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टोक्यो 2020 में भारतीय महिला हॉकी टीम के प्रतिद्वंदियों पर एक नज़र

देखें कि भारतीय वूमेंस हॉकी टीम की टोक्यो 2020 के लिए क्या चुनौतियां है।

लेखक जतिन ऋषिराज ·

टोक्यो 2020 के लिए इंटरनेशनल हॉकी फेडरेशन (एफआईएच) ने शेड्यूल जारी कर दिया है। भारतीय वूमेंस हॉकी टीम वर्ल्ड चैंपियन नीदरलैंड से भिड़कर अपने कारवां की शुरुआत करेगी। वहीं ग्रुप स्टेज में उनका आखिरी मुकाबला दक्षिण अफ्रीका से होगा। ऐसे में एक नज़र डालते हैं टोक्यो 2020 में रानी रामपाल की अगुवाई वाली भारतीय महिला हॉकी टीम के प्रतिद्वंदियों पर।

नीदरलैंड

मुक़ाबले की तारिक़: 25 जुलाई 2020, ओई हॉकी स्टेडियम

विश्व नंबर 1 नीदरलैंड के हौंसले टोक्यो 2020 में प्रवेश करने के लिए बुलंद हैं। भारतीय हॉकी वूमेंस टीम का पहला मुकाबला नीदरलैंड के साथ खेला जाएगा और दोनों ही टीमें 2020 ओलंपिक गेम्स की शुरुआत जीत के साथ करना चाहेगी। रियो ओलंपिक गेम्स में उम्दा प्रदर्शन करते हुए नीदरलैंड ने सिल्वर मेडल पर अपनी पकड़ बनाई थी। इतना ही नहीं 2014 और 2018 का वूमेंस वर्ल्ड कप जीत कर इस टीम ने एक बार फिर अपने सर्वश्रेष्ठ होने का प्रमाण दिया था। कोच फेमके कोइजमैन की अगुवाई में इस टीम ने यूरो हॉकी नेशनल चैंपियनशिप के 2017 और 2019 के संस्करणों में गोल्ड मेडल जीत अपने देश को गर्व महसूस कराया।

भारतीयों के लिए मुख्य खतरा मिडफील्ड खिलाड़ी लिडिविज वेल्टेन होगीं, जिन्हें इस सीजन में शानदार प्रदर्शन की वजह से एफआईएच प्लेयर ऑफ द ईयर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था। वेल्टन पांच गोल के साथ 2019 यूरोहॉकी नेशंस चैंपियनशिप में संयुक्त रूप से शीर्ष स्कोरर थीं, जिसमें सेमीफाइनल में एक ब्रेस के साथ-साथ फाइनल में एक गोल भी शामिल था। वेल्टेन के अलावा, भारतीय डिफेन्स को ईवा डी गोएड को क़ाबू में रखने की पूरी कोशिश करनी होगी, जो 2018 में एफआईएच प्लेयर ऑफ द ईयर अवार्ड अपने नाम कर चुकीं हैं। इसके अलावा 2019 वूमेंस एफआईआर प्रो लीग की दूसरी सबसे बड़ी स्कोरर फ्रेडरिक माल्टा भी भारत के लिए ख़तरा बन सकती हैं।

भारतीय महिला हॉकी टीम और नीदरलैंड का आमना-सामना 9 दफा हुआ है जिनमें से 8 बार नीदरलैंड ने मैदान मारा जबकि भारत केवल 1 बार खुद को विजयी घोषित कर पाया था। पिछले तीन मुकाबलों में इस यूरोप की टीम ने भारत के खिलाफ कुल 22 गोल दागे हैं और भारतीय वूमेंस हॉकी टीम महज़ 2 बार उनके गोल पोस्ट को छू पाई है।

जर्मनी

मुक़ाबले की तारिक़: 27 जुलाई 2020, ओई हॉकी स्टेडियम

जर्मनी महिला हॉकी टीम ने रियो ओलंपिक गेम्स में कांस्य जीत कर अपने उम्दा होने का सबूत पेश किया था। इतना ही नहीं 2019 एफआईएच प्रो लीग में भी ब्रॉन्ज़ मेडल अपने नाम किया और यूरो हॉकी नेशनल चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीत प्रतियोगिता का अंत किया। इटली के खिलाफ 9-0 के बड़े अंतर से जीत दर्ज कर जर्मनी ने टोक्यो 2020 के लिए अपनी जगह पक्की की और पूरी उम्मीद है कि वह जापान में ज़रूर उम्दा प्रदर्शन करेंगे।

जर्मनी के खिलाफ रानी रामपाल और उनकी टीम के लिए मुख्य खतरा पेनल्टी कार्नर के माध्यम से आता है, जिसमें 22 वर्षीय नाइक लोरेंज का नाम मुख्य रूप से शामिल है। लोरेंज के नाम पर 100 मुक़ाबलों में 24 गोल दर्ज हैं और उन्हें इस सीज़न में एफआईएच प्रो लीग में अपने शानदार प्रदर्शन के लिए एफआईएच राइजिंग स्टार ऑफ द ईयर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है।

