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सुमित नागल: अर्थर अशे में हार कर भी जीता सभी का दिल 

भारत के इस टेनिस स्टार के लिए साल 2019 रहा शानदार, जहां सुमित ने रोजर फ़ेडेरर से एक सेट छीना और फिर दक्षिण अमेरिका में हुए एटीपी चैलेंजर पर किया कब्ज़ा। 

लेखक सैयद हुसैन ·

टेनिस की दुनिया में जब भी कोई ग्रैंड स्लैम होता है तो भारत में आमूमन बड़े नामों पर चर्चा होती है। हालांकि उन दिग्गजों के बीच कुछ भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर भी भारतीय टेनिस फ़ैन्स का ध्यान रहता है।

इस साल खेले गए यूएस ओपन के पहले दिन जिस ख़बर ने सबसे ज़्यादा सुर्ख़ियां बटोरीं वह थी, एक भारतीय टेनिस खिलाड़ी की जिसने मौजूदा समय के सबसे बड़े टेनिस खिलाड़ी रोजर फ़ेडेरर से एक सेट छीन कर सनसनी मचा दी थी, और वह नाम था सुमित नागल का।

न्यू यॉर्क में इस साल अपना पहला ग्रैंड स्लैम खेलने उतरे नागल का पहले ही मैच में सामना सर्वश्रेष्ठ रोजर फ़ेडेरर के साथ था। लेकिन फिर जो हुआ उसकी शायद ही किसी ने उम्मीद भी की होगी।

दुनिया के सबसे बेहतरीन खिलाड़ी के ख़िलाफ़ खेलते हुए नागल न सिर्फ़ शांत और संयमित दिख रहे थे, बल्कि स्विटज़रलैंड के महान टेनिस खिलाड़ी के शॉट का जवाब भी दे रहे थे। नागल ने मैच का पहला सेट जीतते हुए टेनिस जगत में मानो हड़कंप मचा दिया था, हालांकि इस बढ़त को वह मैच में आगे नहीं ले जा पाए और फ़ेडेरर ने वापसी करते हुए मुक़ाबला अपने नाम कर लिया था। लेकिन तब तक टेनिस की दुनिया में भारत के सुमित नागल ने छाप छोड़ दी थी।

भारत के सुमित नागल ने 2019 यूएस ओपन में डेब्यू किया और रोजर फ़ेडेरर के ख़िलाफ़ खेलते हुए उन्होंने ज़बरदस्त रोमांच पैदा किया

‘’यह आसान नहीं होता है कि जाते ही आप सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दें, ये वह पल होता है जिसे आप जीते हैं, जिसका सपना देखते हैं, बड़े मंच पर खेलना। मुझे लगता है कि उन्होंने बहुत अच्छा खेला।‘’ सुमित नागल के साथ हुए उस मैच के बाद फ़ेडेरर ने इस तरह नागल की तारीफ़ की थी।

सीज़न में पहली बार

2019 सुमित नागल के लिए वह साल रहा, जहां उन्होंने बहुत कुछ पहली बार किया। इसमें कोई शक नहीं है कि नागल के लिए ग्रैंड स्लैम में डेब्यू करना साल की सबसे बड़ी उपलब्धि थी। इसके अलावा सुमित पहले भारतीय बने जिन्होंने दक्षिण अमेरिका में हुए एटीपी चैलेंजर पर कब्ज़ा किया।

सीज़न का अंत इस दिल्ली के खिलाड़ी ने तब और भी शानदार अंदाज़ में किया जब एक साल में सबसे ज़्यादा प्रतियोगिताओं के सेमीफ़ाइनल में पहुंचे, सुमित ने साल 2019 में कुल 8 बार सेमीफ़ाइनल का सफ़र तय किया। ये एक ऐसा रिकॉर्ड है जो उन्होंने फ़ेडेरिको कोरिया के साथ साझा किया।

‘’यह एक शानदार सीज़न था, मैं कोई शिकायत नहीं कर सकता। मैंने इस साल बहुत कुछ किया, कई रिकॉर्ड भी तोड़े।‘’ नागल ने ये बातें ओलंपिक चैनल के साथ बातचीत के दौरान कही।

‘’यूएस ओपन शानदार था, फिर मैं पहला भारतीय बना जिसने दक्षिण अमेरिका में एटीपी चैलेंजर जीता, यूरोप में फ़ाइनल तक पहुंचा। इस साल की शुरुआत में मैंने सोचा भी नहीं था कि यहां तक पहुंच पाउंगा। अगर आप देखें तो जनवरी तक मैं एटीपी रैंकिंग में 400 के आस पास रहता था, किसी बड़ी प्रतियोगिता में भाग नहीं ले पाता था। और अब मुझे देखिए, सबसे ज़्यादा सेमीफ़ाइनल्स खेलने का रिकॉर्ड अपने नाम किया। इस दौरान मैंने कई बेहतरीन मैच खेले, और यह अहमियत रखता है।‘’

सुमित नागल और उनके पहले के दिन

नई दिल्ली में पले बढ़े नागल का पहला प्यार टेनिस नहीं था। यहां तक कि ये भारतीय खिलाड़ी इस खेल के बारे में ज़्यादा कुछ जानता भी नहीं था, लेकिन जब एक दिन अपने घर के पास पितमपुरा, पश्चिमी दिल्ली में स्थित एक टेनिस कोर्ट पहुंचे तब वहां से उनकी ज़िंदगी बदलने वाली थी।

