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राजस्थान की गलियों से लेकर भावना जाट का 2020 ओलंपिक तक का सफ़र 

रेस वॉकिंग के ज़रिए टोक्यो 2020 में अपनी जगह पक्की कर चुकी भावना जाट ने कहा कि लोग मुझे घर रह कर घरेलू काम करने की सलाह देते थे। 

लेखक जतिन ऋषि राज ·

राजस्थान, गाँव काबड़ा, रात तीन बजे, 15 साल की युवा लड़की जूतों को कस अकेली सड़क पर भाग रही। यह वाक्य सुनने में जितना आसान है, असल ज़िन्दगी में उतना ही कठिन है। रात को ढाबेवाला, ट्रक वाला और कुछ और लोग इस भागती लड़की को देखा करते थे, लेकिन इस लड़की के जज़्बे के आगे उसे कुछ दिखा ही नहीं। हम बात कर रहें हैं भारतीय रेसवाकर (Race Walker) भावना जाट (Bhawna Jat) की। भारत को स्पोर्ट्स में उंचाइयों तक ले जाने वाली भावना के सपने की ट्रेनिंग रात को ही शुरू होती थी।

दिन के समय गाँववालों की बातें न सुन्नी पड़ें इस वजह से भावना ने आधी रात के समय अपने कौशल को पंख लगाने की तैयारी करनी शुरू की। ओलंपिक चैनल से बात करते हुए इस खिलाड़ी ने बताया कि “गाँव के बुज़ुर्ग लोग मुझे घर में रह कर घरेलु काम करने की सलाह देते थे।”

दुनिया की बातों को धुंए में उड़ाती इस युवा ने 20 किमी नेशनल रिकॉर्ड को तोड़ एक नया आसमान छुया और साथ ही 2020 ओलंपिक गेम्स में अपनी जगह भी पुख्ता की। उन्होंने आगे बताया कि “एक समय ऐसा था कि हम मिट्टी के घर में रहते थे और केवल दो बार का ही खाना खाते थे, ऐसी स्थिति के बाद ओलंपिक गेम्स में चुना जाना बहुत बड़ी बात है।”

भावना ने साल 2009 में रेस वॉकिंग शुरू की थी और वे 200 मीटर के मिट्टी के रास्ते पर भागा करती थी। इनके जीवन में इनके फिज़िकल ट्रेनर का भी बड़ा योगदान है क्योंकि उन्होंने हर कदम पर इस युवा को प्रेरित किया।

भावना ने बताया “मेरा एक्शन प्राकृतिक था लेकिन उसे उपयोग में लाने के समय में खुद हंस पड़ती थी। इस एक्शन को देख कर ही गाँव वाले मुझे इस खेल को छोड़ने के लिए बोलते थे, उनके हिसाब से इस खेल की शारीरिक भाषा शर्मनाक है।पैसों की दिक्कत, फिर भी जुनून को आगे रख गाँव के लोग ही समस्या नहीं थे, बल्कि उससे भी बड़ी समस्या घर की आमदनी थी। भावना के सामने नौकरी या घंटों मेहनत कर टोक्यो 2020 में जगह बनाने का विकल्प था। वे इन दोनों में केवल एक ही चीज़ चुन सकती थी तो उन्होंने अपने जुनून को चुना।

उन्होंने आगे बताया “मैंने निजी पैसे देने वालों से लोन लिया है, अभी मेरी कोई आमदनी नहीं है। अपने रेसवाल्किंग के जुनून को जारी रखने के लिए मुझे 2 लाख रुपयों का लोन लेना पड़ा।”

इंटर रेलवे एथलेटिक्स मीट के दौरान 1 घंटे 36 सेकंड के समय से गोल्ड जीतने वाली भावना ने कुबूला कि वे इससे बेहतर कर सकती हैं लेकिन अभ्यास की कमी की वजह से ऐसा हो नहीं पाया। उन्होंने आगे कहा “मैंने बिना किसी आमदनी के 300 दिन तक अभ्यास किया है और अब अपने गोल को हासिल कर लेना बहुत अच्छी बात है। मुझे विश्वास है कि एशियन रेस वॉकिंग चैंपियनशिप और 2020 ओलंपिक गेम्स (2020 Olympic Games) में मैं अच्छा प्रदर्शन कर पाऊँगी

टोक्यो 2020 में जीत की उम्मीद

हालांकि भावना जाट का अभी नेशनल कैंप का हिस्सा बनना बाकी है और अभी से यह खिलाड़ी टोक्यो 2020 में जीत की उम्मीद लगाए बैठीं हैं। उनका 1 घंटे 29 मिनट 54 सेकंड का समय काफी अच्छा है। इस रिकॉर्ड को अगर रियो ओलंपिक गेम्स (Riyo Olympic Gmaes) से तुलना में लाएं तो उनका नाम शेष 7 में आ सकता है।

प्रक्टिस के दौरान देखा गया है कि इन्होने 1 घंटा 28 मिनट और 54 सेकंड के समय से रेस खत्म की है और अगर इस आंकड़े की तुलना रियो से की जाए तो यह प्रदर्शन ब्रॉन्ज मेडल प्रदर्शन है।

उन्होंने बताया “अभी मेरा गोल एशियन रेस वॉकिंग चैंपियनशिप में अपनी ट्रेनिंग की टाइमिंग को मैच करना है। मेरा पहला नेशनल कैंप मुझे जापान में रिकॉर्ड तोड़ने में ज़रूर मदद करेगा। एशियन रेस वॉकिंग चैंपियनशिप सभी खिलाड़ियों के लिए टोक्यो 2020 के अभ्यास के लिए एक सुनहरा मौका है। अब देखना यह है कि भारतीय भावना के लिए यह सफ़र कहां तक जाता है।