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साल 2019 रेसलिंग में भारत के लिए ओलंपिक कोटा और भविष्य की उम्मीदें देकर गया

भारतीय कुश्ती के दो बड़े नाम बजरंग पूनिया और विनेश फ़ोगाट ने 2019 वर्ल्ड चैंपियनशिप में नहीं किया निराश।

लेखक सैयद हुसैन ·

अब जब साल 2019 ख़त्म होने की कगार पर है, ऐसे में भारतीय पहलवान, कोच और फ़ेडरेशन यही कहेंगे कि यह साल शानदार रहा। पिछले 12 महीने भारतीय पहलवानों के लिए बेहद क़ामयाबी से भरे रहे, जहां बजरंग पूनिया और विनेश फ़ोगाट ने ओलंपिक कोटा हासिल किया तो कईयों ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

विनेश फ़ोगाट की शानदार फ़ॉर्म

रियो 2016 गेम्स में तब 21 वर्षीय विनेश फ़ोगाट का ओलंपिक में पदक जीतने का सपना क्वार्टर फ़ाइनल में आकर तब टूट गया जब चीन की सुन यनन के ख़िलाफ़ बाउट के दौरान उनका घुटना मुड़ गया और इस वजह से ओलंपिक से बाहर होना पड़ा।

उस निराशाजनक हादसे के क़रीब 4 साल बाद एक बार फिर हरियाणा की यह पहलवान अपने शबाब पर हैं, और वह अब टोक्यो 2020 में पदक जीतने वाली भारत की सबसे बड़ी दावेदारों में से एक हैं। 2018 में कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के बाद फ़ोगाट का शानदार प्रदर्शन इस साल भी जारी रहा जहां उन्होंने जुलाई में स्पेन में हुई ग्रैंड प्रिक्स में गोल्ड मेडल पर कब्ज़ा किया। 

इसके बाद भी इस 25 वर्षीय भारतीय गैपलर की फ़ॉर्म दूसरी प्रतियोगिताओं में भी बदस्तूर जारी रही, यासर डोगू इंटरनेशनल और पोलैंड ओपन में भी फ़ोगाट ने स्वर्ण पदक जीता। इस दौरान उन्होंने रियो गेम्स की कांस्य पदक विजेता सोफ़िया मैट्सन को भी चारों ख़ाने चित किया।

विनेश के लिए साल 2019 का सबसे बेहतरीन लम्हा नूर सुल्तान में हुई वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के दौरान आया जहां वह देशवासियों की उम्मीदों पर खरी उतरीं और कांस्य पदक के साथ साथ ओलंपिक कोटा भी अपने नाम कर गईं। भारतीय पहलवान को राउंड ऑफ़ 16 में हार मिली थी, लेकिन इसके बाद वह रेपेचेज राउंड के ज़रिए कांस्य पदक की दावेदारी में वापस आईं। विनेश ने इस मौक़े का पूरा फ़ायदा उठाया और इस दौरान उन्होंने अमेरिका की साराह हिल्डरब्रैंड्ट, यूक्रेन की यूलिया ख़ालवादज़ी और ग्रीस की मारिया प्रेवोलाराकी को रौंदते हुए कांस्य पदक पर कब्ज़ा किया।

यह पदक उनके लिए और भी यादगार इसलिए बना क्योंकि विनेश भारत की पहली पहलवानबनीं, जिन्होंने ओलंपिक कोटा हासिल किया। जबकि इस प्रतियोगिता में साक्षी मलिक और दिव्या करण जैसे नाम भी शामिल थे, लेकिन यह सभी शुरुआती दौर में ही हारकर बाहर हो गईं थीं। विनेश ने साल का अंत राष्ट्रीय चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल के साथ ख़त्म किया और उम्मीद है कि 53 किग्रा वर्ग में इस भारतीय महिला गैपलर का जलवा आगे भी बरक़रार रहेगा।

चार पदक और तीन ओलंपिक कोटा

वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारतीय पुरुष पहलवान भी कहां पीछे रहने वाले थे, बजरंग पूनिया, रवि कुमार दहिया, दीपक पूनिया और राहुल अवारे ने भी इस प्रतियोगिता में पदक अपने नाम किए। इनमें से पहले तीन नामों ने भी अपने देश के लिए ओलंपिक कोटा हासिल कर लिया था।

