथ ब्रॉन्ज़ मेडल आया था।

2016 रियो ओलंपिक: नेहवाल के ब्रॉन्ज़ के बाद भारत की पीवी सिंधु ने जीता सिल्वर। जी हाँ, भारतीय शटलर पीवी सिंधु ने रियो ओलंपिक में बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत सिल्वर मेडल भारत को तोहफे में दिया। यकीन मानिए सिंधु और स्पेन की करोलिना मारिनके बीच 83 मिनट का महामुकाबला हुआ और मारिन ने इस जीत के साथ अपने देश को गोल्ड मेडल से नवाज़ा। हालांकि सिंधु गोल्ड तो न जीत पाईं लेकिन उनका नाम भारतीय बैडमिंटन इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा।

हॉकी

भारत के लिए हॉकी एक ऐसा खेल रहा है जिसने ओलंपिक में देश को सबसे ज़्यादा मेडल दिलाए है। भारतीय हॉकी ने ओलंपिक में कुल 11 मेडल जीते हैं, जिसमें 8 गोल्ड, 1 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज़ मेडल शामिल हैं।

1928 एम्सटर्डम ओलंपिक: यह साल भारतीय हॉकी के लिए बेहद ख़ास रहा। इस संस्करण में भारतीय हॉकी टीम ने शानदार खेल दिखाते हुए गोल्ड मेडल की चमक हासिल की। इतना ही नहीं ध्यान चंद ने इस मुकाबले में गोल दागने की हैट्रिक भी जमाई।

1932 लॉस एंजिल्स ओलंपिक: भारतीय हॉकी टीम का दबदबा ओलंपिक गेम्स में बना रहा। ध्यान चंद जैसे खिलाड़ियों से लैस इस टीम ने फाइनल में जापान पर धावा बोला और मुकाबले को 11-1 से अपने हक में किया। इस मुकाबले में ध्यान चंद के अलावा रूप सिंह भी स्टार खिलाड़ी रहे।

1938 बर्लिन ओलंपिक: भारतीय हॉकी और गोल्ड मेडल की चमक के बीच मानो एक अटूट रिश्ता पनप रहा था। 1938 बर्लिन ओलंपिक में भी भारत ने शानदार प्रदर्शन का मुज़ाहिरा पेश करते हुए फाइनल मुकाबले को 8-1 से अपने नाम किया और एक और गोल्ड मेडल पर भारतीय झंडे की मुहर लगा दी।

1948 लंदन ओलंपिक: भारत अब स्वतंत्र हो चुका था और इसी वजह से इस बार के ओलंपिक गेम्स ख़ास होने वाले थे। भारतीय हॉकी ने एक बार फिर उम्मीदों उतरते हुए ब्रिटेन को उसी की ज़मीन पर फाइनल मुकाबले में 4-0 से धूल चटाई। यह गोल्ड मेडल स्वतंत्र भारत के लिए पहला मेडल साबित हुआ।

1952 हेल्सिंकी ओलंपिक: भारतीय हॉकी टीम के लिए ओलंपिक गेम्स में गोल्ड मेडल जीतना मानो एक आदत सी बन गई थी। हेल्सिंकी गेम्स में कुछ ऐसा ही देखने को मिला जब भारत ने नीदरलैंड को फाइनल में 6-1 से हराया। इस बार भारत के लिए चिन्नादराय देसमुथु ने अपने नाम को खेल प्रेमियों के दिलो तक पहुंचाया। इस जीत के साथ देसमुथु भारत के लिए सबसे युवा खिलाड़ी बने जिन्होंने ओलंपिक गेम्स में गोल्ड मेडल जीता हो।

इतना ही नहीं उस समय के कप्तान केडी सिंह ने 1953 हेल्म्स ट्रॉफी को अपने नाम किया और बन गए “बेस्ट हॉकी प्लेयर इन द वर्ल्ड”। खिताब, उम्मीद और उपलब्धियां बढती जा रही थी और केडी सिंह को 1953 में “बेस्ट स्पोर्ट्समैन ऑफ़ एशिया” का खिताब भी मिला।

