ओलंपिक में भारत का प्रदर्शनः रियो 2016 में बेटियों ने देश को किया गौरवान्वित

भारत की बेटियों ने रियो में पदक का सूखा खत्म किया और दो पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया।

रियो ओलंपिक 2016 पहली बार ओलंपिक इतिहास में भारत का प्रदर्शन निराशाजनक था, उनकी पदक की झोली में सिर्फ दो महिला एथलीट्स पीवी सिंधु (PV Sindhu) और साक्षी मलिक (Sakshi Malik) के पदक शामिल थे, जिन्होंने पहली बार ओलंपिक में पदक जीतकर इतिहास रचा था।

117 एथलीटों के बावजूद रियो 2016 में भारत के सिर्फ दो पदक थे, ये किसी भी ओलंपिक के लिहाज से सबसे बड़ा झटका था, हालांकि बार्सिलोना 1992 के बाद पहली बार ऐसा लगा कि भारत खाली हाथ लौट जाएगा लेकिन भारत की बेटियों ने ऐसा होने नहीं दिया।

भारत के कुछ एथलीट तो पदक के एकदम करीब आ गए थे, जो सेमीफाइनल या क्वार्टर फाइनल तक पहुंच गए थे लेकिन पोडियम तक का सफर तय करने में असफल रहे थे।

पदक जीतकर देश को गौरवान्वित करने वाले एथलीट

रियो 2016 में भारत का पहला पदक गैर-अनुभवी साक्षी मलिक के माध्यम से आया था, ये वो युवा खिलाड़ी थी जिनसे ओलंपिक में पदक की उम्मीद भी नहीं की जा रही थी, जितना किसी दूसरे खिलाड़ियों से की जा रही थी। और उनको गीता फोगाट (Geeta Phogat) के बदले ओलंपिक में भेजा गया था।

तब भी विनेश फोगाट (Vinesh Phogat) उन महिलाओं में से एक भारतीय पहलवान थीं, जिन्होंने सभी को अपने हूनर का लोहा मनवाया था, लेकिन जब वो घायल हुईं, तो सारी उम्मीदें 58 किग्रा में साक्षी मलिक पर आ गई।

साक्षी मलिक (IND) ने एसुलु ताइनीबेकोवा (KGZ) को 8-5 से हराया

साक्षी मलिक (IND) ने एसुलु ताइनीबेकोवा (KGZ) को 8-5 से हराया

साक्षी अपनी अनुभवहीनता के बावजूद शुरुआती स्टेज से आगे बढ़ने में सफल रहीं और क्वार्टर फाइनल में वेलेरिया कोब्लोवा (Valeria Koblova) के हाथों हार गईं। हालांकि, रेपेचेज राउंड में पदक के लिए उनसे एक और मुक़ाबला खेलने की पेशकश की गई और उन्होंने कांस्य पदक मैच में एशियाई चैंपियन ऐसुलु ताइनीबेकोया (Aisluluu Tynybekoya) को हराकर इतिहास रच दिया।

दूसरा पदक तब आया, जब पीवी सिंधु ने पहली वरीयता प्राप्त स्पैनिश कैरोलिना मारिन (Carolina Marin) के खिलाफ फाइनल में कड़ी टक्कर के बाद रजत पर कब्जा कर लिया, जिससे दुनिया के सबसे बड़े मंच पर पहले अविश्वसनीय प्रदर्शन किया और मैच को तीन गेम तक खींचा लेकिन वो सोने पर कब्जा नहीं कर सकीं।

हालांकि, फाइनल तक भारतीय बैडमिंटन स्टार का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा, जहां उन्होंने ग्रुप चरणों और अगले दौर में मिशेल ली, ताई त्ज़ु यिंग, वांग यिहान और नोज़ोमी ओकुहारा (Nozomi Okuhara) को हराया।

सबसे बड़ी बात ये थी कि फाइनल से पहले पीवी सिंधु को सिर्फ मिशेल ली के खिलाफ संघर्ष करना पड़ा था। और उससे भी बड़ी बात ये है कि अपने से अधिक अनुभवी शटलर और ओलंपिक पदक विजेता साइना नेहवाल के होते हुए पीवी सिंधु ने ओलंपिक पदक जीता।