वर्ल्ड चैंपियनशिप में बजरंग पूनिया 65 किग्रा वर्ग में दुनिया के नंबर-1 पहलवान के तमगे के साथ मैट पर उतर रहे थे, और उन्होंने कांस्य पदक के साथ अपने नाम के अनुरूप ही प्रदर्शन भी किया। हालांकि स्वर्ण पदक न जीत पाना उनके लिए निराशा से कम नहीं था, लेकिन 25 वर्षीय इस पहलवान का पहली बार ओलंपिक कोटा हासिल करना देश के लिए ख़ुशी और गौरान्वित करने वाला पल था।

एक तरफ़ जहां बजरंग को चैंपियनशिप का सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा था तो वहीं राहुल अवारे और रवि कुमार दहिया ने अपने धमाकेदार प्रदर्शन से अंतर्राष्ट्रीय रेसलिंग जगत को अचंभित कर दिया। दहिया ने कांस्य पदक के सफ़र के दौरान कई बड़े नामों को धूल चटाई जिनमें जापान के युकी ताकाहाशी और अरमेनिया के अर्सेन हरुतयुनयान शामिल थे।

ठीक इसी तरह 28 वर्षीय राहुल अवारे ने भी कई बड़े नामों को मात देते हुए 61 किग्रा कैटेगिरी में रेपेचेज राउंड के ज़रिए ब्रॉन्ज़ मेडल पर कब्ज़ा किया। अवारे की जीत इसलिए भी ख़ास रही क्योंकि उन्होंने अपने राज्य महाराष्ट्र का नाम भी रेसलिंग के मानचित्र पर अंकित कर दिया, क्योंकि अब तक कुश्ती की दुनिया में हरियाणा के ही पहलवानों का दबदबा देखा जाता था।

दीपक पूनिया ने जलाया उम्मीदों का दीपक

2019 ज़ाहिर तौर पर युवा और ऊभरते गैपलर दीपक पूनिया के नाम रहा, वह इसी साल अगस्त में 18 साल बाद पहले पहलवान बने जिन्होंने जूनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता हो। लेकिन ये तो बस आगे आने वाले अद्भुत सीज़न की एक शुरुआत भर थी। नुर सुल्तान में भारत की तरफ़ से सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में पहला गोल्ड मेडल जीतने के बेहद क़रीब पहुंच गए थे दीपक पूनिया, लेकिन एड़ी में लगी चोट ने उन्हें फ़ाइनल मुक़ाबले से नाम वापस लेने पर मजबूर कर दिया।

इस युवा गैपलर के नाम नूर सुल्तान वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में भारत का पहला और एकमात्र रजत पदक रहा, साथ ही साथ दीपक ने 86 किग्रा वर्ग में भारत की ओर से ओलंपिक कोटा भी हासिल कर लिया। इसी सीज़न दीपक को उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए जूनियर रेसलर ऑफ़ द ईयर के ख़िताब से भी नवाज़ा गया। लेकिन जिस अंदाज़ में इस युवा भारतीय गैपलर ने जूनियर से सीनियर स्तर पर अपने प्रदर्शन को दोहराया है, उसने टोक्यो 2020 में भारत के लिए पदक की उम्मीदों का दीपक भी जला दिया है।

2019 में भारतीय कुश्ती लगातार ऊचाईंयों की ओर जाती रही, जहां बड़े नामों ने उम्मीद के मुताबिक़ प्रदर्शन किया तो वहीं कई ऊभरते हुई प्रतिभाओं ने भी रेसलिंग जगत में अपनी पहचान स्थापित की। भारतीय पहलवानों का ये वर्चस्व और दबदबा साउथ एशियन गेम्स में भी देखने को मिला, यानी भारतीय गैपलर का फ़ॉर्म बिल्कुल सही समय पर आया है, क्योंकि अब 2020 के समर ओलंपिक में बस कुछ ही महीनों का वक़्त बचा है।