1956 मेलबर्न ओलंपिक: इस साल का गोल्ड मेडल भारतीय हॉकी टीम के लिए ओलंपिक गेम्स का लगातार छठा गोल्ड साबित हुआ। खूब बात तो यह थी कि इस पूरी प्रतियोगिता में भारत ने एक भी प्रतिद्वंदी को एक भी गोल मारने का मौका नहीं दिया। फाइनल मुकाबला भारत और पाकिस्तान के बीच रहा जहां भारत ने उन्हें 1-0 से पटकनी देकर ओलंपिक गेम्स को अपने नाम किया।

1960 रोम ओलंपिक: इस बार भारतीय हॉकी टीम ने फाइनल तक का सफ़र तय किया। पिछले साल की तरह इस बार भी भारत का मुकाबला पाकिस्तान के साथ था। हालांकि इस बार पाकिस्तान ने खेल पर बाज़ी मारी और भारत को सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा।

1964 टोक्यो ओलंपिक: इस बार ओलंपिक फाइनल खेलने के लिए भारत और पाकिस्तान लगातार तीसरी बार मैदान में उतरे। पिछले दो फाइनल में दोनों ही मुल्कों ने एक एक मुकाबला जीत गोल्ड मेडल पर पकड़ जमाई थी। लेकिन भारत पिछली हार को भूला नहीं था और इस बार उन्होंने बदला ले ही लिया। इस फाइनल में भारतीय हॉकी टीम ने पाकिस्तान को 1-0 से मात देकर गोल्ड मेडल पर दोबारा हक जमाया।

1968 मेक्सिको ओलंपिक: यह पहला साल रहा जहां भारतीय हॉकी टीम का सफ़र उतार चढ़ाव भरा रहा। इस संस्करण में भारत ने ब्रॉन्ज़ मेडल जीता और वही पाकिस्तान ने खिताब पर कब्ज़ा किया।

1972 म्यूनिख ओलंपिक: इस बार फिर भारतीय हॉकी टीम ने ग्रुप स्टेज पर बेहतरीन खेल दिखाया, लेकिन आगे के राउंड में वह लड़खड़ाते दिखे। इस संस्करण में भी भारत के हाथ ब्रॉन्ज़ मेडल आया।

1980 मास्को ओलंपिक: अब समय फिर बदल रहा था। वासुदेवन बस्करन की अगुवाई में भारतीय शेरों ने एक बार फिर दहाड़ मारी। फाइनल में भारत की भिडंत हुई स्पेन से और 4-3 से मुकाबला भारत ने अपने हक में किया। पिछले कुछ सीज़न की भड़ास निकालते हुए भारतीय मेंस हॉकी टीम ने अपना 8वां गोल्ड मेडल जीता।

शूटिंग

2004 एथेंस ओलंपिक: इस बार खेल बदल गया था। भारत शूटिंग में अव्वल रहा और यह मेडल आया राजस्थानराज्यवर्धन सिंह राठौड़ के हवाले से। इतना ही नहीं सिल्वर मेडल जीत राठौर पहले भारतीय शूटर बने जिन्होंने ओलंपिक गेम्स में पोडियम में जगह बनाई।

2008 बीजिंग ओलंपिक: अब बारी थी भारत के चहेते निशानेबाज़ अभिनव बिंद्रा की। बिंद्रा ने मेंस 10 मीटर एयर राइफल में सीधा गोल्ड मेडल पर निशाना साधा और बन गए भारत के अव्वल शूटर। के

2012 लंदन ओलंपिक: भारतीय शूटिंग ने एक लय पकड़ ली थी और साथ ही एक से बढ़कर एक शूटर मिलते जा रहे थे। मेंस 25 मीटर एयर राइफल में विजय कुमार ने सिल्वर मेडल जीता और गगन नारंग ने मेंस 10 मीटर एयर राइफल में ब्रॉन्ज़ जीत कर भारत को दोहरी खुशी दी।