टूर्नामेंट ने नोज़ोमी ओकुहारा के साथ एक प्रतिद्वंद्विता को जन्म दिया, जिनके खिलाफ वो कई बार हारी हैं और कई बार जीत हासिल की है। कहने की जरूरत नहीं है कि वो भारत की अगली प्रमुख स्टार और भारतीय बैडमिंटन के चेहरे के रूप में उभरी हैं।

इन खिलाड़ियों ने लगभग पदक जीत ही लिया था

भारत ने रियो 2016 में पांच ऐसे पदक गंवा दिए जो सिर्फ एक कदम दूर थे। सानिया मिर्ज़ा (Sania Mirza), रोहन बोपन्ना (Rohan Bopanna), दीपा कर्माकर (Dipa Karmakar), विकास कृष्ण (Vikas Krishan), किदांबी श्रीकांत (Kidambi Srikanth) और भारतीय हॉकी पुरुष टीम सिर्फ एक मैच और जीत लेती तो भारत की झोली में पदक आ सकते थे।

पूर्व विश्व नंबर 1 किदांबी श्रीकांत ने आसान ड्रॉ का फायदा उठाते हुए उस मुकाबले तक पहुंचे जहां उनका सामना पिछले दोनों ओलंपिक्स में गोल्ड मेडल जीतने वाले लिन डैन से हुआ। इस मुकाबले में भले ही भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी दूसरा गेम जीतने में सफल रहे हों लेकिन चीनी शटलर को मुकाबले में हाराना आसान नहीं था ।

52 वर्षों के ओलंपिक इतिहास में पहली बार भारतीय एथलीट के रूप में जिमनास्टिक क्षेत्र में ओलंपिक में प्रवेश करने वाली दीपा कर्माकर ने 'प्रोडुनोवा' जैसे सबसे खतरनाक इवेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरी दुनिया को चौंका दिया। वो ऐसा करने वाली इतिहास की केवल पांचवीं महिला जिमनास्ट बन गईं, जो रियो ओलंपिक में चौथे स्थान पर रहीं।

इसी तरह भारतीय मुक्केबाज विकास कृष्ण ने उज्बेकिस्तान के पिछले रजत पदक विजेता बेक्तेमिर मेलिकुजिव से हारने से पहले एप पक्षीय फ़ैसले से अपने दो मुकाबले जीते थे।

ओलंपिक खेलों की सबसे सफल टीम और सबसे ज्यादा हावी रहने वाली भारतीय हॉकी पुरुष टीम ने क्वार्टर-फाइनल में स्थान हासिल करने के लिए ग्रुप में शानदार प्रदर्शन किया। लेकिन आकाशदीप सिंह (Akashdeep Singh) द्वारा दिए गए शुरुआती बढ़त के बावजूद वो बेल्जियम के खिलाफ हार गए, जो आगे चलकर विश्व चैंपियन बनी।

पदक के सबसे करीब पहुंचने वाले एथलीटों में भारतीय टेनिस जोड़ी सानिया और रोहन बोपन्ना भी थे, जिन्हें सेमीफाइनल में तीन सेटों तक चले मुकाबले में अमेरिका की वीनस विलियम्स और राजीव राम से हार का सामना करना पड़ा था।

उनके पास कांस्य जीतने का एक और अवसर था लेकिन इस भारतीय जोड़ी को तीसरे स्थान के लिए खेले गए मैच में चेक गणराज्य के राडेक स्टेपानेक और लुसी हेर्डेका के हाथों शिकस्त मिली।

रियो 2016 में काफी बड़े खिलाड़ियों ने लिया हिस्सा

साल 2016 में हुए ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेने वाले भारत के 117 सदस्यीय दल में काफी बड़े नाम शामिल थे। इन सभी के शानदार प्रदर्शन ने रियो 2016 में उम्मीदों काफी बढ़ा दी थी, लेकिन प्रतिद्वंदी खिलाड़ियों का तकनीकि और कौशल काफी उम्दा रहा। जिसने देश की सभी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। 

लंदन 2012 में कांस्य जीतने वाली भारतीय बैडमिंटन स्टार साइना नेहवाल (Saina Nehwal) ने लम्बे समय तक वर्ल्ड रैंकिंग में दूसरे पायदान पर रहने के बाद कुछ शानदार प्रदर्शन की बदौलत साल 2015 में नम्बर-1 रैंकिंग हासिल करने में कामयाब रहीं। रियो 2016 में यूक्रेन की मारिया यूल्टिनिया (Marija Ultinia) से हारकर वो अपने दूसरे ओलंपिक मेडल से चूक गईं।