सुमित नागल ने आगे कहा ‘’मेरे पिता जी मुझे सबसे पहले टेनिस कोर्ट ले गए थे, मैं तब क्रिकेट का बड़ा फ़ैन था, लेकिन वह हमेशा चाहते थे कि मैं कोई व्यक्तिगत खेल खेलूं। और फिर वहीं से ये सब शुरू हुआ।‘’

‘’मैंने तभी से खेलना शुरू कर दिया था जब मैं 8 साल का भी नहीं था, सच कहूं तो मैं जब टेनिस कोर्ट पहुंचा था तो इस खेल के बारे में कुछ जानता भी नहीं था। ये मेरे लिए बिल्कुल नया था, कुछ महीने मैंने स्थानीय कोर्ट में प्रैक्टिस की और फिर मेरे घर के क़रीब टेनिस अकादमी में मुझे भेज दिया गया। 2-3 साल मेरे लिए दिन बहुत बड़े हुआ करते थे, इसकी शुरुआत सुबह में एक अभ्यास सत्र के साथ होती थी, उसके बाद स्कूल जाता था, फिर घर लौटता था, फिर फ़िट्नेस सत्र के लिए दोबारा जाता था। फिर घर लौटकर होम वर्क पूरा करता था और रात को 9.30-10 बजे तक बिस्तर पर सोने जाता था। यही सिलसिला कई सालों तक चलता रहा।‘’

शुरुआती समय में की गई कड़ी मेहनत ने आख़िरकार रंग दिखाना शुरू कर दिया था और नागल का चयन भारत के दिग्गज टेनिस खिलाड़ी महेश भूपती के ‘अपोलो मिशन 2018’ के लिए 2008 में हो गया था। ये एक ऐसा प्रोजेक्ट था जिसका लक्ष्य था 2018 में भारत की ओर से पहला ग्रैंड स्लैम सिंगल्स विजेता को बनाना।

हालांकि ये प्रोजेक्ट दो सालों के लिए ही था, भूपती ने नागल का साथ कभी नहीं छोड़ा और नागल भी भूपती के हमेशा शुक्रगुज़ार हैं। सुमित नागल ने आगे बताया ‘’मेरे पास उनकी तारीफ़ कहने के लिए शब्दों की कमी पड़ जाएगी, वह मेरे साथ अच्छे और बुरे दोनों ही समय में थे। 10 साल की उम्र से ही उन्होंने मेरी इस तरह मदद की जैसा कोई और नहीं कर सकता। वह मेरे लिए गुरु की तरह हैं, जब भी मुझे उनकी ज़रूरत होती है, मैं जानता हूं कि वह मेरे साथ होंगे।‘’ 

राफ़ेल नडाल के फ़ैन

जिसने हमेशा स्पेन के दिग्गज खिलाड़ी राफ़ेल नडाल को अपना आदर्श माना हो वह अगर ये कहे कि लाल मिट्टी पर खेलना उसे ज़्यादा पसंद है, तो इसमें हैरानी की कोई बात नहीं होगी। इसके बावजूद विंबलेडन बॉयज़ उन्होंने घास पर जीता जबकि एक चैलेंजर हार्ड कोर्ट पर जीता तो एक मिट्टी पर।

US ओपन में भारतीय टेनिस नंबर 1 सुमित नागल का सामना दूसरी सीड के डोमिनिक थीम से हो सकता है।  

‘’मैं मिट्टी पर ज़्यादा सहज महसूस करता हूं, मुझे लगता है कि मेरा खेलने का तरीक़ा दूसरे कोर्ट की तुलना में मिट्टी के लिए ज़्यादा सही है।‘’ दुनिया के 130वें रैंकिंग के खिलाड़ी नागल ने ये बात कही।

तो क्या आने वाले समय में हम नागल के खेल में कुछ नडाल जैसे शॉट भी देखेंगे ? इस सवाल के जवाब में हंसते हुए नागल ने कहा, ‘’अभी ये मुमकिन नहीं, और ज़ोर ज़ोर से हंसने लगे… ‘’आप मेरी तुलना उनसे कतई नहीं कर सकते। वह अभी के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में से एक हैं, मैं एक दिन उनकी तरह खेलना चाहता हूं, लेकिन अभी मैं उनके आस पास भी नहीं।‘’

अब जब 2020 सीज़न की शुरुआत बस होने ही वाली है, ऐसे में नागल की पहली प्राथमिकता है कि टॉप-100 में अपने आप को शामिल किया जाए। नागल की नज़र में ओलंपिक भी है, लेकिन वह ये भी जानते हैं कि 2020 टोक्यो ओलंपिक का सफ़र अभी उनकी पहुंच से दूर है।

सुमित नागल ने और बताया ‘’बिल्कुल, एक दिन मैं ओलंपिक में भी खेलूंगा, लेकिन 2020 टोक्यो ओलंपिक में खेलना अभी पहुंच के बाहर है। मेरी नज़रें 2024 पेरिस ओलंपिक पर हैं।‘’