भारतीय वूमेंस हॉकी टीम और जर्मनी वूमेंस हॉकी टीम आज तक 4 बार मैदान में भिड़ीं हैं जिसमें 3-1 से जर्मनी का पलड़ा भारी रहा है। हालांकि आखिरी मुकाबले में भारत ने 2-1 से जीत दर्ज कर इस आंकड़ें को बदलने की कोशिश की। उस मुकाबले में भारत की ओर से दीपिका और अमनदीप कौर एक-एक गोल दागने में सफल रहीं। अब देखना यह होगा कि टोक्यो 2020 में इन दोनों टीमों की रणनीति क्या होती है।

ग्रेट ब्रिटेन

मुक़ाबले की तारिक़: 29 जुलाई 2020, ओई हॉकी स्टेडियम

रियो ओलंपिक गेम्स की विजेता ग्रेट ब्रिटेन फिलहाल विश्व में 5वें स्थान पर काबिज़ है। इसके अलावा इस टीम ने ओलंपिक गेम्स में दो और ब्रॉन्ज़ मेडल जीत कर अपने लाजवाब होने का प्रमाण दिया। इस साल के शुरुआत में भारतीय हॉकी टीम और ग्रेट ब्रिटेन के बीच सीरीज़ 2-2 से ड्रा रही। इसके अलावा ग्रेट ब्रिटेन हॉकी टीम का पलड़ा भारत पर भारी है क्योंकि इसके अलावा उन्होंने हमारे खिलाफ 2 सीरीज़ में जीत हासिल की है।

मैडी हिंच, लॉरा अनसवर्थ और गिसेल एंस्ले यह सभी 2016 रियो ओलंपिक विजेता ग्रेट ब्रिटेन टीम का हिस्सा थीं और इन सभी अनुभवी खिलाड़ियों की यह कोशिश होगी कि युवा खिलाड़ियों के साथ मिलकर यह अपने ख़िताब को बरक़रार रखें।

भारतीय महिला टीम ने अपने ओलंपिक क्वालीफायर से पहले तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में ग्रेट ब्रिटेन के साथ दो-दो हाथ किए थे। रानी रामपाल और उनकी टीम उस श्रृंखला में दो ड्रॉ करने में सफल रही, जबकि एक गेम में भारतीय टीम को 1-3 से हार का सामना करना पड़ा।

आयरलैंड

मुक़ाबले की तारिक़: 31 जुलाई 2020, ओई हॉकी स्टेडियम

साल 1980 यानी ओलंपिक गेम्स में महिला हॉकी का पहला साल था, उस साल आयरलैंड महिला हॉकी टीम को ओलंपिक गेम्स में भाग लेने के लिए न्योता दिया गया था लेकिन वह खेल न सके। तब से लेकर अब तक ये टीम कभी भी ओलंपिक गेम्स में क्वालिफाई नहीं कर पाई है। हालांकि साल 2012 और 2016 उनके लिए अच्छा रहा और वह क्वालिफाई करने के सबसे करीब आए। इसी दृढ़ता का प्रतीक है यह टीम कि कभी भी क्वालिफाई न करने के बावजूद भी इस टीम ने हौसला नहीं छोड़ा और 2020 ओलंपिक गेम्स में खेलने की राह बना ली।

एफआईएच वूमेंस वर्ल्ड कप 2018 के सिल्वर मेडल विजेता आयरलैंड अपना ओलंपिक कारवां शुरू करने के लिए तैयार हैं। हम आपको बता दें कि भारत और आयरलैंड पिछले 5 साल में 10 बार भिड़े हैं जिनमें से भारत को 3 बार जीत नसीब हुई है।

टोक्यो 2020 में इन दो टीमों का मुकाबला वाकई में दिलचस्प होने वाला है। रानी रामपाल की अगुवाई में यह वूमेंस हॉकी टीम एक बहुत ही मज़बूत रणनीति के साथ उतरना चाहेगी और खेल की दुनिया का सबसे बड़ा इवेंट अपने हक में करना चाहेगी।

साउथ अफ्रीका

मुक़ाबले की तारिक़: 1 अगस्त, 2020

साल 2000 के बाद से 12 सालों में साउथ अफ़्रीकी वूमेंस हॉकी टीम ने हर बार ओलंपिक गेम्स के लिए क्वालिफाई किया है। हालांकि गेम्स के दौरान इस टीम का प्रदर्शन बेहद ख़ास नहीं रहा और साल 2004 में वह 9वें स्थान पर रही थी। 17 सालों में भारतीय महिला हॉकी टीम और दक्षिण अफ़्रीकी हॉकी टीम की भिडंत 13 बार हुई है। इस भिडंत में भारत का पलड़ा ज़्यादा भारी रहा है और टोक्यो 2020 में भी ऐसे ही किसी परिणाम की उम्मीद की जा सकती है।

यक़ीनन दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत फेवरेट के तौर पर इस प्रतियोगिता में उतरेगा, लेकिन दक्षिण अफ्रीकी टीम से भारत को सावधान रहने की ज़रूरत होगी। आपको बता दें यह वो ही टीम है जिसने 2020 टोक्यो खेलों के लिए अपने क्वालिफिकेशन टूर्नामेंट में एक भी गोल खाए बिना सोलह गोल दागे। इस साल 21 मुक़ाबलों में 19 गोल करने वाली, मिडफील्डर लिलियन डु प्लेसिस 2020 टोक्यो गेम्स में भारतीय खेमे के लिए मुख्य खतरा साबित हो सकती हैं।