रियो 2016 में भारतीय बैडमिंटन को दूसरा झटका तब लगा जब ज्वाला गुट्टा (Jwala Gutta) और अश्विनी पोनप्पा (Ashwini Ponnappa) की अनुभवी युगल जोड़ी ग्रुप चरण में अपने तीन मैच हार गई और अपने ग्रुप में अंतिम स्थान पर रही।

अनुभवी खिलाड़ी अचंता शरत कमल (Achanta Sharath Kamal) और भारतीय टेनिस जोड़ी रोहन बोपन्ना (Rohan Bopanna) और लिएंडर पेस (Leander Paes) भी अपने-अपने खेल में पहले दौर से आगे नहीं बढ़ सके। भारतीय टेबल टेनिस स्टार पुरुष एकल में रोमानियाई एड्रियन क्रिस्नन (Adrian Crisan) से हार गए, जबकि पेस और बोपन्ना की जोड़ी पुरुष युगल में पोलैंड की लुकाज़ कुबोट (Lukasz Kubot) और मार्सिन मटकोव्स्की (Marcin Matkowski) की जोड़ी से हार गई।

लंदन 2012 के कांस्य पदक विजेता भारतीय पहलवान योगेश्वर दत्त (Yogeshwar Dutt) भी अपने पहले दौर के 65 किग्रा वर्ग में हुए मुकाबले में मंगोलिया के गेंज़ोरिगिन मंदाकनारन (Ganzorigiin Mandakhnaran) से हारकर बाहर हो गए।

भारतीय निशानेबाज़ों से रियो 2016 में कुछ पदक जीतने की उम्मीद लगाई जा रही थी। खासतौर पर बीजिंग 2008 के स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra), लंदन 2012 के कांस्य विजेता गगन नारंग (Gagan Narang) और उम्दा फॉर्म में चल रहे जीतू राय (Jitu Rai) और हीना सिद्धू (Heena Sidhu) से काफी उम्मीदें की जा रही थी। जीतू राय और हीना सिद्धू दो साल पहले पुरुषों और महिलाओं के 10 मीटर एयर पिस्टल में क्रमशः वर्ल्ड नम्बर एक रैंक हासिल करने में कामयाब रहे थे।

हालांकि, गगन नारंग और हीना सिद्धू अपनी स्पर्धाओं में सेमीफाइनल में जगह नहीं बना पाए। वहीं अभिनव बिंद्रा और जीतू राय फाइनल में पहुंचने में सफल रहे, लेकिन वे 10 मीटर एयर राइफल और 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में क्रमशः चौथे और अंतिम स्थान पर रहे।

लेकिन इन प्रदर्शनों को भारतीय एथलीटों द्वारा किए गए प्रयास के हिसाब से सही ठहराया गया, क्योंकि अभिनव बिंद्रा ने अपने प्रदर्शन के बाद कहा, "मेरे पांच ओलंपिक खेलों में से मेरे लिए सबसे अच्छा रियो है, क्योंकि मैंने तैयारी के मामले में इस बार कोई कसर नहीं छोड़ी। मैंने पूरी कोशिश की और अपना सर्वश्रेष्ठ दिया। मैंने अपनी क्षमता के अनुसार सबसे बेहतर तैयारी की थी। इसलिए मुझे इससे बहुत संतुष्टि मिलती है।”

टोक्यो 2020 में इनसे सबसे ज्यादा होगी उम्मीद

टोक्यो ओलंपिक के लिए पहले ही 70 से अधिक भारतीय एथलीटों ने अपनी जगह पक्की कर ली है, इस साल होने वाले ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने के लिए कुछ एथलीट संघर्ष कर रहे थे, एक साल का स्थगन उन एथलीटों के लिए उम्मीद की किरण बनकर आया है, जिसके बाद संभावित रूप से भारत का सबसे बड़ा दल इस ओलंपिक में हिस्सा लेगा। विनेश फ़ोगाट, पीवी सिंधु, बजरंग पुनिया, अमित पंघल, मनु भाकर (Manu Bhaker) और सौरभ चौधरी (Saurabh Chaudhary) से इस समय पदक की उम्मीदें हैं।देश आशा करेगा कि वो उम्मीदों को पूरा करें और एक विरासत शुरू करें जो आने वाली पीढ़ियों के लिए कायम रह सके।

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