दीपक पुनिया को फ्यूचर कुश्ती स्टार बनाने के लिए सुशील कुमार का शुक्रिया 

जब युवा खिलाड़ी नौकरी की तलाश में थे, तब दो बार के ओलंपिक पदक विजेता ने दीपक पुनिया से कुश्ती को प्राथमिकता देने की बात कही।

खेल की दुनिया में अक्सर देखा जाता है कि दिग्गज बनने से पहले अपने युवा अवस्था में वो खिलाड़ी चमक बिखेरता है और सबको अपने खेल से रोमांचित करता है। ज्यादातर देखा गया है कि स्टार अनुभवी खिलाड़ियों के पास गुरुमंत्र देने के लिए कम वक्त होता है लेकिन जब बात सुशील कुमार की होती है तो मामला पूरा बदल जाता है, जिसने दीपक पुनिया (Deepak Punia) जैसे खिलाड़ी की खोज की है।

राह से भटकने से पहले सुशील कुमार ने उनकी प्रतिभा को पहचाना, और उनके खेल को निखारा, जिनको दीपक पुनिया गुरुजी कहते हैं

सीमित साधनों का सेवन करने वाले परिवार के सदस्य दीपक पुनिया को जब 2016 में भारतीय सेना में सिपाही के पद की पेशकश की गई थी, तब वो उस अवसर को हासिल करना चाहते थे जो उन्हें एक स्थिर आय दिला सकती थी। हालांकि, सुशील कुमार (Sushil Kumar) ने ऐसा कुछ होने नहीं दिया।

उनके गुरुजी ने उन्हें कुश्ती पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा और कहा कि ऐसी नौकरियां बाद में उनके पास खुद आएंगी। और जब दो बार के ओलंपिक पदक विजेता ऐसी सलाह देता है तो किसी भी पहलवान का मनोबल बढ़ ही जाता है।

दीपक पुनिया ने ठीक वैसा ही किया और सुशील कुमार द्वारा आयोजित कुछ स्पोंसर्स की मदद से उसी साल विश्व कैडेट चैंपियन बन गए। 

सपने जैसा रहा दीपक पुनिया के लिए साल 2019

भारतीय पहलवान कड़ी मेहनत करते रहे और कुछ साल बीत जाने के बाद उन्होंने अपना एक नाम बनाया। दीपक पुनिया 18 वर्ष की उम्र में अगस्त 2019 में जूनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने, जिन्होंने फाइनल में रूस के पहलवान एलिक शबज़ुखोव (Alik Shebzukhov) को हराया।

इस खिताब ने उनका मनोबल ओर बढ़ा दिया क्योंकि दीपक पुनिया सेमीफाइनल में कंधे की चोट से जूझते हुए कुश्ती लड़ी थी।

एक महीने बाद, उन्होंने अपने सपने के करीब कदम रखा, जब उन्होंने टोक्यो 2020 के लिए क्वालीफाई कर लिया। उन्होंने सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में 86 किग्रा पुरुषों की फ़्रीस्टाइल में कोलम्बिया के पहलवान कार्लोस इज़ेक्विर्डो (Carlos Izquierdo) के खिलाफ अपनी बाउट जीतकर ओलंपिक का टिकट बुक किया था। दीपक पुनिया ने पेनल्टीमेट राउंड में स्टीफन रीचमुथ को हराया लेकिन एक पैर में चोट लगने की वजह से वो फाइनल में मैट पर नहीं उतर सके थे।

इस टूर्नामेंट का शानदार अंदाज में अंत होता, अगर फाइनल में दीपक मैट पर उतरते, क्योंकि इस मुक़ाबले में उनके ख़िलाफ़ ओलंपिक और विश्व चैंपियन हसन यज़दानी (Hassan Yazdani) थे।

”उन्होंने हाल ही में हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए लगातार सीखने के लिए भूख को उजागर किया, उन्होंने कहा “मैंने कुछ सीखा होता। वो एक ओलंपिक चैंपियन भी है, इसलिए प्रतिस्पर्धा करना अच्छा अनुभव होता। लेकिन तब, मेरी चोट को और बढ़ाने का जोखिम था। इस बेहतरीन प्रदर्शन के बाद उन्हें यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग द्वारा 'जूनियर रेसलर ऑफ द ईयर' भी चुना गया।

कैसे दीपक पुनिया बेहतर होते गए?

उनके पूर्व कोच व्लादिमीर मेस्टविरिश्विली (Vladimir Mestvirishvili) के अनुसार, भारतीय पहलवान को बेहतर करने के लिए निरंतर प्रयास करने की आवश्यकता है, जो वो लगातार कर रहे हैं।

“आपको चार चीजें चाहिए - मस्तिष्क, शक्ति, भाग्य और मैट पर लचीलापन। दीपक के पास यह सब है। वह एक अनुशासित पहलवान है - जब तक वो हासिल नहीं कर लेते, तब तक वो लगातार एक नई तकनीक के लिए प्रयास करते रहते हैं।

उन्हें दूध पीना पहुत पसंद है जो उनके शाररिक विकास में मदद करता है।  20 साल के इस भारतीय पहलवान के पिता सुभाष पुनिया उन्हें दूध और फल देने के लिए उनके प्रशिक्षण केंद्र तक हर दिन 60 किमी की यात्रा किया करते थे।

सपने का आधा सफर: 2020 ओलंपिक

विश्व चैंपियनशिप के सेमीफाइनल में चोटिल होने के बाद, दीपक पुनिया इस साल केवल पिछले महीमे रोम के माटेयो पेलिकोन मेमोरियल में मैट पर नज़र आए, जहां उन्हें पहले ही दौर में नॉकआउट कर दिया गया।
हालांकि, वो टोक्यो 2020 ओलंपिक में पदक के साथ अपने सपने को जारी रखने के बेताब हैं। हालांकि उनकी वापसी किसी स्क्रिप्ट जैसी नहीं रही, दीपक पुनिया एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में मैट पर उतरेंगे और पदक जीतने की उम्मीद करेंगे, जहां हर कोई पदक की उम्मीद कर रहा होगा।

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