वेटलिफ्टिंग

2000 सिडनी ओलंपिक: जहां भारतीय पुरुषों ने अपना लोहा मनवाया वहीं भारतीय महिलाएं भी ओलंपिक गेम्स में अपना नाम रोशन करने के लिए तैयार थी। कर्णम मल्लेश्वरी ने वेटलिफ्टिंग खेल के 54 किग्रा वर्ग में धौंस जमाते हुए ब्रॉन्ज़ मेडल जीता और बन गई ओलंपिक मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला।

टेनिस

1996 एटलांटा ओलंपिक: भारत को 4 सीज़न यानि 16 साल हो चुके थे मेडल जीते हुए। इस बीच एक युवा ने भारत की कमान संभाली और टेनिस में भारत ने ब्रॉन्ज़ मेडल जीता। यह नामलिएंडर पेस। मेडल जीतने के साथ साथ पेस ने बहुत सी वाह वाही भी बटोरीं।

रेसलिंग

1952 हेल्सिंकी ओलंपिक: जहां फील्ड हॉकी में भारत की पकड़ मज़बूत थी वहीखाशाबा दादासाहेब जाधव ने खूब सुर्खियाँ बटोरीं। मेंस फ्रीस्टाइल वर्ग में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता और भारत का नाम रोशन किया। इसका जश्न भी खूब मनाया गया, जब भरतीय चैंपियन दादासाहेब जाधव का स्वागत ढ़ोल के साथ हुआ।

2008 बीजिंग ओलंपिक: जाधव के बाद भारत को रेसलिंग में मेडल जीतने में 56 साल लग गए। इस सूखे को सुशील कुमार ने 66 किग्रा वर्ग में खेलते हुए हटाया। तकरीबन 70 मिनट के मुकाबले में सुशील ने जीत हासिल की और उन्हें ब्रॉन्ज़ मेडल से नवाज़ा गया। था

लिएंडर पेस ने 1996 के अटलांटा खेलों में टेनिस में भारत का एकमात्र ओलंपिक पदक जीता।
लिएंडर पेस ने 1996 के अटलांटा खेलों में टेनिस में भारत का एकमात्र ओलंपिक पदक जीता।लिएंडर पेस ने 1996 के अटलांटा खेलों में टेनिस में भारत का एकमात्र ओलंपिक पदक जीता।

2012 लंदन ओलंपिक: सुशील कुमार की आग बुझी नहीं थी और ओलंपिक गेम्स में अपने देश का नाम करना उनकी सबसे बड़ी जिद्द रही है। इस बार सुशील ने अपने देश की उम्मीदों को और ज़्यादा बुलंदी प्रदान कर सिल्वर मेडल अपने हक में किया। 

सुशील के अलावा भारत के दिग्गज योगेश्वर दत्त ने भी रेसलिंग में अपने हुनर का प्रमाण दिया। यह मुकाबला महज़ 1 मिनट और 2 सेकंड चला। इस बेहतरीन खेल की बदौलत योगेश्वर को ब्रॉन्ज़ मेडल से नवाज़ा गया।

सुशील कुमार ने लंदन 2012 के दौरान भारतीय खिलाड़ियों की उम्मीदवारी की 
सुशील कुमार ने लंदन 2012 के दौरान भारतीय खिलाड़ियों की उम्मीदवारी की सुशील कुमार ने लंदन 2012 के दौरान भारतीय खिलाड़ियों की उम्मीदवारी की 

2016 रियो ओलंपिक: अब बारी थी भारत को रेसलिंग में लगातार तीसरा ओंपिक मेडल जीतने की। इस बार महिला पहलवान साक्षी मलिक ने धावा बोला और ब्रॉन्ज़ मेडल अपने हक़ में किया। इस मेडल से वह पहली भारतीय महिला पहलवान बनी जिन्होंने भारत को ओलंपिक गेम्स में मेडल जितवाया हो।

क्या आपको यह आर्टिकल पसंद आया? इसे अपने दोस्तों के साथ साझा करें!