टोक्यो 2020 के लिए भारतीय टेबल टेनिस की आखिरी उम्मीद 

पुर्तगाल में हुए ओलंपिक टीम क्वालिफिकेशन में भारतीय टेबल टेनिस टीम 2020 ओलंपिक गेम्स में क्वालिफाई नहीं कर सकी, लेकिन एशिया क्वालिफिकेशन इवेंट के ज़रिए इस कारनामे को अंजाम दिया जा सकता है। 

भारतीय टेबल टेनिस की टोक्यो 2020 की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। पिछले हफ्ते क़्वालिफिकेशन के करीब पहुंचने के मौके को गवां देने के बाद दोनों ही पुरुष और महिला टीमों को अभी ओलंपिक गेम्स के लिए इंतज़ार करना होगा।

आईटीटीएफ वर्ल्ड टीम क्वालिफिकेशन में भारत के दिग्गज साथियान गणानाशेखरन की सिंगल्स में हार के साथ भारतीय मेंस टेबल टेनिस टीम को इस प्रतियोगिता को जल्द ही अलविदा कहना पड़ा। भारतीय टेबल टेनिस टीम पुर्तगाल में ओलंपिक गेम्स 2020 में अपनी जगह बनाने में असफल रहीं हैं। डबल्स में खेलते हुए टॉमस पोलांस्की और लुबोमिर जांकारिक के हाथ से मिली हार से हरमीत देसाई और अचंत शरत कमल भी टोक्यो के टेस्ट में फेल रहे। इतना ही नहीं भारत की सबसे बड़ी उम्मीद साथियान गणानाशेखरन भी ज़्यादा कमाल न दिखा सके और अपने प्रतिद्वंदियों से मिली शिकस्त का बोझ ढोते दिखे।

हालांकि कमल ने सिंगल्स का मुकाबला जीत क्वालिफिकेशन के पथ पर खुद को बरकरार रखा। दूसरी तरफ भारतीय महिला टेबल टेनिस टीम भी कारगर साबित नहीं हुई और उन्होंने भी टोक्यो 2020 का सुनहरा मौका गवां दिया। मनिका बत्रा, आयुका मुखर्जी और सुतीर्था मुखर्जी को फ्रांस की टीम ने 3-2 से शिकस्त दे किया बाहर।

साथियान और बत्रा का टोक्यो टेस्ट

उम्मीद ही इंसान की सबसे बड़ी प्रेरणा है और भारतीय टेबल टेनिस के खिलाड़ियों के लिए उम्मीद के तौर पर आएगा एशिया क्वालिफिकेशन इवेंट। इस प्रतियोगिता के ज़रिए 2020 ओलंपिक गेम्स में भारत सिंगल्स और मिक्स्ड डबल्स कैटेगरी में क्वालिफाई कर सकता है। अब देखना यह होगा कि थाईलैंड में भारतीय खिलाड़ियों की रणनीति क्या होगी।

जो करिश्मा पुर्तगाल में न हो सका उसे अब थाईलैंड में करने की मशक्कत होगी। मनिका बत्रा, साथियान गणानाशेखरन और अचंत शरत कमल अगर थाईलैंड में दम दिखा दें तो मानो टोक्यो का रास्ता बहुत आसान हो जाएगा।

अप्रैल से पहले भारत को एक पुख्ता विदेशी कोच की ज़रूरत है ताकि वे क्वालिफिकेशन में अच्छा प्रदर्शन कर टोक्यो तक अपने सफ़र को ले जा सकें। भारतीय टेबल टेनिस के पास फुल टाइम कोच के न होने की वजह से उनके प्रदर्शन में भारी गिरावट तो दिखी ही है और साथ ही रणनीतियों में भी कमियां नज़र आई हैं।

पुर्तगाल में हुई प्रतयोगिता की कमान भारत के पूर्व नेशनल चैंपियन सौम्यदीप रॉय के हाथ थी लेकिन परिणामों को देखा जाए तो वे खिलाड़ी और कोच दोनों के ही हित में नहीं है। अगर एक फुल टाइम कोच इस टीम को मिल जाता है तो यकीनी तौर पर टोक्यो 2020 के लिए क्वालिफाई करना थोडा आसान हो जाएगा।

क्या आपको यह आर्टिकल पसंद आया? इसे अपने दोस्तों के साथ साझा करें!